बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक 59 वर्षीय विचाराधीन कैदी को चिकित्सा आधार पर जमानत दी है, जिसने हिरासत के दौरान मात्र 48 दिनों में 21 किलोग्राम वजन कम कर लिया था। अदालत ने जेल की स्थितियों और मरीज की गंभीर स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए इसे 'खतरनाक' करार दिया।

  • 59 वर्षीय कैदी ने 48 दिनों के भीतर 21 किलो वजन कम किया।
  • कैदी की 80% पेट की सर्जरी हो चुकी थी, जिसके लिए सख्त तरल आहार आवश्यक था।
  • अदालत ने माना कि जेल की भीड़भाड़ और स्थितियां स्वास्थ्य के लिए जोखिमपूर्ण हैं।
  • टाइप-I ऑटोइम्यून पैंक्रियाटाइटिस और टीबी जैसी अन्य गंभीर बीमारियों का भी खुलासा।

बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए एक 59 वर्षीय विचाराधीन कैदी को चिकित्सा आधार पर जमानत प्रदान की है। अदालत ने पाया कि हिरासत के दौरान व्यक्ति का स्वास्थ्य तेजी से गिर रहा था, जो न केवल चिंताजनक है बल्कि जीवन के लिए खतरा भी बन सकता था। जस्टिस मिलिंद एन जाधव ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि 48 दिनों में 21 किलोग्राम वजन का कम होना किसी भी सामान्य व्यक्ति के लिए भयावह है।

मामले के विवरण के अनुसार, इस व्यक्ति की नवंबर 2025 में एक बड़ी गैस्ट्रिक सर्जरी हुई थी, जिसमें उसके पेट का 80 प्रतिशत हिस्सा निकाल दिया गया था। डॉक्टरों ने उसे सख्त तरल या अर्ध-तरल आहार पर रहने की सलाह दी थी। हालांकि, जून में गिरफ्तारी के बाद, वह जेल की हिरासत में इस विशिष्ट आहार और विशेषज्ञ चिकित्सा देखभाल को प्राप्त करने में असमर्थ रहा।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that this case highlights the systemic failure of the Indian prison healthcare system. When a prisoner's survival depends on a highly specific medical regimen—like a post-gastric surgery diet—the generic facilities of a jail hospital become inadequate. This ruling reinforces the legal principle that the right to health is a fundamental part of the right to life under Article 21, even for those accused of serious crimes.

"The qualitative difference between treatment in a jail barrack and a specialized hospital can be the difference between recovery and permanent disability."

अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया था कि स्थिति जीवन के लिए खतरा नहीं है और जेल अस्पताल में इलाज संभव है। लेकिन अदालत ने पाया कि ससून जनरल हॉस्पिटल और जेल अस्पताल में आवश्यक विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी थी, जिसके कारण मरीज को मुंबई के केईएम (KEM) और जेजे (JJ) अस्पताल ले जाना पड़ा।

अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि कैदी टाइप-I ऑटोइम्यून पैंक्रियाटाइटिस, लिवर रोग, तपेदिक (TB) और पिट्यूटरी ग्रंथि की समस्या से जूझ रहा है, जिसके लिए उसे नियमित स्टेरॉयड की आवश्यकता है। जस्टिस जाधव ने जेलों में अत्यधिक भीड़भाड़ और वहां की अमानवीय स्थितियों पर भी सूक्ष्म टिप्पणी की।

क्या आप जानते हैं?: भारत में 'मेडिकल बेल' तब दी जाती है जब यह साबित हो जाए कि आरोपी की स्थिति इतनी गंभीर है कि जेल में उसकी जान जा सकती है या वह उचित उपचार नहीं पा सकता।

Frequently Asked Questions

1. अदालत ने जमानत देने का मुख्य कारण क्या बताया?
मुख्य कारण सर्जरी के बाद वजन में भारी गिरावट (21 किलो) और जेल में विशिष्ट आहार एवं विशेषज्ञ चिकित्सा की अनुपलब्धता थी।

2. आरोपी पर क्या आरोप हैं?
आरोपी पर आपराधिक साजिश, यौन अपराध और महाराष्ट्र के काला जादू विरोधी कानून के तहत कई गंभीर आरोप हैं।