पंजाब के एक उपभोक्ता आयोग ने मैंगो फ्रूट ड्रिंक में गंदगी और कीड़े पाए जाने पर निर्माता और रिटेलर को कुल 20,060 रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है। अदालत ने इसे सेवा में गंभीर कमी और लापरवाही माना है।

  • उपभोक्ता आयोग ने मैंगो ड्रिंक में स्पष्ट रूप से गंदगी और कीड़े पाए।
  • रिटेलर और निर्माता दोनों को संयुक्त रूप से उत्तरदायी ठहराया गया।
  • कुल 20,060 रुपये का मुआवजा और कानूनी सहायता कोष में जमा करने का आदेश।

पंजाब के एक उपभोक्ता आयोग ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए एक रिटेलर और निर्माता कंपनी को निर्देश दिया है कि वे एक ग्राहक को 20,060 रुपये का भुगतान करें। यह मामला तब शुरू हुआ जब एक व्यक्ति ने ₹60 की मैंगो फ्रूट ड्रिंक खरीदी और उसे खोलने पर उसके अंदर गंदगी और कीड़े तैरते हुए पाए।

आयोग के अध्यक्ष अशिश कुमार ग्रोवर और सदस्य उर्मिला कुमारी एवं नवदीप कुमार गर्ग ने मामले की सुनवाई करते हुए पाया कि उत्पाद उपभोग के लिए पूरी तरह अनुपयुक्त था। आयोग ने स्पष्ट किया कि बोतल में मौजूद विदेशी सामग्री को नग्न आंखों से देखा जा सकता था, जिससे यह साबित होता है कि उत्पाद की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं थी।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that this ruling sets a critical precedent for the FMCG sector. It reinforces the principle that retailers cannot simply wash their hands of responsibility by claiming they are not the manufacturers. In an era of mass distribution, the chain of custody from factory to shelf is legally scrutinized to ensure public health safety.

शिकायतकर्ता के अनुसार, उसने एक सुपरमार्केट से ₹120 में दो बोतलें खरीदी थीं। पहली बोतल खोलने पर कीड़े मिलने के बाद जब उसने दूसरी बोतल जांची, तो उसमें भी वैसी ही गंदगी पाई गई। पीड़ित ने पहले रिटेलर से स्टॉक नष्ट करने और रिफंड की मांग की थी, लेकिन अनुरोध ठुकरा दिए जाने पर उसने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।

"Consumer protection laws are designed to hold the entire supply chain accountable, ensuring that quality control isn't just a corporate slogan but a legal mandate."

बचाव पक्ष में, रिटेलर ने तर्क दिया कि वह केवल एक विक्रेता है और पैकेजिंग या गुणवत्ता नियंत्रण में उसकी कोई भूमिका नहीं है। वहीं, निर्माता ने दावा किया कि उत्पाद निर्धारित खाद्य सुरक्षा मानकों के तहत बनाया गया था और शिकायत के समय तक उत्पाद की समय सीमा (expiry date) समाप्त हो चुकी थी, जिससे लैब परीक्षण असंभव था।

हालांकि, आयोग ने इन तर्कों को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि जब साक्ष्य (बोतल) प्रत्यक्ष रूप से उपलब्ध हैं, तो लैब रिपोर्ट की अनुपस्थिति में भी लापरवाही स्पष्ट है। परिणामस्वरूप, आयोग ने ₹60 का रिफंड, मानसिक प्रताड़ना के लिए ₹10,000 और ग्राहक कानूनी सहायता खाते में ₹10,000 जमा करने का आदेश दिया।

क्या आप जानते हैं?: भारत में उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत, ग्राहक अब उस ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म या स्टोर के खिलाफ शिकायत कर सकते हैं जहाँ से उन्होंने सामान खरीदा है, चाहे वह निर्माता कोई भी हो।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: क्या केवल निर्माता जिम्मेदार होता है या रिटेलर भी?
उत्तर: इस मामले के अनुसार, रिटेलर और निर्माता दोनों को सेवा में कमी के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।

प्रश्न 2: उपभोक्ता शिकायत कहाँ दर्ज करा सकते हैं?
उत्तर: ग्राहक अपने राज्य की उपभोक्ता हेल्पलाइन या राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (1915) पर संपर्क कर सकते हैं।