कर्नाटक उच्च न्यायालय ने मूवी टिकटों पर 2% कल्याण उपकर मांगने वाले सरकारी नोटिसों को रद्द कर दिया है, क्योंकि राज्य सरकार ने स्वीकार किया कि संबंधित कानून अभी तक लागू नहीं हुआ है।
- कर्नाटक HC ने सिनेमा टिकटों पर 2% कल्याण उपकर के नोटिसों को रद्द किया।
- राज्य सरकार ने स्वीकार किया कि 'कर्नाटक सिनेमा और सांस्कृतिक कार्यकर्ता (कल्याण) अधिनियम, 2024' अभी लागू नहीं हुआ है।
- मल्टीप्लेक्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया और PVR INOX ने इस समयपूर्व नोटिस को सफलतापूर्वक चुनौती दी।
सिनेमा उद्योग के लिए एक बड़ी कानूनी जीत में, कर्नाटक उच्च न्यायालय ने उन परिपत्रों और नोटिसों को रद्द कर दिया है जिनके माध्यम से नियामक अधिकारियों ने मल्टीप्लेक्स और सिनेमा थिएटरों से 1 सितंबर से 2% कल्याण उपकर (Welfare Cess) वसूलने को कहा था। यह आदेश जस्टिस एच.टी. नरेंद्र प्रसाद द्वारा पारित किया गया।
यह कानूनी लड़ाई तब शुरू हुई जब मल्टीप्लेक्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया और PVR INOX Ltd. ने इन नोटिसों की वैधता को चुनौती देते हुए याचिका दायर की। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि सरकार कर्नाटक सिनेमा और सांस्कृतिक कार्यकर्ता (कल्याण) अधिनियम, 2024 के प्रावधानों के तहत धन की मांग कर रही थी, जबकि यह अधिनियम अभी तक आधिकारिक रूप से लागू ही नहीं हुआ था।
कार्यवाही के दौरान, कर्नाटक राज्य सरकार ने अदालत में स्वीकार किया कि उस गजट अधिसूचना का अभी तक प्रकाशन नहीं हुआ है, जो यह घोषित करे कि अधिनियम किस तारीख से लागू होगा। इसके परिणामस्वरूप, सरकार ने अदालत को सूचित किया कि 9 सितंबर को इन नोटिसों को वापस ले लिया गया था, जिसके बाद अदालत ने औपचारिक रूप से इन्हें रद्द कर दिया।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला विधायी स्वीकृति और कार्यकारी कार्यान्वयन के बीच के अंतर को उजागर करता है। जब कोई कानून पारित होता है और राज्यपाल की सहमति मिल जाती है, लेकिन उसे 'अधिसूचित' नहीं किया जाता, तो वह कानून निष्क्रिय रहता है। इस निष्क्रिय चरण के दौरान कर या उपकर वसूलने का प्रयास प्रशासनिक कानून और उचित प्रक्रिया का उल्लंघन है।
"कानून के लागू होने की वैध अधिसूचना के बिना वित्तीय लेवी लागू करना कार्यकारी शक्ति का अतिरेक है जो कानून के शासन को कमजोर करता है।"
समय सीमा के मुद्दे के अलावा, याचिकाकर्ताओं ने एक गहरा संवैधानिक मुद्दा उठाया: क्या राज्य विधायिका के पास ऐसा उपकर लगाने की क्षमता है? उन्होंने तर्क दिया कि संसद पहले ही सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 लागू कर चुकी है, जो सिनेमा कार्यकर्ताओं सहित सभी श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र को कवर करती है।
हालांकि, जस्टिस नरेंद्र प्रसाद ने कहा कि चूंकि अधिनियम अभी तक लागू नहीं हुआ है, इसलिए इस स्तर पर इसकी समग्र वैधता की जांच नहीं की जाएगी। अदालत ने याचिकाकर्ताओं को यह स्वतंत्रता दी है कि जब यह कानून लागू हो, तब वे इसकी वैधता को चुनौती दे सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. क्या अब मूवी टिकट सस्ते हो जाएंगे?
अदालत ने अतिरिक्त 2% वृद्धि को रोक दिया है, जिसका अर्थ है कि फिलहाल इस विशिष्ट कल्याण उपकर के कारण टिकट की कीमतों में वृद्धि नहीं होगी।
2. क्या सरकार भविष्य में इस उपकर को लागू कर सकती है?
हाँ, सरकार अधिनियम को लागू करने के लिए अधिसूचना जारी कर सकती है, हालांकि सिनेमा संघ उस समय कानून की वैधता को फिर से चुनौती दे सकते हैं।