सीमा पार वित्तीय अपराध के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई में, गुजरात CID ने 1,000 से अधिक साइबर अपराधों से जुड़े असम के एक मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया है। इस नेटवर्क ने क्रिप्टो वॉलेट और हजारों बैंक खातों के माध्यम से ₹1,071.5 करोड़ की राशि चीन भेजी थी।

  • असम के रफीकुल आलम को ₹1,071.5 करोड़ के 1,090 साइबर अपराधों के आरोप में गिरफ्तार किया गया।
  • पैसे को पकड़ से बचाने के लिए 1,758 बैंक खातों और क्रिप्टोकरेंसी का उपयोग किया गया।
  • यह गिरोह व्हाट्सएप और टेलीग्राम के जरिए चीन स्थित अपराधियों के संपर्क में था।
  • गुजरात CID के CCE ने 10 अन्य लोगों को 'डिजिटल अरेस्ट' घोटाले का शिकार होने से बचाया।

गुजरात CID ने अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध सिंडिकेट को एक बड़ा झटका देते हुए असम के बरपेटा से 25 वर्षीय रफीकुल आलम को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि आलम एक परिष्कृत मनी लॉन्ड्रिंग ऑपरेशन का मुख्य सूत्रधार था, जिसने भारतीय पीड़ितों से लगभग ₹1,071.5 करोड़ की राशि चीन स्थित आपराधिक संस्थाओं तक पहुँचाई।

जांच से पता चला है कि आलम ने 'लेयरिंग' तकनीक का उपयोग किया। वित्तीय निगरानी एजेंसियों की नजर से बचने के लिए, चोरी की गई बड़ी रकम को छोटे हिस्सों में विभाजित किया गया और एक घंटे के भीतर देश भर के 1,758 अलग-अलग बैंक खातों में स्थानांतरित कर दिया गया। इसके बाद, इन निधियों को क्रिप्टोकरेंसी में परिवर्तित कर चीन भेज दिया गया, जिससे डिजिटल निशान मिटाना आसान हो गया।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला 'डिजिटल अरेस्ट' घोटालों के खतरनाक विकास को उजागर करता है, जहाँ अपराधी पैसे ऐंठने के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों का रूप धारण करते हैं। क्रिप्टोकरेंसी का उपयोग यह दर्शाता है कि कैसे सीमा पार सिंडिकेट राष्ट्रीय सीमाओं और कानूनी क्षेत्राधिकारों को दरकिनार करने के लिए विकेंद्रीकृत वित्त का लाभ उठा रहे हैं।

इस ऑपरेशन के दौरान, साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CCE) ने बरपेटा में तीन दिनों तक गुप्त रेकी की और फिर आलम को गिरफ्तार किया। उसकी गिरफ्तारी के समय, अधिकारियों ने कई तकनीकी उपकरण जब्त किए और उसके फोन में 23 क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट पाए, जिनमें ₹16 करोड़ के लेनदेन थे। जांच में 'चिप सेलर' ऐप और गेमिंग अकाउंट्स के माध्यम से अवैध ट्रेडिंग का भी पता चला है।

हजारों 'म्यूल अकाउंट्स' और तत्काल क्रिप्टो-कनवर्जन का उपयोग यह संकेत देता है कि इन साइबर-गैंग्स के भीतर एक संगठित कॉर्पोरेट ढांचा काम कर रहा है।

इस गिरफ्तारी के साथ-साथ, CCE ने मनोवैज्ञानिक दबाव वाले कई मामलों में हस्तक्षेप किया। अहमदाबाद में, एक वरिष्ठ नागरिक को धमकी दी गई कि यदि उसने ₹20 लाख नहीं दिए, तो उसे चाइल्ड पोर्नोग्राफी के मामले में फंसा दिया जाएगा। सूरत में, एक अन्य पीड़ित को ED अधिकारी बनकर डराया गया, जिसके कारण उसने अपनी दुकान ₹20 लाख में बेच दी। CCE ने गुजरात, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के 10 लोगों को अपनी जीवन भर की कमाई गंवाने से बचाया।

क्या आप जानते हैं?: 'डिजिटल अरेस्ट' एक मनोवैज्ञानिक घोटाला है जहाँ पीड़ितों को वीडियो कॉल पर घंटों या दिनों तक रखा जाता है और उन्हें विश्वास दिलाया जाता है कि वे 'आभासी गिरफ्तारी' के अधीन हैं।

घोटाले के तरीकों की तुलना

तरीकाडराने का माध्यमपैसे भेजने का रास्ता
डिजिटल अरेस्टपुलिस/ED/CBI का रूप धारण करनाबैंक ट्रांसफर $\rightarrow$ क्रिप्टो $\rightarrow$ चीन
मनी लॉन्ड्रिंगम्यूल खातों के जरिए लेयरिंग'चिप सेलर' ऐप्स / गेमिंग अकाउंट्स

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: 'डिजिटल अरेस्ट' घोटाला क्या है?
यह एक धोखाधड़ी है जहाँ अपराधी वीडियो कॉल पर कानून प्रवर्तन अधिकारियों का रूप धारण करते हैं और दावा करते हैं कि पीड़ित किसी अपराध में शामिल है, और मामला 'सुलझाने' के लिए पैसों की मांग करते हैं।

प्रश्न 2: आरोपी ने इतनी बड़ी राशि को बिना पकड़े कैसे स्थानांतरित किया?
आरोपी ने 'लेयरिंग' का उपयोग किया, जिसमें बड़ी राशि को छोटे हिस्सों में बांटकर लगभग 1,800 बैंक खातों में भेजा गया और फिर उन्हें क्रिप्टोकरेंसी में बदल दिया गया।