केरल कृषि विश्वविद्यालय (KAU) ने इडुक्की के पम्पाडुम्पारा में एक पॉलीक्लोनल कोको गार्डन स्थापित किया है। इसका उद्देश्य किसानों को उच्च उपज देने वाले और रोग-प्रतिरोधी कोको के पौधे उपलब्ध कराना है।
- इडुक्की के पम्पाडुम्पारा में कार्डमम रिसर्च स्टेशन पर कोको गार्डन की स्थापना।
- मोन्डेलेज़ कोको कोलैबोरेटिव रिसर्च प्रोजेक्ट के तहत किया गया निवेश।
- 21 विशिष्ट कोको क्लोन (CCRP 1 से CCRP 21) का विकास।
- कोको की कीमतों में उछाल के कारण उच्च गुणवत्ता वाले पौधों की बढ़ती मांग।
केरल के इडुक्की जिले में कोको की खेती को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से, केरल कृषि विश्वविद्यालय (KAU) ने पम्पाडुम्पारा स्थित कार्डमम रिसर्च स्टेशन (CRS) में एक अत्याधुनिक पॉलीक्लोनल कोको गार्डन स्थापित किया है। यह पहल राज्य के किसानों को उच्च उपज देने वाले, स्वस्थ और रोग-प्रतिरोधी कोको के पौधे प्रदान करने के लिए की गई है।
यह महत्वपूर्ण परियोजना मोन्डेलेज़ कोको कोलैबोरेटिव रिसर्च प्रोजेक्ट का हिस्सा है। इसे मोन्डेलेज़ फूड्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (पूर्व में कैडबरी इंडिया) द्वारा वित्त पोषित किया गया है और इसका क्रियान्वयन वेल्लैनिक्करा स्थित केकेयू के कोको रिसर्च सेंटर के नेतृत्व में किया जा रहा है। परियोजना ने अनुसंधान स्टेशन की पांच एकड़ उपेक्षित भूमि को एक उत्पादक अनुसंधान और विकास केंद्र में बदल दिया है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत में कोको की खेती वर्तमान में एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है। अप्रैल 2024 में, सूखे कोको बीन्स की कीमतें ₹1,000 प्रति किलोग्राम के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गई थीं। इस मूल्य वृद्धि ने किसानों के बीच भारी उत्साह पैदा किया है, लेकिन गुणवत्तापूर्ण पौधों की कमी एक बड़ी बाधा बनी हुई है। KAU का यह कदम आपूर्ति श्रृंखला की इस कमी को दूर करने में गेम-चेंजर साबित होगा।
कोको की खेती में सुधार के लिए उच्च गुणवत्ता वाले क्लोन का उपलब्ध होना किसानों की आय को स्थिर करने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।
कार्डमम रिसर्च स्टेशन की सहायक प्रोफेसर और प्रमुख, निमिषा मैथ्यूज ने बताया कि इडुक्की और आसपास के जिले कभी कोको खेती के प्रमुख केंद्र थे, लेकिन समय के साथ इसमें गिरावट आई। हाल ही में कीमतों में हुई वृद्धि के कारण, किसान अब कोको के पौधों की मांग कर रहे हैं, जिससे विश्वविद्यालय के केंद्रों में कमी देखी गई।
परियोजना की मुख्य अन्वेषक और KAU में कोको अनुसंधान केंद्र की प्रमुख, डॉ. मिनिमोल जे. एस. के अनुसार, वर्तमान में देश के किसानों को आवश्यक कोको रोपण सामग्री का केवल 20% हिस्सा ही उत्कृष्ट किस्मों का है। इस नए गार्डन में 21 विशेष कोको क्लोन विकसित किए गए हैं, जिन्हें CCRP 1 से CCRP 21 के रूप में नामित किया गया है। ये क्लोन अपने विशिष्ट आनुवंशिक गुणों के लिए जाने जाते हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:
केरल का इडुक्की जिला अपनी जलवायु और छायादार वातावरण के कारण कोको की खेती के लिए आदर्श माना जाता है। कोको के पौधों को बढ़ने के लिए ठंडे और छायादार वातावरण की आवश्यकता होती है, जो यहाँ प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है। पिछले कुछ दशकों में, अन्य फसलों की ओर झुकाव के कारण कोको की खेती में कमी आई थी, जिसे अब आर्थिक लाभ को देखते हुए फिर से प्रोत्साहित किया जा रहा है।
यह नया गार्डन डेढ़ साल में रोपण सामग्री का उत्पादन शुरू कर देगा और पांच वर्षों के भीतर अपनी पूर्ण उत्पादन क्षमता तक पहुंच जाएगा। मोन्डेलेज़ फूड्स इंडिया के माध्यम से इन उन्नत हाइब्रिड पौधों को देश भर के किसानों में वितरित किया जाएगा।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: कोको गार्डन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका मुख्य उद्देश्य किसानों को उच्च उपज देने वाले और रोग-प्रतिरोधी कोको के पौधे उपलब्ध कराना है।
प्रश्न 2: यह परियोजना किसके सहयोग से चलाई जा रही है?
उत्तर: यह परियोजना केरल कृषि विश्वविद्यालय और मोन्डेलेज़ फूड्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के सहयोग से चलाई जा रही है।