भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) के कार्यान्वयन के बाद उद्योग से मिले फीडबैक के आधार पर महत्वपूर्ण बदलावों का प्रस्ताव दिया है। इन बदलावों का उद्देश्य एक्सपायरी-डे ट्रेडिंग और सेटलमेंट प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाना है।

  • SEBI एक्सपायरी-डे सेटलमेंट प्राइस और मार्केट टाइमिंग की समीक्षा कर रहा है।
  • इंडिकेटिव इक्विलिब्रियम प्राइस (IEP) के कारण होने वाली अत्यधिक गतिविधि को नियंत्रित करने का लक्ष्य।
  • सेटलमेंट के लिए ब्लेंडेड VWAP या पुराने तंत्र के उपयोग पर विचार।
  • भ्रम से बचने के लिए इंडिकेटिव इंडेक्स वैल्यू के प्रदर्शन को बंद करने का प्रस्ताव।

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने हाल ही में पेश किए गए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) के शुरुआती परिचालन संबंधी समस्याओं को देखते हुए महत्वपूर्ण संशोधनों का प्रस्ताव दिया है। मुंबई स्थित नियामक ने एक परामर्श पत्र जारी किया है जिसमें एक्सपायरी-डे सेटलमेंट कीमतों, बाजार के समय और ऑर्डर हैंडलिंग के तरीके को बदलने की बात कही गई है।

नियामक का मानना है कि एक्सपायरी वाले दिनों में इंडेक्स ऑप्शंस और डेरिवेटिव्स की ट्रेडिंग में अत्यधिक उछाल (hyperactivity) देखी जा रही है। यह गतिविधि मुख्य रूप से इंडिकेटिव इक्विलिब्रियम प्राइस (IEP) पर आधारित है, जिससे बाजार में अस्थिरता पैदा होने की संभावना बनी रहती है। SEBI का उद्देश्य इस प्रक्रिया को अधिक सुव्यवस्थित और पारदर्शी बनाना है ताकि निवेशकों के हितों की रक्षा की जा सके।

सेटलमेंट के लिए प्रस्तावित विकल्प

SEBI ने एक्सपायरी-डे सेटलमेंट प्राइस निर्धारित करने के लिए दो प्रमुख विकल्प पेश किए हैं। पहला विकल्प एक ब्लेंडेड वॉल्यूम-वेटेड एवरेज प्राइस (VWAP) का उपयोग करना है। दूसरा विकल्प यह है कि एक्सपायरी दिनों के लिए अस्थायी रूप से CAS से पहले के पुराने सेटलमेंट-प्राइस तंत्र पर वापस लौटा जाए, और बाद में इसे ब्लेंडेड VWAP पद्धति में बदल दिया जाए।

बाजार की अत्यधिक अस्थिरता को कम करने के लिए सेटलमेंट तंत्र में सुधार करना निवेशकों के भरोसे को बनाए रखने के लिए अनिवार्य है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, CAS में ये बदलाव सीधे तौर पर डेरिवेटिव्स बाजार की स्थिरता को प्रभावित करेंगे। यदि एक्सपायरी के दिन कीमतों का निर्धारण सही ढंग से नहीं होता है, तो यह बड़े संस्थागत और खुदरा निवेशकों के लिए भारी जोखिम पैदा कर सकता है। इंडिकेटिव इंडेक्स वैल्यू को हटाने का प्रस्ताव विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह बाजार में गलत व्याख्या (misinterpretation) के जोखिम को कम करेगा।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) को बाजार के अंत में अधिक कुशल मूल्य खोज (price discovery) सुनिश्चित करने के लिए पेश किया गया था। हालांकि, इसके कार्यान्वयन के तुरंत बाद, बाजार के प्रतिभागियों ने बताया कि मौजूदा तंत्र एक्सपायरी के दिन अत्यधिक उतार-चढ़ाव और ट्रेडिंग वॉल्यूम को जन्म दे रहा है, जिससे नियामक को पुनः विचार करने पर मजबूर होना पड़ा है।

Did You Know?: एक्सपायरी डे पर डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग वॉल्यूम अक्सर सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक हो जाता है, जिससे बाजार में अत्यधिक उतार-चढ़ाव आता है।

Frequently Asked Questions

1. SEBI के इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य क्या है?
मुख्य उद्देश्य एक्सपायरी-डे ट्रेडिंग को अधिक व्यवस्थित बनाना और इंडिकेटिव प्राइस के कारण होने वाली अत्यधिक ट्रेडिंग गतिविधि को नियंत्रित करना है।

2. क्या CAS पूरी तरह से समाप्त हो जाएगा?
नहीं, SEBI ने स्पष्ट किया है कि CAS बना रहेगा, लेकिन इसकी कार्यप्रणाली में सुधार के लिए समीक्षा की जा रही है।