ओलंपियन विनेश फोगाट ने भारतीय कुश्ती संघ (WFI) के सख्त पात्रता मानदंडों को चुनौती देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, उनका तर्क है कि मातृत्व और स्वास्थ्य अवकाश उनके करियर को खत्म कर रहे हैं।

  • विनेश फोगाट 14 सितंबर को सीनियर वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप के ट्रायल में शामिल होने की अनुमति चाहती हैं।
  • WFI का तर्क है कि उन्हें राज्य और राष्ट्रीय स्तर के पदक जीतकर 'वापसी' करनी होगी।
  • दिल्ली हाई कोर्ट ने खेलों में मातृत्व के बाद महिलाओं के साथ होने वाले प्रणालीगत अन्याय पर चिंता जताई।
  • विनेश के खिलाफ WFI द्वारा अनुशासनात्मक कार्यवाही भी जारी है।

लैंगिक समानता और पेशेवर खेलों के बीच संघर्ष के एक बड़े मामले में, ओलंपियन विनेश फोगाट ने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है। विनेश 14 सितंबर को होने वाले सीनियर वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप के चयन ट्रायल में भाग लेने के लिए तत्काल हस्तक्षेप की मांग कर रही हैं। फोगाट का तर्क है कि भारतीय कुश्ती संघ (WFI) द्वारा निर्धारित वर्तमान पात्रता मानदंड उन्हें बाहर करने के लिए बनाए गए हैं, जो उनके एथलेटिक करियर के लिए "डेथ नेल" (मृत्यु घंटी) के समान हैं।

विवाद की मुख्य जड़ 7 सितंबर को जारी WFI का वह सर्कुलर है, जिसमें कहा गया है कि केवल वे खिलाड़ी पात्र होंगे जिन्होंने पिछले वर्ष पदक जीते हों। विनेश, जो दिसंबर 2024 से मातृत्व और स्वास्थ्य कारणों से ब्रेक पर थीं, इस शर्त को पूरा नहीं करती हैं। उनके वरिष्ठ अधिवक्ता राजशेखर राव ने तर्क दिया कि एक विश्व स्तरीय एथलीट को मातृत्व अवकाश के बाद फिर से जमीनी स्तर (राज्य स्तर) से शुरू करने के लिए मजबूर करना एक अवास्तविक और दंडात्मक मांग है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल चयन विवाद नहीं है; यह मातृत्व के बाद खेल में लौटने वाली महिला एथलीटों के अधिकारों की एक ऐतिहासिक लड़ाई है। WFI का एक साल के पदक विंडो पर अड़ना जैविक और सामाजिक वास्तविकताओं की अनदेखी करता है। यदि अदालत विनेश के पक्ष में फैसला सुनाती है, तो यह भारत भर के खेल संघों के लिए एक मिसाल बनेगा कि मातृत्व अवकाश को पेशेवर करियर के अंत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

कुश्ती जैसे खेलों में माताओं के लिए 'रिटर्न-टू-प्ले' मार्ग की कमी खेल समावेशिता की भावना का उल्लंघन है।

WFI के वकील हेमंत पाल्खेर ने कड़ा रुख अपनाते हुए सुझाव दिया कि विनेश का राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतकर वापस आने का स्वागत है। हालांकि, अदालत ने इस तर्क पर नाराजगी व्यक्त की। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि यह बेहद अनुचित है कि जब पुरुष पदक जीतते रहते हैं, तब महिलाओं को प्रसव और रिकवरी की अवधि के कारण अपना स्थान खोना पड़ता है और फिर से शून्य से शुरुआत करनी पड़ती है।

मामले को और जटिल बनाते हुए, विनेश मई में WFI द्वारा शुरू की गई अनुशासनात्मक कार्यवाही का सामना कर रही हैं, जिसमें अनुशासनहीनता और यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग (UWW) के नियमों के उल्लंघन के आरोप लगाए गए हैं। यह भी सामने आया कि जब विनेश सुनवाई के लिए कॉन्स्टिट्यूशन क्लब पहुंचीं, तो वहां समिति का कोई सदस्य मौजूद नहीं था।

इस तनाव के पीछे पूर्व WFI अध्यक्ष बृजभूषण सिंह के साथ विनेश का पुराना विवाद भी है। विनेश और अन्य पहलवानों ने उन पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे, हालांकि पिछले महीने दिल्ली की एक अदालत ने उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया था। विनेश का दावा है कि संघ द्वारा उन्हें जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है।

विवाद का बिंदु विनेश फोगाट का पक्ष WFI का पक्ष
पात्रता मातृत्व अवकाश पर विचार होना चाहिए। पिछले वर्ष पदक जीतना अनिवार्य है।
करियर का रास्ता राज्य स्तर से शुरू करना करियर खत्म करना है। पदानुक्रम में नीचे से ऊपर आना होगा।
इरादा संस्था द्वारा जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है। मानक अनुशासन और चयन नियमों का पालन।
क्या आप जानते हैं?: विनेश फोगाट भारत की सबसे सफल पहलवानों में से एक हैं, जिन्होंने हाल के कानूनी संघर्षों से पहले विश्व चैंपियनशिप और एशियाई खेलों के फाइनल तक अपनी जगह बनाई थी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: विनेश फोगाट ट्रायल के लिए अपात्र क्यों हैं?
उत्तर 1: WFI के नियमों के अनुसार, पिछले वर्ष पदक जीतना जरूरी है, जिसे विनेश अपने मातृत्व अवकाश के कारण पूरा नहीं कर पाईं।

प्रश्न 2: दिल्ली हाई कोर्ट ने इस स्थिति पर क्या कहा?
उत्तर 2: जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि यह गलत है कि प्रसव के कारण महिलाओं को अपना पेशेवर दर्जा खोना पड़े, जबकि पुरुषों का करियर निर्बाध चलता रहता है।