चेन्नई की अवडी सेंट्रल क्राइम ब्रांच ने एक जालसाज सूदखोर को गिरफ्तार किया है जिसने ब्याज के नाम पर एक व्यक्ति से ₹1.15 करोड़ से अधिक की अवैध वसूली की। आरोपी ने पीड़ित को डराने-धमकाने और मारपीट करने के लिए ब्लैंक चेक और प्रॉमिसरी नोट का सहारा लिया।

मुख्य बातें

  • आरोपी कालमुथु ने ₹16.10 लाख के कर्ज के बदले ₹1.15 करोड़ से अधिक वसूल लिए।
  • पीड़ित से ब्लैंक चेक, प्रॉमिसरी नोट और स्टाम्प पेपर जबरन लिए गए थे।
  • अवडी सेंट्रल क्राइम ब्रांच (CCB) ने आरोपी को गिरफ्तार कर जांच शुरू कर दी है।

चेन्नई के अवडी क्षेत्र में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां पुलिस ने एक ऐसे सूदखोर को गिरफ्तार किया है जिसने ब्याज की दरें इतनी बढ़ा दीं कि पीड़ित को अपनी पूरी जमा पूंजी गंवानी पड़ी। अवडी सेंट्रल क्राइम ब्रांच (CCB) ने कालमुथु नामक व्यक्ति को अत्यधिक ब्याज वसूलने, आपराधिक धमकी देने और मारपीट करने के आरोप में हिरासत में लिया है।

मामले का विवरण देते हुए पुलिस ने बताया कि अंबत्तूर के थिरुवेनकदम नगर निवासी नटराजन ने शिकायत दर्ज कराई थी। नटराजन और आरोपी कालमुथु एक-दूसरे को लगभग दो दशकों से जानते थे। साल 2018 में, नटराजन ने अपने व्यावसायिक खर्चों के लिए कालमुथु से ₹16.10 लाख उधार लिए थे। हालांकि, कर्ज की प्रक्रिया के दौरान ही आरोपी ने जालसाजी का खेल शुरू कर दिया था।

जालसाजी का तरीका

शिकायत के अनुसार, कर्ज देने के नाम पर कालमुथु ने नटराजन से एक हस्ताक्षरित ब्लैंक प्रॉमिसरी नोट, बैंक ऑफ बड़ौदा के छह हस्ताक्षरित ब्लैंक चेक और तीन हस्ताक्षरित ब्लैंक स्टाम्प पेपर जबरन ले लिए थे। इन दस्तावेजों का उपयोग करके आरोपी ने पीड़ित को बंधक बना लिया और लगातार प्रताड़ित किया।

नटराजन का आरोप है कि 19 जनवरी, 2019 से 13 अगस्त, 2025 के बीच, कालमुथु ने उसे बार-बार शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया और जान से मारने की धमकी दी। इस आतंक के चलते नटराजन को कुल ₹1,15,02,800 का भुगतान करना पड़ा। इतना सब करने के बाद भी, आरोपी ने चक्रवृद्धि ब्याज का हवाला देते हुए ₹90 लाख की अतिरिक्त मांग की।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि अनधिकृत ऋणदाता (Unregulated Moneylenders) अक्सर ब्लैंक दस्तावेजों का उपयोग करके लोगों को जीवन भर के कर्ज के जाल में फंसा लेते हैं। यह मामला दर्शाता है कि कैसे वित्तीय साक्षरता और कानूनी सुरक्षा के अभाव में लोग संगठित अपराध का शिकार हो जाते हैं।

'ब्लैंक चेक और प्रॉमिसरी नोट का दुरुपयोग वित्तीय अपराधों का एक खतरनाक हथियार बन गया है, जिससे बचना हर नागरिक के लिए अनिवार्य है।'
क्या आप जानते हैं?: भारत में बिना लाइसेंस के ब्याज वसूलना 'मनीलेंडर्स एक्ट' के तहत एक गंभीर अपराध है, जिसके लिए जेल और भारी जुर्माना दोनों हो सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. आरोपी ने पीड़ित से कुल कितनी राशि वसूली?
आरोपी ने पीड़ित से कुल ₹1,15,02,800 की अवैध वसूली की।

2. पुलिस ने आरोपी के खिलाफ क्या कार्रवाई की है?
अवडी सेंट्रल क्राइम ब्रांच ने मामला दर्ज कर आरोपी कालमुथु को गिरफ्तार कर लिया है और आगे की जांच जारी है।