ब्रिक्स देशों ने वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं को मजबूत करने और सदस्य देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देने के लिए नई नीतिगत नीतियों को अपनाने का निर्णय लिया है। नई दिल्ली घोषणापत्र में स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और MSMEs के लिए वित्तीय सहायता पर विशेष ध्यान दिया गया है।

  • ब्रिक्स के बीच व्यापार वर्तमान में वैश्विक निर्यात का केवल 4.1% है।
  • नई दिल्ली घोषणापत्र में स्थानीय मुद्राओं में व्यापार निपटान और डिजिटल बुनियादी ढांचे पर जोर दिया गया है।
  • MSMEs को बढ़ावा देने के लिए 'इनवॉइस डिस्काउंटिंग मैकेनिज्म' पर विचार किया जा रहा है।

नई दिल्ली: ब्रिक्स (BRICS) देशों ने वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं (Global Value Chains) को अधिक लचीला बनाने के उद्देश्य से सदस्य देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देने के लिए "परस्पर सुदृढ़ नीतिगत लीवरों" का उपयोग करने का संकल्प लिया है। शनिवार को जारी नई दिल्ली घोषणापत्र के अनुसार, यह कदम व्यापारिक संबंधों को गहरा करने और आर्थिक एकीकरण को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है।

अगस्त में जयपुर में आयोजित ब्रिक्स व्यापार मंत्रियों की बैठक के बाद, यह घोषणापत्र उन प्रमुख क्षेत्रों को रेखांकित करता है जहाँ सुधार की आवश्यकता है। इनमें क्षेत्रीय एकीकरण, आर्थिक विविधीकरण, भौतिक और डिजिटल बुनियादी ढांचे में निवेश, और कार्यबल कौशल को उन्नत करना शामिल है। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, 2025 में ब्रिक्स देशों का वैश्विक निर्यात में 21.6% हिस्सा था, लेकिन उनके बीच आपसी व्यापार मात्र 4.1% ही रह गया है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि ब्रिक्स के भीतर व्यापार का वर्तमान ढांचा अत्यधिक असंतुलित है। वर्तमान में, ब्रिक्स के भीतर व्यापार एक "चीन-केंद्रित हब-एंड-स्पोक" पैटर्न का अनुसरण करता है। जहाँ चीन का निर्यात और आयात अन्य सदस्यों के साथ क्रमशः $551 बिलियन और $465 बिलियन है, वहीं भारत $226 बिलियन के बड़े व्यापार घाटे का सामना कर रहा है। इस असंतुलन को दूर करने के लिए बेहतर बाजार पहुंच और कम व्यापार बाधाओं की तत्काल आवश्यकता है।

ब्रिक्स के भीतर व्यापारिक संबंधों को संतुलित करने के लिए स्थानीय मुद्रा निपटान और विविध आपूर्ति श्रृंखलाओं का निर्माण अनिवार्य है।

भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भी ब्रिक्स भागीदार देशों से आह्वान किया है कि वे अपनी भुगतान प्रणालियों को जोड़ें और एक-दूसरे की मुद्राओं में व्यापार करें। यह कदम न केवल डॉलर पर निर्भरता कम करेगा, बल्कि सदस्य देशों के बीच आर्थिक संप्रभुता को भी बढ़ाएगा।

MSMEs के लिए नई राह

घोषणापत्र में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) की भागीदारी बढ़ाने के लिए एक 'इनवॉइस डिस्काउंटिंग मैकेनिज्म' स्थापित करने का प्रस्ताव दिया गया है। यह तंत्र उन छोटे व्यवसायों के लिए जीवनरक्षक साबित हो सकता है जिन्हें भुगतान के लिए हफ्तों तक इंतजार करना पड़ता है और जिनके पास कार्यशील पूंजी (Working Capital) की कमी होती है।

Did You Know?: ब्रिक्स के 11 सदस्य देशों में कुल 26.6 करोड़ MSMEs हैं, जिनमें से अकेले भारत में लगभग 9.49 करोड़ MSMEs मौजूद हैं।
विशेषतावर्तमान स्थितिभविष्य का लक्ष्य
व्यापार पैटर्नचीन-केंद्रित (Hub-and-Spoke)संतुलित व्यापार नेटवर्क
मुद्रा उपयोगमुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय मुद्राएंस्थानीय मुद्रा निपटान
MSME समर्थनवित्तीय बाधाएं मौजूदइनवॉइस डिस्काउंटिंग मैकेनिज्म

Frequently Asked Questions

1. ब्रिक्स के बीच आपसी व्यापार कम क्यों है?
मुख्य कारणों में व्यापार बाधाएं, असंतुलित आपूर्ति श्रृंखलाएं और एक व्यापक व्यापार समझौते का अभाव शामिल है।

2. इनवॉइस डिस्काउंटिंग मैकेनिज्म क्या है?
यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिससे MSMEs अपने बकाया इनवॉइस के आधार पर तुरंत धन प्राप्त कर सकते हैं, जिससे उनकी कार्यशील पूंजी बनी रहती है।