ग्रेटर चेन्नई पुलिस की विशेष टीमों ने एक बड़े अभियान में पांच राज्यों से 10 संदिग्धों को गिरफ्तार किया है, जो ₹24.54 करोड़ के साइबर-वित्तीय धोखाधड़ी मामले में शामिल थे।

  • तमिलनाडु, केरल, महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली से 10 संदिग्ध गिरफ्तार।
  • कुल ₹24.54 करोड़ की धोखाधड़ी का मामला, जिसमें से ₹42.72 लाख बरामद।
  • पुलिस कमिश्नर ए. अमलराज के निर्देश पर चार विशेष टीमों द्वारा कार्रवाई।

ग्रेटर चेन्नई पुलिस ने एक परिष्कृत साइबर-वित्तीय धोखाधड़ी नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए एक उच्च-स्तरीय ऑपरेशन चलाया है। शहर के पुलिस कमिश्नर ए. अमलराज के रणनीतिक निर्देशों पर, चार विशेष पुलिस इकाइयों को उन फरार संदिग्धों का पीछा करने के लिए तैनात किया गया था, जो कानून से बचने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों में छिप गए थे।

यह ऑपरेशन सेंट्रल क्राइम ब्रांच (CCB) और नॉर्थ जोन साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन के सहयोग से चलाया गया। पुलिस निरीक्षकों के नेतृत्व में इन टीमों ने तमिलनाडु, केरल, महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली में डेरा डाला और जालसाजों के सटीक ठिकानों का पता लगाने के लिए निरंतर निगरानी और खुफिया जानकारी जुटाई।

धोखाधड़ी का पैमाना

7 सितंबर तक, इस कार्रवाई के परिणामस्वरूप 10 व्यक्तियों की गिरफ्तारी हुई। जांच से पता चला है कि छह अलग-अलग मामलों में कुल ₹24.54 करोड़ का नुकसान हुआ है। हालांकि पुलिस ने ₹42.72 लाख बरामद किए हैं, लेकिन मनी ट्रेल से पता चलता है कि लगभग ₹4.4 करोड़ सीधे छह मुख्य आरोपियों को स्थानांतरित किए गए थे। शेष चार संदिग्धों ने बिचौलियों के रूप में कार्य किया, जिससे अवैध धन का प्रवाह आसान हुआ।

"कई राज्यों में फैले साइबर अपराधियों की मौजूदगी यह दर्शाती है कि डिजिटल वित्तीय अपराधों से लड़ने के लिए अंतर-राज्यीय पुलिस समन्वय कितना आवश्यक है।"

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह ऑपरेशन इस बात का संकेत है कि शहरी पुलिस बल अब डिजिटल अपराधों से निपटने के तरीके बदल रहे हैं। केवल स्थानीय अधिकार क्षेत्र पर निर्भर रहने के बजाय, चेन्नई पुलिस का 'विशेष टीमों' को अन्य राज्यों में भेजने का निर्णय उन सफेदपोश अपराधियों के खिलाफ एक आक्रामक दृष्टिकोण को दर्शाता है जो डिजिटल सीमाओं का लाभ उठाते हैं।

गिरफ्तारियों का वितरण—छह तमिलनाडु और केरल में, दो महाराष्ट्र में और दो गुजरात में—इन सिंडिकेट्स के व्यापक प्रसार को रेखांकित करता है। पुलिस ने आठ मोबाइल फोन, कई सिम कार्ड, मेमोरी कार्ड, बैंक पासबुक और चेक बुक सहित डिजिटल सबूतों का एक बड़ा जखीरा जब्त किया है, जिनका अब विश्लेषण किया जा रहा है।

क्या आप जानते हैं?: भारत में UPI और डिजिटल वॉलेट के तेजी से अपनाए जाने के कारण साइबर-वित्तीय धोखाधड़ी में भारी वृद्धि हुई है, जिससे आधुनिक पुलिसिंग के लिए CCB जैसी विशेष इकाइयां अनिवार्य हो गई हैं।
विवरणजानकारी
कुल गिरफ्तारियां10 व्यक्ति
शामिल राज्य5 (TN, KL, MH, GJ, DL)
कुल धोखाधड़ी राशि₹24.54 करोड़
बरामद राशि₹42.72 लाख

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: साइबर अपराधियों को गिरफ्तार करने के अभियान का नेतृत्व किसने किया?
यह ऑपरेशन ग्रेटर चेन्नई सिटी पुलिस कमिश्नर ए. अमलराज के निर्देश पर गठित चार विशेष टीमों द्वारा चलाया गया था।

प्रश्न 2: छापेमारी के दौरान कौन से सबूत जब्त किए गए?
अधिकारियों ने आठ मोबाइल फोन, सिम कार्ड, मेमोरी कार्ड, दो बैंक पासबुक, एक चेक बुक और विभिन्न अन्य डिजिटल दस्तावेज जब्त किए।