हैदराबाद पुलिस ने एक फार्मेसी कर्मचारी और एक युवक को अवैध रूप से प्रिस्क्रिप्शन दवाएं और कफ सिरप बेचने के आरोप में गिरफ्तार किया है। पुलिस ने ₹4.8 लाख मूल्य की भारी मात्रा में प्रतिबंधित दवाएं ज़ब्त की हैं।
- हैदराबाद में एक फार्मेसी सहायक और एक ग्राहक को अवैध दवा तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया गया।
- पुलिस ने ₹4.8 लाख मूल्य के इंजेक्शन, टैबलेट और कफ सिरप ज़ब्त किए।
- आरोपी बिना वैध पर्चे के ऊंचे दामों पर दवाएं बेच रहा था।
हैदराबाद में कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने एक बड़े अवैध दवा नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। कमिश्नर टास्क फोर्स (गोल्कोंडा टीम) और एसआर नगर पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में एक 28 वर्षीय फार्मेसी कर्मचारी और एक 19 वर्षीय युवक को गिरफ्तार किया गया है। इन दोनों पर प्रिस्क्रिप्शन दवाओं और कफ सिरप की अवैध आपूर्ति और खरीद का गंभीर आरोप है।
पुलिस द्वारा की गई छापेमारी में भारी मात्रा में नशीले और नियंत्रित पदार्थ बरामद किए गए हैं। ज़ब्त किए गए सामान में 12 'टर्मिन' (Termin) इंजेक्शन, 10,000 'टैपेंटडोल' (Tapentadol/Tapazole) 100 मिलीग्राम की गोलियां, 450 बोतलें 'सेनकोफ' (Senkof) कफ सिरप और छह बोतलें 'अल्कोफ डीएक्स' (Alkof DX) कफ सिरप शामिल हैं। इसके अलावा, एक वनप्लस नॉर्ड 5 मोबाइल फोन भी बरामद किया गया है। बरामद दवाओं का कुल बाजार मूल्य लगभग ₹4.80 लाख आंका गया है।
अपराध का तरीका (Modus Operandi)
जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपी पठान सलीम (28), जो युसूफगुडा का निवासी है, सानातनगर स्थित 'स्मार्ट चॉइस हेल्थ फार्मेसी' में अपने बड़े भाई के सहायक के रूप में काम करता था। पुलिस के अनुसार, जब सलीम का भाई दुकान पर मौजूद नहीं होता था, तब वह अवैध लाभ कमाने के उद्देश्य से बिना किसी वैध डॉक्टर के पर्चे के, ऊंचे दामों पर ये दवाएं बेचता था।
सलीम ने इस अवैध कारोबार को अंजाम देने के लिए चालाकी से काम किया। उसने अपने भाई की फार्मेसी के रबर स्टैम्प का दुरुपयोग किया और उसी इमारत में एक अलग भंडारण स्थान किराए पर लिया ताकि दवाओं का स्टॉक रखा जा सके और उन्हें गुप्त रूप से बेचा जा सके। पकड़ा गया दूसरा आरोपी, प्रशांत रेड्डी (19), जो सानातनगर का बेरोजगार युवक है, कथित तौर पर व्यक्तिगत उपयोग के लिए सलीम से ये दवाएं खरीदता था।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि बिना डॉक्टरी सलाह के प्रिस्क्रिप्शन दवाओं की अवैध बिक्री न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरा भी है। नियंत्रित दवाओं का दुरुपयोग नशीली दवाओं की लत और सामाजिक अपराधों में वृद्धि का कारण बनता है।
बिना वैध प्रिस्क्रिप्शन के नियंत्रित दवाओं की बिक्री एक संगठित अपराध की ओर इशारा करती है जिसे रोकने के लिए सख्त निगरानी आवश्यक है।
पुलिस ने आरोपियों और ज़ब्त किए गए माल को आगे की कानूनी कार्यवाही के लिए खैरताबाद ज़ोन के ड्रग इंस्पेक्टर को सौंप दिया है। यह मामला शहर में चल रहे अवैध फार्मा नेटवर्क की व्यापकता को उजागर करता है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत में 'नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस' (NDPS) अधिनियम के तहत, कई दर्द निवारक और कफ सिरप को नियंत्रित श्रेणी में रखा गया है। पिछले कुछ वर्षों में, बड़े शहरों में फार्मेसी कर्मचारियों द्वारा इन दवाओं के दुरुपयोग की घटनाओं में वृद्धि देखी गई है, जो युवाओं में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति का संकेत है।
Frequently Asked Questions
1. पुलिस ने कुल कितनी कीमत का सामान बरामद किया है?
पुलिस ने कुल ₹4.8 लाख मूल्य की दवाएं और एक मोबाइल फोन बरामद किया है।
2. आरोपी किस तरह से अवैध बिक्री कर रहे थे?
आरोपी बिना डॉक्टर के पर्चे के और ऊंचे दामों पर दवाएं बेच रहे थे, और इसके लिए फार्मेसी के रबर स्टैम्प का गलत इस्तेमाल कर रहे थे।