दिल्ली पुलिस की विशेष इकाई (SPUWAC) ने हिरासत में नाबालिगों के साथ किसी भी प्रकार की शारीरिक या मानसिक प्रताड़ना के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति लागू करने का निर्देश दिया है। यह कदम किशोर न्याय बोर्ड (JJB) द्वारा उठाए गए गंभीर सुरक्षा संबंधी मुद्दों के बाद उठाया गया है।
- नाबालिगों के साथ किसी भी प्रकार की शारीरिक या मानसिक प्रताड़ना पर पूर्ण प्रतिबंध।
- सीसीटीवी कवरेज से बचने के लिए अनधिकृत स्थानों पर पूछताछ करना वर्जित।
- हिरासत में हिंसा के आरोपों की जांच आरोपी अधिकारी के बजाय किसी स्वतंत्र वरिष्ठ अधिकारी द्वारा की जाएगी।
- जांच अधिकारियों के लिए नियमित संवेदीकरण और प्रशिक्षण कार्यक्रम अनिवार्य।
नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की विशेष पुलिस इकाई फॉर विमेन एंड चिल्ड्रन (SPUWAC) ने एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी करते हुए सभी जिला इकाइयों, रेलवे और मेट्रो पुलिस को नाबालिगों (juveniles) के साथ किसी भी प्रकार की प्रताड़ना के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाने का आदेश दिया है। यह निर्देश संयुक्त पुलिस आयुक्त नबम गुंगते द्वारा जारी किया गया है, जिसका उद्देश्य हिरासत में बच्चों के अधिकारों की रक्षा करना है।
किशोर न्याय बोर्ड की गंभीर चेतावनी
यह सख्त निर्देश किशोर न्याय बोर्ड-VII (Juvenile Justice Board-VII) की हालिया कार्यवाही के बाद आया है। बोर्ड ने चिंता जताई थी कि कुछ मामलों में नाबालिगों को पुलिस स्टेशनों से बाहर ले जाया जा रहा था ताकि उन्हें सीसीटीवी (CCTV) की निगरानी से दूर रखा जा सके। बोर्ड ने यह भी पाया कि कुछ मामलों में, हिरासत में हिंसा के आरोपों की जांच उसी पुलिस अधिकारी द्वारा की जा रही थी, जिस पर आरोप लगे थे, जिसे आदेश में 'अस्वीकार्य' करार दिया गया है।
क्यों यह मामला महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह आदेश दिल्ली की पुलिसिंग व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यदि पुलिस अधिकारी स्वयं ही अपनी जांच करते हैं, तो न्याय की प्रक्रिया बाधित होती है। यह निर्देश सुनिश्चित करता है कि जांच निष्पक्ष और स्वतंत्र हो।
नाबालिगों के साथ हिरासत में दुर्व्यवहार न केवल मानवाधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि यह कानूनी सुरक्षा उपायों और संस्थागत विश्वास को भी गंभीर रूप से कमजोर करता है।
ऐतिहासिक संदर्भ और पिछली घटनाएं
दिल्ली में नाबालिगों के साथ दुर्व्यवहार के मामले पहले भी सामने आए हैं। मई में, एक किशोर को सरई रोहिला पुलिस स्टेशन में प्रताड़ित करने का वीडियो वायरल हुआ था। इसके अलावा, 2025 में मजनु का टीला क्षेत्र में एक सरकारी किशोर गृह में साथी किशोरों द्वारा कथित हमले के बाद एक 17 वर्षीय लड़के की मृत्यु ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) को भी हस्तक्षेप करने के लिए मजबूर कर दिया था।
नियम और सुरक्षा उपाय
दिल्ली किशोर न्याय नियम (Delhi Juvenile Justice Rules) स्पष्ट रूप से कहते हैं कि किसी भी बच्चे को शारीरिक या मानसिक रूप से प्रताड़ित करने वाले पुलिस अधिकारी को सेवा से हटाया जा सकता है और उस पर मुकदमा भी चलाया जा सकता है। नए आदेश के अनुसार, पूछताछ केवल निर्धारित परिसरों के भीतर ही होनी चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. यदि किसी नाबालिग के साथ हिरासत में हिंसा होती है, तो जांच कौन करेगा?
आदेश के अनुसार, इसकी जांच एक स्वतंत्र वरिष्ठ अधिकारी द्वारा की जाएगी, न कि उस अधिकारी द्वारा जिस पर आरोप लगा है।
2. क्या पुलिस नाबालिगों से थाने के बाहर पूछताछ कर सकती है?
नहीं, आदेश स्पष्ट रूप से कहता है कि नाबालिगों को सीसीटीवी कवरेज से बचने के लिए किसी भी अनधिकृत स्थान पर नहीं ले जाया जा सकता।