पुणे के एक व्यवसायी को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) द्वारा निर्मित वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के डीपफेक वीडियो के जरिए ₹1.07 करोड़ का चूना लगाया गया। ठगों ने SpaceX के शेयरों में निवेश का झांसा देकर यह बड़ी धोखाधड़ी को अंजाम दिया।

मुख्य बातें

  • ठगों ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का AI-जनरेटेड डीपफेक वीडियो इस्तेमाल किया।
  • SpaceX के प्री-लिस्टिंग शेयरों में निवेश का झांसा देकर ₹1.07 करोड़ की ठगी हुई।
  • शुरुआत में भरोसा जीतने के लिए पीड़ित को छोटा मुनाफा भी दिया गया।
  • पुणे साइबर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पुणे: साइबर अपराधियों ने तकनीक का एक खतरनाक इस्तेमाल करते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए एक बड़ी धोखाधड़ी को अंजाम दिया है। पुणे के एक प्रतिष्ठित कारोबारी को इंस्टाग्राम पर एक ऐसा वीडियो दिखाया गया, जिसमें भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण निवेश की सलाह देती नजर आ रही थीं। यह वीडियो पूरी तरह से डीपफेक (Deepfake) था, जिसे इतना वास्तविक बनाया गया था कि कारोबारी को इसकी सच्चाई का पता ही नहीं चला।

यह धोखाधड़ी जून की शुरुआत में शुरू हुई। वीडियो देखने के बाद, पीड़ित ने दिए गए लिंक पर क्लिक किया, जिसके बाद ठगों ने खुद को निवेश कंपनी का प्रतिनिधि बताया। अपराधियों ने पीड़ित का भरोसा जीतने के लिए पहले एक छोटा निवेश कराया और तुरंत मुनाफा भी वापस किया। इसके बाद, उन्हें SpaceX के प्री-लिस्टिंग शेयरों में निवेश करने का लालच दिया गया, जिससे भारी मुनाफे का दावा किया गया।

यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि डीपफेक तकनीक अब केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वित्तीय अपराधों का एक घातक हथियार बन चुकी है। अपराधी अब मशहूर हस्तियों और सरकारी अधिकारियों की आवाज और चेहरे का क्लोन बनाकर लोगों का विश्वास जीत रहे हैं। यह घटना दर्शाती है कि डिजिटल युग में 'देखना ही विश्वास करना नहीं है' (Seeing is no longer believing)।

डीपफेक तकनीक ने साइबर अपराध के जोखिम को कई गुना बढ़ा दिया है; अब केवल आंखों देखी चीजों पर भरोसा करना वित्तीय आत्महत्या के समान हो सकता है।

ठगों ने पीड़ित को एक फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर सक्रिय रखा, जहां स्क्रीन पर उसका मुनाफा ₹3.98 करोड़ तक बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा था। जब पीड़ित ने अपनी पूरी राशि निकालने की कोशिश की, तो ठगों ने और अधिक पैसे जमा करने की मांग की और अंततः संपर्क तोड़ दिया। पीड़ित ने अब पुणे साइबर पुलिस में मामला दर्ज कराया है।

क्या आप जानते हैं?: डीपफेक तकनीक 'जेनरेटिव एडवरसेरियल नेटवर्क' (GANs) का उपयोग करती है, जहां दो AI मॉडल एक-दूसरे के खिलाफ काम करके अत्यधिक वास्तविक दिखने वाली सामग्री बनाते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. डीपफेक वीडियो की पहचान कैसे करें?
वीडियो में चेहरे की बनावट, आंखों के झपकने के तरीके और होंठों की आवाज के साथ तालमेल की बारीकी से जांच करें।

2. यदि मेरे साथ साइबर ठगी हो जाए तो क्या करें?
तुरंत 1930 पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं।

ठगी का तरीका बनाम सुरक्षा उपाय
ठगी का तरीकासुरक्षा उपाय
सोशल मीडिया पर मशहूर हस्तियों के निवेश वाले वीडियोकिसी भी विज्ञापन या वीडियो पर तुरंत भरोसा न करें
नकली ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म और फर्जी मुनाफाकेवल SEBI पंजीकृत ब्रोकर का ही उपयोग करें
अनजान लिंक पर क्लिक करनासंदिग्ध लिंक और अज्ञात कॉल से बचें