ओडिशा में एक महिला सब-इंस्पेक्टर और उसके साथियों ने मिलकर एक व्यापारी का अपहरण किया और ₹10 करोड़ की फिरौती मांगने के लिए फर्जी वीडियो बनाए। चौंकाने वाली बात यह है कि पीड़ित को खुद पुलिस स्टेशन में ही छिपाकर रखा गया था।

  • 62 वर्षीय व्यापारी नरेंद्र साहू का अपहरण कर ₹10 करोड़ की फिरौती मांगी गई।
  • एक महिला सब-इंस्पेक्टर (SI), उसका भाई और एक फर्जी पत्रकार साजिश में शामिल पाए गए।
  • अपराधियों ने पीड़ित को फर्जी 'आर्म्स एक्ट' केस में फंसाने के लिए स्टेज्ड वीडियो बनाए।
  • पीड़ित को भुवनेश्वर के एक पुलिस स्टेशन में ही छिपाकर रखा गया था।

ओडिशा के बलांगीर से शुरू हुआ एक अपहरण का मामला अब राज्य की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। 62 वर्षीय व्यवसायी नरेंद्र साहू के लापता होने के बाद शुरू हुई जांच ने एक ऐसे भयावह षड्यंत्र का पर्दाफाश किया है, जिसमें खाकी वर्दी पहनकर कानून की रक्षा करने वाले ही अपराधियों के साथ मिले हुए थे। पुलिस ने इस मामले में एक महिला सब-इंस्पेक्टर, उसके भाई, एक कथित पत्रकार और एक स्थानीय व्यक्ति को गिरफ्तार किया है।

जांच के अनुसार, साजिश की शुरुआत 14 अगस्त को हुई जब नरेंद्र साहू को बलांगीर के रंडा चौक के पास बहला-फुसलाकर अगवा कर लिया गया। आरोपियों का मकसद व्यापारी से ₹10 करोड़ की भारी-भरकम फिरौती वसूलना था। आरोपियों ने इस साजिश को अंजाम देने के लिए बेहद शातिराना तरीका अपनाया। उन्होंने पीड़ित को भुवनेश्वर ले जाकर एक लॉज में बंधक बनाया और वहां उसके साथ मारपीट की।

फर्जी सबूत और स्टेज्ड वीडियो का जाल

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल एक अपहरण का मामला नहीं था, बल्कि एक सुनियोजित 'फ्रेमिंग' की कोशिश थी। आरोपियों ने पीड़ित को एक खाली पिस्तौल थमाई और उसे इस तरह पोज देने के लिए मजबूर किया जैसे वह हमला करने वाला हो। इन वीडियो का उद्देश्य यह दिखाना था कि पीड़ित (साहू) वास्तव में आरोपी (क्षितिश) को धमका रहा है, ताकि यदि साहू फिरौती न दे, तो उसे आर्म्स एक्ट के तहत गिरफ्तार किया जा सके।

यह मामला दर्शाता है कि कैसे सत्ता और वर्दी का दुरुपयोग कर आम नागरिकों को ब्लैकमेल करने के लिए एक पूरी साजिश रची जा सकती है।

षड्यंत्र की गहराई तब और बढ़ गई जब आरोपियों ने 15 अगस्त को, यानी स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर, पीड़ित को खंडगिरी पुलिस स्टेशन ले गए। उन्होंने सोचा था कि छुट्टी के कारण वरिष्ठ अधिकारी मौजूद नहीं होंगे, जिससे वे आसानी से अपनी साजिश को अंजाम दे सकेंगे। वहां एक फर्जी पत्रकार ने खुद को सब-इंस्पेक्टर बताकर पीड़ित को डराया और ₹50 लाख के भुगतान का लिखित समझौता भी हासिल कर लिया।

कानून व्यवस्था पर गहरा प्रहार

सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि आरोपी भाई की बहन, शनेमंजरी साहू, उसी पुलिस स्टेशन में सब-इंस्पेक्टर के पद पर तैनात थी जहां पीड़ित को रखा गया था। पुलिस ने जब तकनीकी निगरानी के जरिए जांच की, तो वे सीधे भुवनेश्वर के उसी पुलिस स्टेशन पहुंच गए, जिससे यह पूरा मामला उजागर हो गया। पुलिस ने आरोपी महिला के मोबाइल से वे स्टेज्ड वीडियो भी बरामद किए हैं जो साजिश का मुख्य हिस्सा थे।

Did You Know?: अपराधी अक्सर त्योहारों या सार्वजनिक अवकाश का चुनाव इसलिए करते हैं क्योंकि उस दौरान पुलिस बल का ध्यान सुरक्षा व्यवस्थाओं और समारोहों की ओर अधिक होता है।

Frequently Asked Questions

1. मुख्य आरोपी कौन हैं?
मुख्य आरोपियों में सब-इंस्पेक्टर शनेमंजरी साहू, उसका भाई क्षितिश चंद्र साहू, कथित पत्रकार संजय जेना और संजीत बेहेरा शामिल हैं।

2. आरोपियों ने क्या योजना बनाई थी?
वे पीड़ित को फर्जी हथियार मामले में फंसाकर उसे ब्लैकमेल करना चाहते थे ताकि ₹10 करोड़ की फिरौती ली जा सके।