CID की जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि निलंबित KPSC अध्यक्ष साहूकार शिवशंकरप्पा और उनके बेटे ने परीक्षा पेपर लीक करने वाले बिचौलियों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा। इस घोटाले में करोड़ों की रिश्वत के बदले पशु चिकित्सा अधिकारियों के पदों पर अवैध चयन का आरोप है।
- निलंबित KPSC अध्यक्ष साहूकार शिवशंकरप्पा और उनके बेटे पर बिचौलियों के साथ एन्क्रिप्टेड कॉल के जरिए संपर्क का आरोप।
- पशु चिकित्सा अधिकारी भर्ती घोटाले में 80 लाख रुपये तक की रिश्वत लेने का संदेह।
- CID जांच में पाया गया कि संदिग्ध उम्मीदवारों को रिज़ॉर्ट में रखकर लीक हुए पेपरों का अभ्यास कराया गया।
- कर्नाटक हाईकोर्ट ने पूर्व अध्यक्ष की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज किया।
बेंगलुरु: कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) के बहुचर्चित पशु चिकित्सा अधिकारी भर्ती घोटाले में एक नया और सनसनीखेज मोड़ आया है। CID की जांच ने यह स्पष्ट कर दिया है कि निलंबित आयोग अध्यक्ष साहूकार शिवशंकरप्पा और उनके परिवार के सदस्य, पेपर लीक करने वाले बिचौलियों और संदिग्ध उम्मीदवारों के साथ निरंतर संपर्क में थे।
सोमवार को कर्नाटक उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान, सरकारी वकील बी.एन. जगदीशा ने अदालत को बताया कि शिवशंकरप्पा और उनके बेटे ने एन्क्रिप्टेड इंटरनेट कॉल्स (IP calls) का उपयोग करके बिचौलिये बसावराज कन्नाले के साथ बातचीत की। कन्नाले, जो एक भाजपा से जुड़े व्यवसायी हैं, को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच में यह भी पाया गया कि परीक्षा के महत्वपूर्ण दिनों में आयोग के परीक्षा नियंत्रक, आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार और अध्यक्ष के बीच संदिग्ध कॉल किए गए थे।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that this scam not only undermines the integrity of the state's recruitment process but also shatters the trust of thousands of meritorious students who compete for government jobs. The involvement of high-ranking officials like the KPSC chairman and an IAS officer suggests a deep-rooted systemic corruption that requires immediate judicial intervention.
यह घोटाला केवल पेपर लीक का मामला नहीं है, बल्कि यह सरकारी तंत्र के भीतर बैठे उन लोगों द्वारा किया गया विश्वासघात है जिन्हें निष्पक्षता सुनिश्चित करनी चाहिए थी।
जांच के अनुसार, यह घोटाला इतना सुनियोजित था कि जिन उम्मीदवारों ने रिश्वत दी थी, उन्हें परीक्षा से एक दिन पहले रिज़ॉर्ट और होटलों में रखा गया था। वहां उन्हें लीक किए गए प्रश्न पत्रों के आधार पर प्रशिक्षित किया जा रहा था। बिचौलिए न केवल नकद बल्कि बैंक ट्रांसफर के माध्यम से भी भारी भुगतान ले रहे थे।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
KPSC पर पिछले कुछ वर्षों में समय-समय पर अनियमितताओं के आरोप लगते रहे हैं। भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की कमी और प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत ने कर्नाटक में राजनीतिक और कानूनी विवादों को जन्म दिया है। यह वर्तमान मामला पशु चिकित्सा अधिकारियों की 400 भर्तियों से जुड़ा है, जिसमें व्यापक धांधली की आशंका है।
जांच एजेंसी ने अब तक कई संदिग्धों के बैंक खातों को जब्त कर लिया है। अदालत ने यह भी नोट किया कि पूर्व KPSC सदस्य शांता होसामानी जैसे कई आरोपी फिलहाल फरार हैं और उनके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किए गए हैं।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: KPSC घोटाला क्या है?
उत्तर: यह पशु चिकित्सा अधिकारियों के पदों पर भर्ती के लिए आयोजित परीक्षा के प्रश्न पत्रों को रिश्वत के बदले लीक करने का एक घोटाला है।
प्रश्न 2: CID ने अब तक क्या सबूत जुटाए हैं?
उत्तर: CID ने IPDR डेटा के माध्यम से संदिग्ध कॉल्स, बैंक ट्रांजेक्शन और रिज़ॉर्ट में उम्मीदवारों की ट्रेनिंग के सबूत जुटाए हैं।