नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान सदस्य देशों ने एकतरफा टैरिफ और व्यापारिक बाधाओं के खिलाफ एकजुट होकर 'दिल्ली डिक्लेरेशन' जारी किया है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में ब्रिक्स देशों ने ग्लोबल साउथ के अधिकारों और निष्पक्ष वैश्विक व्यापार की वकालत की है।

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  • ब्रिक्स देशों ने एकतरफा टैरिफ और नॉन-टैरिफ बाधाओं को वैश्विक व्यापार के लिए खतरा बताया।
  • प्रधानमंत्री मोदी ने 'ग्लोबल साउथ' को निर्णय लेने की प्रक्रिया में समान भागीदारी देने की मांग की।
  • सदस्य देशों ने आर्थिक प्रतिबंधों की निंदा की और WTO के विवाद-निपटान तंत्र को बहाल करने पर जोर दिया।
  • अमेरिका द्वारा चीन और भारत पर लगाए गए टैरिफ के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया गया।

नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन ने वैश्विक भू-राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है। शिखर सम्मेलन के दौरान जारी 'दिल्ली डिक्लेरेशन' में सदस्य देशों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि मनमाने ढंग से लगाए जाने वाले टैरिफ और एकतरफा व्यापारिक प्रतिबंध अब स्वीकार्य नहीं होंगे। यह कदम विशेष रूप से उन देशों के लिए एक चेतावनी माना जा रहा है जो वैश्विक व्यापार नियमों का उल्लंघन कर अपनी आर्थिक शक्ति का दुरुपयोग कर रहे हैं।

ग्लोबल साउथ की आवाज और पीएम मोदी का रोडमैप

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिखर सम्मेलन में ब्रिक्स के भविष्य के लिए एक व्यापक रोडमैप प्रस्तुत किया। उन्होंने वैश्विक शक्ति संरचना की आलोचना करते हुए कहा कि वर्तमान में वैश्विक निर्णय लेने की प्रक्रिया एक 'पिरामिड' की तरह है, जहां शीर्ष के कुछ शक्तिशाली देश ही दुनिया का भाग्य तय करते हैं, जबकि शेष दुनिया केवल उनके निर्णयों का परिणाम भुगतती है। मोदी ने जोर देकर कहा कि ग्लोबल साउथ के देशों को भी वैश्विक शासन (Global Governance) में समान अधिकार और निर्णय लेने की भूमिका मिलनी चाहिए।

ग्लोबल पावर का पिरामिड अब बदलना चाहिए, ताकि विकासशील देशों के हितों की रक्षा हो सके।

व्यापारिक बाधाओं पर कड़ा रुख

ब्रिक्स देशों ने अमेरिका द्वारा चीन और भारत जैसे देशों पर लगाए गए टैरिफ के संदर्भ में गहरी चिंता व्यक्त की है। घोषणापत्र में कहा गया है कि एकतरफा आर्थिक और सेकेंडरी प्रतिबंध अंतरराष्ट्रीय कानून के विरुद्ध हैं और ये खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और मानवाधिकारों के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं। सदस्य देशों ने विश्व व्यापार संगठन (WTO) के विवाद-निपटान तंत्र को पूरी तरह से बहाल करने की मांग की है, ताकि व्यापारिक विवादों का समाधान निष्पक्ष रूप से हो सके।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, ब्रिक्स का यह एकजुट रुख वैश्विक व्यापार व्यवस्था में एक बड़े बदलाव का संकेत है। यदि ब्रिक्स देश एक साझा आर्थिक ब्लॉक के रूप में उभरते हैं, तो यह पश्चिमी देशों के प्रभुत्व वाली वित्तीय व्यवस्था (जैसे डॉलर का दबदबा) को सीधी चुनौती दे सकता है। यह कदम वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को अधिक संतुलित और समावेशी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) का गठन उभरती अर्थव्यवस्थाओं को एक मंच प्रदान करने के लिए किया गया था। हाल के वर्षों में इसमें नए देशों के शामिल होने से इसकी शक्ति और प्रभाव में अत्यधिक वृद्धि हुई है, जिससे यह अब वैश्विक आर्थिक नीतियों को प्रभावित करने वाला एक प्रमुख समूह बन गया है।

Did You Know?: ब्रिक्स समूह दुनिया की लगभग 40% आबादी और वैश्विक जीडीपी के एक बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है।

Frequently Asked Questions

1. ब्रिक्स देशों ने किन आर्थिक नीतियों का विरोध किया है?
ब्रिक्स देशों ने एकतरफा टैरिफ, नॉन-टैरिफ बाधाओं और आर्थिक प्रतिबंधों का विरोध किया है जो वैश्विक व्यापार में बाधा डालते हैं।

2. 'ग्लोबल साउथ' से क्या तात्पर्य है?
ग्लोबल साउथ शब्द का प्रयोग आमतौर पर विकासशील और कम विकसित देशों के लिए किया जाता है, जो वैश्विक निर्णयों में अधिक प्रतिनिधित्व चाहते हैं।