सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले ने कहा कि महाराष्ट्र में बड़े विकास प्रोजेक्ट्स के लिए आवंटित धन का केवल 0.1% भी अगर स्कूलों के लिए इस्तेमाल किया जाये तो कई मराठी‑माध्यम स्कूल बंद नहीं होते। उन्होंने गड़चिरोली स्कूल की त्रासदी को भी उजागर किया।
- Kumbh Mela के लिए आवंटित बजट का 0.1% स्कूलों को बचा सकता है
- गड़चिरोली स्कूल में स्नेकबाइट की त्रासदी ने ग्रामीण शिक्षा में सुविधाओं की कमी उजागर की
- शिक्षा बजट में गिरावट ने कई मराठी माध्यम स्कूलों को बंद कर दिया
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले ने रविवार को धुले जिले के शिरपुर में एक स्कूल द्वारा आयोजित कार्यक्रम में कहा कि महाराष्ट्र सरकार द्वारा विभिन्न विकास कार्यों के लिये जो करोड़ों रुपये आवंटित किए गये हैं, उसमें उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।
वे बताते हैं कि नाशिक‑त्रिम्बकेश्वर में अगले साल जुलाई‑सितंबर के बीच आयोजित होने वाले सिमहस्थ कुंभ मेले के लिये अनुमानित बजट लगभग ₹32,000 करोड़ से ₹34,000 करोड़ बताया गया है। साथ ही राज्य में एक राजमार्ग कॉरिडोर के लिये केंद्र द्वारा अनुमोदित ₹11,000 करोड़ खर्च होगा।
Historical Background
भारत में कुंभ मेले का आर्थिक महत्व सदियों से रहा है। पिछले कई दशकों में ऐसी बड़ी घटनाओं के लिये सरकारें विशेष विकास फंड बनाती रही हैं, पर शिक्षा क्षेत्र का बजट लगातार घटता गया है। 2010 के दशक में शिक्षा के लिये कुल बजट का 8‑12% हिस्सा होता था, जबकि आज यह 13% से भी नीचे गिर गया है।
जस्टिस वराले ने बताया कि यदि इन विशाल निधियों में से सिर्फ 0.1% यानी लगभग ₹32 करोड़ को शिक्षा के लिये पुनः आवंटित किया जाये तो महाराष्ट्र में बंद हो रहे 100‑125 मराठी‑माध्यम स्कूलों को बचाया जा सकता है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that diverting a minuscule portion of mega‑project funds to education could halt the alarming rise of school closures, preserving regional language instruction and curbing rural brain‑drain.
“शिक्षा में छोटे निवेश से बड़े सामाजिक परिवर्तन संभव हैं, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में,” कहा शिक्षा विशेषज्ञ डॉ. सुनीता पांडे।
जस्टिस वराले ने अपने स्वयं के शैक्षणिक अनुभव को भी साझा किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपना प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा पूरी तरह मराठी भाषा में प्राप्त की थी और यह उन्हें कभी सीमित नहीं करता।
गड़चिरोली में स्थित एक रेजिडेंशियल स्कूल की त्रासदी को भी वे नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते थे, जहाँ उचित सुविधाओं की कमी के कारण तीन छात्राएँ साँप के काटने से मार गئیں और एक अभी भी अस्पताल में उपचार ले रही है। यह घटना ग्रामीण स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की अभाव की सच्ची तस्वीर पेश करती है।
Frequently Asked Questions
Q1: क्या सरकार वास्तव में इस 0.1% को शिक्षा के लिये पुनः आवंटित करने की योजना बना रही है?
A: अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, पर जस्टिस वराले की टिप्पणी से इस दिशा में नीति चर्चा की संभावना बढ़ गई है।
Q2: इस पहल से किन स्कूलों को सबसे अधिक लाभ होगा?
A: मुख्यतः ग्रामीण मराठी‑माध्यम स्कूल जो वित्तीय संकट के कारण बंद हो रहे हैं, उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी।