सतर्कता और भ्रष्टाचार विरोधी निदेशालय (DVAC) ने पूर्व मंत्री के.एन. नेहरू और 12 अन्य लोगों के खिलाफ 2021 से 2025 के बीच सरकारी टेंडरों में हेरफेर और अवैध वसूली का मामला दर्ज किया है।

  • वरिष्ठ DMK नेता के.एन. नेहरू और उनके भाइयों सहित 13 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज।
  • नगर पालिका और जल आपूर्ति टेंडरों में ₹1,020 करोड़ की कथित धोखाधड़ी।
  • 'पार्टी फंड' के नाम पर अनुबंध मूल्य का 7.5% से 10% तक अवैध कमीशन लेने का आरोप।

सतर्कता और भ्रष्टाचार विरोधी निदेशालय (DVAC) ने पूर्व नगर प्रशासन मंत्री के.एन. नेहरू, उनके भाइयों और अन्य सहयोगियों के खिलाफ एक हाई-प्रोफाइल मामला दर्ज किया है। FIR (हेडक्वार्टर क्राइम नंबर 7/2026) के अनुसार, 2021 और 2025 के बीच नगर प्रशासन और शहरी जल आपूर्ति विभागों द्वारा दिए गए अनुबंधों में बड़े पैमाने पर हेरफेर और अवैध धन की वसूली की गई।

इस मामले में कुल 13 आरोपियों को नामजद किया गया है। इनमें श्री नेहरू के साथ उनके भाई के.एन. मणिवन्नन और एन. रविचंद्रन, पूर्व विधायक एस. सुदर्शनम और जे. जे. एबेनेज़र, TVH ग्रुप के प्रतिनिधि, सी.टी. कंस्ट्रक्शन के कर्मचारी और ठेकेदार के. सतीश कुमार शामिल हैं। इसके अलावा कई अज्ञात अधिकारियों और निजी व्यक्तियों को भी आरोपी बनाया गया है।

जांच का घटनाक्रम

इस कानूनी कार्रवाई की नींव दिसंबर 2025 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा DVAC को सौंपी गई 258 पन्नों की रिपोर्ट से पड़ी। ED की रिपोर्ट में सरकारी अनुबंधों में हेरफेर के माध्यम से लगभग ₹1,020 करोड़ के गलत लाभ का आरोप लगाया गया था। इसके बाद राज्य सरकार ने विस्तृत जांच की अनुमति दी, जिसके परिणामस्वरूप यह FIR दर्ज हुई।

DVAC की प्रारंभिक जांच में लोक सेवकों, निजी व्यक्तियों और ठेकेदारों के बीच एक गहरा गठजोड़ पाया गया। आरोप है कि टेंडर खुलने से पहले ही ठेकेदारों का चयन कर लिया जाता था और अनुबंध मूल्य का 7.5% से 10% तक "पार्टी फंड" के नाम पर अवैध रूप से वसूला जाता था।

यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल रिश्वतखोरी का नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक बुनियादी ढांचा अनुबंधों के आवंटन में मौजूद संरचनात्मक खामियों को उजागर करता है। 'पार्टी फंड' की आड़ में कमीशन लेना यह दर्शाता है कि राजनीतिक संरक्षण का प्रभाव प्रशासनिक निष्पक्षता पर हावी हो चुका है।

WhatsApp चैट और डिजिटल साक्ष्यों का उपयोग यह संकेत देता है कि अब भ्रष्टाचार के मामलों में उच्च पदों पर बैठे लोगों के लिए समन्वय से इनकार करना कठिन होता जा रहा है।

साक्ष्यों के रूप में आरोपियों के मोबाइल फोन से बरामद सामग्री और WhatsApp चैट का उपयोग किया गया है। FIR में एक निजी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी से जुड़े ₹1 करोड़, ₹2.77 करोड़ और ₹5 करोड़ के विशिष्ट भुगतानों का उल्लेख है, जबकि कुल राशि करोड़ों में है।

क्या आप जानते हैं?: भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17A के तहत, किसी लोक सेवक द्वारा आधिकारिक कर्तव्यों के दौरान लिए गए निर्णयों की जांच करने से पहले सरकार की पूर्व अनुमति आवश्यक होती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: DVAC मामले में मुख्य आरोपी कौन हैं?
मुख्य आरोपियों में पूर्व मंत्री के.एन. नेहरू, उनके भाई, पूर्व विधायक और विभिन्न ठेकेदार एवं अधिकारी शामिल हैं।

प्रश्न 2: इस कथित घोटाले में कुल कितनी राशि शामिल है?
प्रवर्तन निदेशालय (ED) की रिपोर्ट के अनुसार, लगभग ₹1,020 करोड़ के गलत लाभ का अनुमान है।