गांधीनगर की लोकल क्राइम ब्रांच (LCB) ने राजकोट पुलिस के एक हाई-प्रोफाइल क्रिकेट सट्टेबाजी रैकेट के आरोपी प्रितेश उर्फ अक्कू पटेल को गिरफ्तार किया है। आरोपी कमीशन के आधार पर सट्टेबाजी आईडी बेचकर अवैध कमाई कर रहा था।

  • गांधीनगर LCB ने राजकोट पुलिस के वांछित आरोपी प्रितेश उर्फ अक्कू पटेल को गिरफ्तार किया।
  • आरोपी कमीशन के आधार पर क्रिकेट सट्टेबाजी के लिए क्रेडिट लिमिट वाली आईडी बेचता था।
  • गिरफ्तार आरोपी पिछले चार महीनों से पुलिस को चकमा देकर फरार चल रहा था।

गुजरात के गांधीनगर में लोकल क्राइम ब्रांच (LCB) ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए राजकोट शहर के एक हाई-प्रोफाइल क्रिकेट सट्टेबाजी रैकेट से जुड़े आरोपी प्रितेश उर्फ अक्कू कालिदास पटेल को गिरफ्तार किया है। आरोपी पिछले चार महीनों से पुलिस की पकड़ से बाहर था और लगातार अपनी लोकेशन बदल रहा था। पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि आरोपी अपने पैतृक गांव रिद्रोल जाने के लिए माणसा-रिद्रोल पाटीया के पास मौजूद है, जिसके बाद टीम ने घेराबंदी कर उसे दबोच लिया।

पुलिस पूछताछ में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि प्रितेश एक संगठित नेटवर्क का हिस्सा था। वह सट्टेबाजी क्षेत्र के बड़े खिलाड़ियों, जैसे संजयसिंह चावड़ा से क्रेडिट लिमिट वाली आईडी प्राप्त करता था और फिर उन पर अपना कमीशन जोड़कर अन्य ग्राहकों को बेचता था। इस प्रकार वह बिना किसी बड़े जोखिम के केवल आईडी वितरण के माध्यम से भारी मुनाफा कमा रहा था।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that the shift from traditional betting to 'ID-based' digital betting has made it easier for middle-men to operate remotely. This 'Commission-based ID' model creates a layer of insulation between the main bookies and the end-users, making it harder for law enforcement to dismantle the entire chain. The arrest of Pritesh reveals how these digital conduits operate across different cities like Rajkot and Gandhinagar.

मामले का खुलासा तब हुआ जब राजकोट डीसीबी पुलिस ने रेसकोर्स ग्राउंड के पास से मानव बरालीया और ब्रिजेश खांट को सट्टा खेलते हुए पकड़ा। जांच में पता चला कि ब्रिजेश ने प्रितेश से 1 लाख रुपये की क्रेडिट लिमिट वाली आईडी मात्र 30 हजार रुपये के कमीशन पर खरीदी थी। जैसे ही प्रितेश का नाम सामने आया, वह फरार हो गया और गांधीनगर के कुडासन स्थित तुलसी हाइट्स में अपने एक रिश्तेदार के फ्लैट में छिपकर रह रहा था।

"डिजिटल सट्टेबाजी आईडी का प्रसार युवाओं को कर्ज के जाल में धकेल रहा है, क्योंकि क्रेडिट लिमिट के लालच में वे भारी कमीशन चुकाते हैं और अंततः कानूनी संकट में फंस जाते हैं।"

पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि प्रितेश ने अब तक कितने लोगों को आईडी बेची हैं और इस नेटवर्क में और कौन-कौन से सफेदपोश लोग शामिल हैं। आरोपी को राजकोट पुलिस को सौंपने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

Did You Know?: भारत में सट्टेबाजी के खिलाफ सख्त कानून हैं, लेकिन डिजिटल वॉलेट और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स ने अवैध सट्टेबाजी को एक वैश्विक स्तर का डिजिटल व्यापार बना दिया है।

Frequently Asked Questions

1. आरोपी प्रितेश का मुख्य काम क्या था?
प्रितेश मुख्य सट्टेबाजों से क्रेडिट लिमिट वाली आईडी लेकर उन पर अपना कमीशन जोड़कर अन्य लोगों को बेचता था।

2. आरोपी को कहाँ से गिरफ्तार किया गया?
उसे गांधीनगर LCB द्वारा माणसा के रिद्रोल गांव के पास से गिरफ्तार किया गया।