सभी उच्च न्यायालयों में मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति के बाद, अब सुप्रीम कोर्ट के कोलेजियम का पूरा ध्यान शीर्ष अदालत में खाली पड़े चार महत्वपूर्ण पदों को भरने पर केंद्रित है।

  • सभी 25 उच्च न्यायालयों में अब नियमित मुख्य न्यायाधीश नियुक्त कर दिए गए हैं।
  • सुप्रीम कोर्ट में वर्तमान में 4 पद खाली हैं, जो स्वीकृत संख्या से कम है।
  • कोलेजियम के सामने लैंगिक प्रतिनिधित्व और भविष्य के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के उत्तराधिकार जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे हैं।

देश के सभी 25 उच्च न्यायालयों में अब नियमित मुख्य न्यायाधीशों (CJs) की नियुक्ति पूरी हो गई है। केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में आठ नियुक्तियों की अधिसूचना जारी करने के बाद, न्यायपालिका के इस महत्वपूर्ण ढांचे में स्थिरता आ गई है। कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने इन नियुक्तियों की घोषणा की, जिससे अब न्यायपालिका का केंद्र बिंदु उच्च न्यायालयों से हटकर सीधे सुप्रीम कोर्ट की ओर मुड़ गया है।

उच्च न्यायालयों में नई नियुक्तियां

हालिया नियुक्तियों के तहत, न्यायमूर्ति वल्लूरी कामेश्वर राव पटना उच्च न्यायालय के प्रमुख होंगे, जबकि न्यायमूर्ति रवींद्र वी घुगे कलकत्ता उच्च न्यायालय जाएंगे। न्यायमूर्ति संजय कुमार अग्रवाल राजस्थान और न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी बॉम्बे उच्च न्यायालय का कार्यभार संभालेंगे। इसके अतिरिक्त, न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा को पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय का नियमित मुख्य न्यायाधीश पुष्टि किया गया है। इन नियुक्तियों ने एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर तय किया है क्योंकि अब देश का कोई भी उच्च न्यायालय बिना नियमित मुख्य न्यायाधीश के नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट में रिक्तियों का संकट

कोलेजियम की अगली बड़ी चुनौती सुप्रीम कोर्ट में खाली पड़े चार पदों को भरना है। सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अध्यादेश, 2026 के माध्यम से अदालत की स्वीकृत संख्या बढ़ाने के बावजूद, वर्तमान में केवल 34 न्यायाधीश कार्यरत हैं। यह स्थिति और भी गंभीर हो जाएगी जब न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा 29 नवंबर को सेवानिवृत्त होंगे, जिससे रिक्तियों की संख्या बढ़ जाएगी।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि ये नियुक्तियां केवल प्रशासनिक नहीं हैं, बल्कि भारत के संवैधानिक भविष्य को आकार देने वाली हैं। कोलेजियम को न केवल रिक्तियों को भरना है, बल्कि ऐसे उम्मीदवारों का चयन करना है जो भविष्य में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के पद की कतार में शामिल हो सकें। वरिष्ठता के परंपरा के अनुसार, नियुक्तियों का प्रभाव आने वाले दशकों तक रहेगा।

न्यायिक नियुक्तियों में केवल रिक्तियों को भरना पर्याप्त नहीं है, बल्कि भविष्य के नेतृत्व की निरंतरता सुनिश्चित करना भी अनिवार्य है।

कोलेजियम के सामने एक और बड़ा मुद्दा लैंगिक प्रतिनिधित्व का है। वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में केवल एक महिला न्यायाधीश, न्यायमूर्ति नागरत्ना हैं। उच्च न्यायालयों में न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल, लिसा गिल और रेवती मोहिते डेरे जैसी महिला न्यायाधीशों की उपस्थिति को देखते हुए, शीर्ष अदालत में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना एक प्रमुख प्राथमिकता होने की संभावना है।

भावी उत्तराधिकार की चुनौती

कोलेजियम को ऐसे उम्मीदवारों पर विचार करना होगा जो वरिष्ठता की सूची में शामिल होकर 2033 तक सीजेआई पद के संभावित उत्तराधिकारी बन सकें। वर्तमान में न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, बी वी नागरत्ना और पी एस नरासिम्हा जैसे न्यायाधीश इस कतार में आगे हैं। नए नियुक्त होने वाले न्यायाधीशों को इस लंबी कतार में सबसे नीचे शामिल होना होगा, जिससे उनके लिए सीजेआई बनने का रास्ता काफी लंबा और चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

Did You Know?: भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या को बढ़ाने के लिए समय-समय पर विधायी संशोधन किए जाते हैं ताकि बढ़ते मुकदमों का भार संभाला जा सके।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: सुप्रीम कोर्ट में वर्तमान में कितने पद खाली हैं?
उत्तर: वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में स्वीकृत संख्या से चार पद खाली हैं।

प्रश्न 2: क्या कोलेजियम महिला न्यायाधीशों को प्राथमिकता दे सकता है?
उत्तर: हाँ, लैंगिक प्रतिनिधित्व को कोलेजियम के चयन में एक महत्वपूर्ण कारक माना जा रहा है।