कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) भर्ती घोटाले के सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने IAS अधिकारी ज्ञानेन्द्र कुमार गंगवार के बेंगलुरु और उत्तर प्रदेश स्थित ठिकानों पर छापेमारी की है। यह कार्रवाई PMLA के तहत की गई है।

  • ED ने बेंगलुरु और बरेली में IAS अधिकारी गंगवार के ठिकानों की तलाशी ली।
  • मामला KPSC पशु चिकित्सा अधिकारी भर्ती में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है।
  • जांच में ₹70-80 लाख तक की रिश्वतखोरी के आरोप लगे हैं।
  • गंगवार KPSC में परीक्षा नियंत्रक के रूप में कार्यरत थे।

बेंगलुरु/बरेली: कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) में हुए कथित भर्ती घोटाले की जांच अब और तेज हो गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अधिकारियों ने रविवार, 23 अगस्त 2026 को IAS अधिकारी और MSME निदेशक ज्ञानेन्द्र कुमार गंगवार के बेंगलुरु स्थित निवास और उत्तर प्रदेश के बरेली स्थित ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत की गई है।

गौरतलब है कि ज्ञानेन्द्र कुमार गंगवार उस समय KPSC में परीक्षा नियंत्रक (Controller of Examinations) के पद पर तैनात थे, जब पशु चिकित्सा अधिकारी भर्ती परीक्षा आयोजित की गई थी। इस भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और उम्मीदवारों से भारी रकम वसूलने के आरोपों के बाद से ही ED इस मामले की गहराई से जांच कर रही है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं की शुचिता पर गंभीर सवाल उठाता है। यदि उच्च पदस्थ अधिकारी इस तरह के घोटालों में संलिप्त पाए जाते हैं, तो यह प्रशासनिक ढांचे के प्रति जनता के विश्वास को हिला सकता है। यह छापेमारी दर्शाती है कि जांच एजेंसियां अब सीधे उन अधिकारियों तक पहुंच रही हैं जिन्होंने परीक्षा संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की कमी और भ्रष्टाचार के आरोप प्रशासनिक तंत्र की विश्वसनीयता को गंभीर चुनौती देते हैं।

छापेमारी के दौरान स्थिति काफी तनावपूर्ण रही। ED की टीम तीन वाहनों और CRPF के जवानों के साथ गंगवार के बेंगलुरु स्थित अपार्टमेंट पहुंची। शुरुआत में सुरक्षाकर्मियों ने गेट बंद कर दिया था, लेकिन अधिकारियों के हस्तक्षेप और गंगवार से संपर्क करने के बाद ही उन्हें प्रवेश मिला। चूंकि अधिकारी घर पर मौजूद नहीं थे और उनका फोन बंद था, इसलिए ED को ताला तोड़ने के लिए 'की-मेकर' (ताला बनाने वाले) की मदद लेनी पड़ी।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

KPSC भर्ती घोटाले की जांच पिछले कुछ समय से चल रही है, जिसमें पूर्व KPSC अध्यक्ष शिवशंकरप्पा साहुकल के ठिकानों पर भी तलाशी ली जा चुकी है। जांच का मुख्य केंद्र वह कथित लेनदेन है, जिसमें उम्मीदवारों को नौकरी के बदले ₹70 लाख से ₹80 लाख तक देने की बात कही गई है।

गंगवार की हालिया अनुपस्थिति ने भी संदेह पैदा किया था, हालांकि कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने स्पष्ट किया था कि वे अपने बीमार पिता से मिलने उत्तर प्रदेश गए थे। हालांकि, ED की इस कार्रवाई से यह स्पष्ट है कि जांच का दायरा अब व्यापक हो चुका है।

Did You Know?: PMLA के तहत की जाने वाली छापेमारी में जांच एजेंसियां डिजिटल उपकरणों और वित्तीय दस्तावेजों की गहन जांच करती हैं ताकि मनी ट्रेल का पता लगाया जा सके।

Frequently Asked Questions

1. IAS अधिकारी गंगवार पर क्या आरोप हैं?
अभी तक आधिकारिक तौर पर उन्हें रिश्वत लेने का दोषी नहीं ठहराया गया है, लेकिन वे उस समय परीक्षा नियंत्रक थे जब कथित घोटाला हुआ था।

2. ED किस कानून के तहत कार्रवाई कर रही है?
ED इस मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत जांच कर रही है।