हैदराबाद उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक रियल एस्टेट कंपनी को आदेश दिया है कि वह एक निवेशक को 17.5 लाख रुपये की मूल राशि और मानसिक प्रताड़ना के लिए मुआवजा वापस करे। यह मामला सफेद चंदन के वृक्षारोपण के नाम पर किए गए निवेश से जुड़ा है।

  • उपभोक्ता आयोग ने रियल एस्टेट कंपनी को 17.5 लाख रुपये मूलधन और ब्याज सहित लौटाने का निर्देश दिया।
  • पीड़ित को मानसिक प्रताड़ना के लिए 25,000 रुपये और मुकदमेबाजी के खर्च के लिए 5,000 रुपये का भुगतान करना होगा।
  • कंपनी ने वादा किया था कि निवेशक को मासिक रिटर्न और भविष्य में चंदन की बिक्री से लाभ मिलेगा।

हैदराबाद के उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए एक रियल एस्टेट कंपनी को उस व्यक्ति को रिफंड देने का आदेश दिया है, जिसे सफेद चंदन के वृक्षारोपण परियोजना के नाम पर ठगा गया था। पीड़ित, सोमा नितीश रेड्डी, ने 2023 में कंपनी के वादों पर भरोसा करते हुए 17.5 लाख रुपये का निवेश किया था।

मामले के विवरण के अनुसार, कंपनी ने रेड्डी को लगभग 267 वर्ग गज का भूखंड देने का वादा किया था, जिस पर सफेद चंदन के पेड़ लगाए जाने थे। इसके अलावा, कंपनी ने उन्हें 100 महीनों तक प्रति माह 30,000 रुपये के रिटर्न और 12-15 वर्षों के बाद पेड़ों की बिक्री से होने वाले मुनाफे में हिस्सेदारी का लालच दिया था।

धोखाधड़ी का तरीका

शिकायतकर्ता ने अदालत को बताया कि निवेश के बाद कंपनी ने केवल जुलाई और अगस्त 2023 के लिए मासिक भुगतान किया और उसके बाद भुगतान बंद कर दिया। सबसे गंभीर बात यह थी कि जिस जमीन का वादा किया गया था, वह कभी भी रेड्डी के नाम पर पंजीकृत (Register) नहीं की गई। जब उन्होंने परियोजना स्थल का दौरा किया, तो पाया कि मुख्य गेट बंद था और वहां कोई सुरक्षाकर्मी नहीं था।

जब पीड़ित ने अपने पैसे वापस मांगे, तो कंपनी ने 17.5 लाख रुपये के तीन चेक जारी किए, लेकिन वे सभी 'अपर्याप्त धनराशि' (Insufficient Funds) के कारण बाउंस हो गए।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला 'एग्रो-इन्वेस्टमेंट' के नाम पर होने वाले संगठित घोटालों की ओर इशारा करता है। अक्सर कंपनियां पर्यावरण और उच्च रिटर्न का लालच देकर मध्यम वर्ग के लोगों को फंसाती हैं। यह फैसला एक मिसाल है कि रियल एस्टेट कंपनियां केवल यह कहकर नहीं बच सकतीं कि लेनदेन 'व्यावसायिक' था और ग्राहक 'उपभोक्ता' की श्रेणी में नहीं आता।

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के तहत, यदि कोई सेवा प्रदाता अपने वादे के अनुसार संपत्ति या रिटर्न देने में विफल रहता है, तो वह कानूनी रूप से जवाबदेह है, चाहे वह निवेश किसी भी प्रकृति का हो।

कंपनी के वकील ने तर्क दिया कि यह मामला आर्थिक अपराध शाखा (EOW) के पास है और उपभोक्ता अदालत को इसे नहीं देखना चाहिए। हालांकि, आयोग के अध्यक्ष वक्कंती नरसिम्हा राव और अन्य सदस्यों ने इस दलील को खारिज कर दिया और उपभोक्ता के अधिकारों को प्राथमिकता दी।

क्या आप जानते हैं?: भारत में सफेद चंदन का व्यापार अत्यधिक विनियमित है और इसके अवैध कटान या व्यापार पर सख्त कानूनी प्रतिबंध हैं, जिसका फायदा उठाकर कई फर्जी कंपनियां निवेशकों को लुभाती हैं।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: उपभोक्ता आयोग ने कंपनी पर कितना जुर्माना लगाया?
आयोग ने 17.5 लाख रुपये का रिफंड, 9% ब्याज, 25,000 रुपये मानसिक प्रताड़ना के लिए और 5,000 रुपये कानूनी खर्च के लिए देने का आदेश दिया।

प्रश्न 2: क्या यह मामला केवल सिविल कोर्ट में जाना चाहिए था?
कंपनी ने ऐसा तर्क दिया था, लेकिन आयोग ने स्पष्ट किया कि सेवा में कमी के कारण उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत शिकायत मान्य है।