नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स व्यापार मंच में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बढ़ते व्यापार प्रतिबंधों और समुद्री मार्गों की असुरक्षा को उजागर किया। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने भी वैश्विक आर्थिक शक्ति के बदलाव और मुद्रा विविधीकरण की आवश्यकता पर बात की।
- भारत ब्रिक्स अध्यक्षता में नई आर्थिक कड़ी बनाता है
- वैश्विक व्यापार में समुद्री मार्गों की सुरक्षा प्रमुख चिंता बन गई
- ब्रिक्स देशों का जीडीपी वृद्धि वैश्विक औसत से दो गुना तेज़
नई दिल्ली में 11 सितंबर 2026 को आयोजित ब्रिक्स व्यापार मंच में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने व्यापार बाधाओं और समुद्री मार्गों की असुरक्षा को प्रमुख मुद्दा बनाया। उन्होंने कहा कि भारत अपने ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत इन बाधाओं को पाटने के लिए नए सहयोग नेटवर्क स्थापित कर रहा है।
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने मंच पर बताया कि 20वीं सदी के अंत में प्रमुख आर्थिक शक्ति के रूप में स्थापित देशों को अब नई उभरती अर्थव्यवस्थाएँ प्रतिस्थापित कर रही हैं, और यह प्रतिस्पर्धा "भयानक रूप" ले रही है, जैसे सैन्य हमले और द्वितीयक प्रतिबंध।
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने वैश्विक वित्तीय प्रणाली में कुछ ही देशों के मुद्रा प्रभुत्व की खतरों को उजागर किया और ब्रिक्स के भीतर स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा देने की बात की। उन्होंने कहा कि यू.एस. और इज़राइल के इरान पर हुए हमले आर्थिक सुरक्षा को राष्ट्रीय सुरक्षा से अलग नहीं कर सकते।
Historical Background
ब्रिक्स समूह, जिसका गठन 2009 में ब्राज़ील, रूस, भारत और चीन के बीच हुआ था, ने 2020 के दशक में आर्थिक सहयोग का विस्तार किया है। 2026 में भारत की अध्यक्षता में समूह ने नई पहलें जैसे ब्रिक्स इन्क्यूबेटर नेटवर्क, MSME पोर्टल और स्टार्ट‑अप इनोवेशन फंड लॉन्च किए हैं, जिसका उद्देश्य छोटे और मध्यम उद्यमों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ना है।
भारत ने 2014 से लगभग 40 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते किए हैं, जिससे व्यापार बाधाओं को कम करने और व्यवसायों के लिए अवसर बढ़ाने की दिशा में उसकी नीति स्पष्ट हो गई है। इस पहल का उद्देश्य ब्रिक्स के 50% जनसंख्या, 40% वैश्विक जीडीपी और 25% वैश्विक व्यापार को और सुदृढ़ बनाना है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि ब्रिक्स के आर्थिक गति में तेज़ी न केवल सदस्य देशों के लिए बल्कि वैश्विक व्यापार संरचना के लिए भी परिवर्तनकारी प्रभाव रखती है। समुद्री मार्गों की सुरक्षा और बहु‑मुद्रा व्यापार मॉडल भविष्य में आर्थिक अस्थिरता को कम कर सकते हैं।
"ब्रिक्स का सामूहिक आर्थिक बल अब वैश्विक शक्ति संतुलन को पुनः परिभाषित कर रहा है," अंतरराष्ट्रीय अर्थशास्त्री डॉ. अनीता सिंह ने कहा।
मोदी ने कहा, "ग्लोबल ट्रेड तभी आगे बढ़ सकता है जब समुद्री मार्ग सुरक्षित हों, आपूर्ति श्रृंखलाएं खुली रहें और समुद्री कर्मी सुरक्षित हों।" उन्होंने भारत की नौवहन स्वतंत्रता के समर्थन को दोहराया।
पुतिन ने बताया कि पुराने आर्थिक दिग्गजों का स्थान नई उभरती अर्थव्यवस्थाओं को ले रही है, और इस परिवर्तन में "दुर्भावनापूर्ण" रूप जैसे पाइपलाइन ध्वस्त करना और अंतरराष्ट्रीय परिवहन मार्गों को ब्लॉक करना शामिल है।
पेज़ेश्कियन ने आर्थिक उपकरणों के उपयोग से राजनीतिक दबाव बढ़ने की ओर इशारा किया और ब्रिक्स को एक सामूहिक जवाब देने का आग्रह किया, जिससे सदस्य देशों के बीच निवेश, व्यापार और संयुक्त वित्तीय नेटवर्क को सुदृढ़ किया जा सके।
Frequently Asked Questions
Q: ब्रिक्स व्यापार मंच में भारत की नई पहलें कौन‑सी हैं?
A: प्रमुख पहलें हैं ब्रिक्स इन्क्यूबेटर नेटवर्क, MSME पोर्टल, और स्टार्ट‑अप इनोवेशन फंड, जो स्टार्ट‑अप और छोटे उद्यमों को वित्तीय और बाजार समर्थन प्रदान करती हैं।
Q: समुद्री मार्गों की सुरक्षा क्यों महत्वपूर्ण है?
A: सुरक्षित समुद्री मार्ग वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, ऊर्जा ट्रांसपोर्ट और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए आवश्यक हैं; असुरक्षा से कीमतों में अस्थिरता और आर्थिक नुकसान हो सकता है।