भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने कॉर्पोरेट बॉन्ड के टोकनाइजेशन के लिए 'Demat 2.0' की शुरुआत की है, जो ब्लॉकचेन और CBDC के जरिए निवेश को लोकतांत्रिक बनाएगा।
- SEBI और RBI ने कॉर्पोरेट बॉन्ड के टोकनाइजेशन के लिए 'Demat 2.0' पायलट प्रोग्राम लॉन्च किया।
- ब्लॉकचेन और सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) के माध्यम से सेटलमेंट प्रक्रिया को तेज किया जाएगा।
- टोकनाइजेशन से महंगे बॉन्ड्स को छोटे हिस्सों में बांटकर रिटेल निवेशकों के लिए सुलभ बनाया जाएगा।
भारतीय वित्तीय बाजार में एक क्रांतिकारी बदलाव लाते हुए, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने 'Demat 2.0' पायलट प्रोग्राम की घोषणा की है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य कॉर्पोरेट बॉन्ड का टोकनाइजेशन करना और सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) तथा ब्लॉकचेन तकनीक का उपयोग करके सेटलमेंट समय को न्यूनतम करना है।
मुंबई में आयोजित ग्लोबल फिनटेक फेस्ट के दौरान SEBI अध्यक्ष तुहिन कांता पांडे ने बताया कि यह परियोजना इस बात की जांच करती है कि क्या डिस्ट्रिब्यूटेड लेजर टेक्नोलॉजी (DLT) सुरक्षा और सेटलमेंट प्रक्रियाओं को करीब लाकर परिसंपत्ति सेवा के विभिन्न हिस्सों को स्वचालित कर सकती है। इस पायलट प्रोजेक्ट में CDSL, NSDL, BSE, NSE, HDFC बैंक और ICICI बैंक जैसे प्रमुख संस्थान शामिल हैं।
प्रारंभिक चरण में, इस पायलट की शुरुआत तीन इश्यूअंस के साथ हुई है, जिसमें लार्सन एंड टुब्रो (L&T) द्वारा जारी ₹500 करोड़ का बॉन्ड शामिल है। इसमें SBI, एक्सिस बैंक और SBI म्यूचुअल फंड जैसे बड़े निवेशकों ने रुचि दिखाई है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, 'Demat 2.0' केवल एक तकनीकी अपग्रेड नहीं है, बल्कि यह वित्तीय समावेशन की दिशा में एक बड़ा कदम है। जहां 1996 में 'Demat 1.0' ने कागजी शेयरों को डिजिटल बनाया था, वहीं Demat 2.0 स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट्स के माध्यम से स्वामित्व की कानूनी निश्चितता को बनाए रखते हुए परिसंपत्तियों के विखंडन (Fractionalization) की अनुमति देता है। इसका अर्थ है कि ₹10 लाख का एक बॉन्ड अब ₹100 के छोटे टुकड़ों में उपलब्ध हो सकता है, जिससे आम आदमी भी कॉर्पोरेट ऋण बाजार में प्रवेश कर सकेगा।
"भारत के पास वैश्विक वित्त के भविष्य के ढांचे को आकार देने में एक विश्वसनीय भागीदार बनने का सुनहरा अवसर है।" - RBI गवर्नर मल्होत्रा
भविष्य में, इस टोकनाइजेशन प्रक्रिया को इक्विटी, म्यूचुअल फंड और सोने तक विस्तारित किया जा सकता है। RBI के कार्यकारी निदेशक पी. वासुदेवन ने संकेत दिया है कि केंद्रीय बैंक पहले से ही गोल्ड टोकनाइजेशन कार्यक्रम पर विचार कर रहा है।
तकनीकी प्रगति के साथ-साथ, RBI गवर्नर ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के उपयोग पर भी जोर दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि AI को अपनाते समय साइबर खतरों और डेटा गोपनीयता जैसे जोखिमों का प्रबंधन करना अनिवार्य है। SBI के अध्यक्ष सी.एस. सेट्टी ने बैंकिंग क्षेत्र में AI के लिए '3 A's' (Accuracy, Accountability, Affordability) का सिद्धांत प्रस्तावित किया।
| विशेषता | Demat 1.0 (1996) | Demat 2.0 (वर्तमान) |
|---|---|---|
| मुख्य उद्देश्य | कागजी शेयरों का डिजिटलीकरण | परिसंपत्तियों का टोकनाइजेशन |
| तकनीक | सेंट्रलाइज्ड डेटाबेस | ब्लॉकचेन / DLT / CBDC |
| पहुंच | संस्थागत/उच्च नेटवर्थ | रिटेल (फ्रैक्शनल ओनरशिप) |
Frequently Asked Questions
1. टोकनाइजेशन क्या है?
टोकनाइजेशन एक प्रक्रिया है जिसमें किसी बड़ी वित्तीय संपत्ति (जैसे बॉन्ड) को डिजिटल टोकन के रूप में छोटे हिस्सों में तोड़ दिया जाता है, जिससे छोटे निवेशक भी उसमें निवेश कर सकें।
2. Demat 2.0 से निवेशकों को क्या लाभ होगा?
इससे निवेश की लागत कम होगी, सेटलमेंट समय तेजी से होगा और पारदर्शिता बढ़ेगी।