कोयंबटूर की एक विशेष अदालत ने 2022 में हुई एक हिंसक लूटपाट के मामले में तीन व्यक्तियों को सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। दोषियों ने पीड़ित को झांसा देकर सुनसान जगह पर बुलाया और उसके साथ मारपीट कर लूटपाट की थी।

  • तीन दोषियों को 7 साल के कठोर कारावास (RI) की सजा।
  • अपराध में पीड़ित को फोन के जरिए सुनसान जगह पर बुलाया गया था।
  • पीड़ित पर चाकू, लाठी और लोहे की रॉड से हमला किया गया।
  • अदालत ने प्रत्येक दोषी पर ₹5,000 का जुर्माना भी लगाया।

कोयंबटूर में बम विस्फोट मामलों की सुनवाई के लिए गठित विशेष अदालत ने मंगलवार, 1 सितंबर, 2026 को एक सख्त फैसला सुनाते हुए तीन व्यक्तियों को सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। दोषियों की पहचान एस. प्रशांत, एम. निशानथकुमार और एस. मणिक्कम के रूप में हुई है, जिन्हें मार्च 2022 में एक सोची-समझी लूटपाट का दोषी पाया गया।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, एस. प्रशांत ने शिकायतकर्ता से फोन पर संपर्क किया और उसे समलैंगिक कृत्यों के बहाने 9 मार्च, 2022 की रात को साईबाबा कॉलोनी के पास रेलवे ट्रैक के किनारे एक सुनसान जगह पर बुलाया। जैसे ही पीड़ित वहां पहुंचा, तीनों आरोपियों ने उसे घेर लिया।

हमला अत्यंत हिंसक था। दोषियों ने पीड़ित की गर्दन पर चाकू रखा और लाठी व लोहे की रॉड से उसकी बेरहमी से पिटाई की। उन्होंने पीड़ित से ₹5,000 नकद और एक महंगा स्मार्टफोन लूट लिया और मौके से फरार हो गए।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला 'हनी-ट्रैपिंग' या व्यक्तिगत कमजोरियों का फायदा उठाकर लोगों को सुनसान जगहों पर बुलाने के खतरनाक चलन को उजागर करता है। लूटपाट के मामले की सुनवाई विशेष अदालत में होना यह दर्शाता है कि न्यायिक प्रणाली लंबित मामलों को तेजी से निपटाने के लिए विशेष बेंचों का उपयोग कर रही है।

"यह सजा पूर्व-नियोजित हिंसक अपराधों और आपराधिक लाभ के लिए व्यक्तिगत कमजोरियों के शोषण के प्रति अदालत की शून्य-सहनशीलता नीति को दर्शाती है।"

साईबाबा कॉलोनी पुलिस द्वारा त्वरित जांच के बाद, तीनों आरोपियों को 4 अप्रैल, 2022 को गिरफ्तार कर लिया गया था। कानूनी कार्यवाही का समापन 31 अगस्त, 2026 को हुए फैसले के साथ हुआ, जिससे यह सुनिश्चित हुआ कि अपराधियों को उनके कृत्य के लिए उचित दंड मिले।

क्या आप जानते हैं?: कठोर कारावास (Rigorous Imprisonment) साधारण कारावास से अलग होता है क्योंकि इसमें दोषी को जेल में रहने के दौरान कठिन शारीरिक श्रम करना पड़ता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. फैसला किस अदालत ने सुनाया?
फैसला कोयंबटूर में बम विस्फोट मामलों की सुनवाई के लिए गठित विशेष अदालत ने सुनाया।

2. दोषियों पर क्या दंड लगाया गया?
तीनों दोषियों को सात साल के कठोर कारावास और ₹5,000 प्रति व्यक्ति के जुर्माने की सजा सुनाई गई।