छत्तीसगढ़ की एक अदालत ने कन्या भोज के पवित्र दिन अपनी ही 6 वर्षीय भतीजी के साथ दुष्कर्म और हत्या करने वाले व्यक्ति को 'दुर्लभ से दुर्लभतम' श्रेणी में रखते हुए दो बार मौत की सजा सुनाई है।

  • दूर्ग की विशेष POCSO अदालत ने आरोपी चाचा को दुष्कर्म और हत्या के लिए दोहरी मौत की सजा सुनाई।
  • अपराध कन्या भोज के दिन किया गया था, जिसे अदालत ने अत्यंत घृणित और अमानवीय माना।
  • पीड़ित परिवार को 7 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया गया है।

छत्तीसगढ़ के दुर्ग में स्थित एक सत्र न्यायालय ने एक ऐसे मामले में कड़ा फैसला सुनाया है जिसने मानवता को शर्मसार कर दिया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अनीश दुबे ने एक व्यक्ति को उसकी अपनी 6 वर्षीय भतीजी के साथ दुष्कर्म और उसकी हत्या करने के लिए दो बार मृत्युदंड की सजा सुनाई है। अदालत ने इस मामले को 'दुर्लभ से दुर्लभतम' (Rarest of Rare) श्रेणी में रखा है, क्योंकि यह अपराध राम नवमी के पवित्र अवसर पर किया गया था।

मामले के विवरण के अनुसार, घटना के दिन हिंदू परंपरा के अनुसार 'कन्या भोज' का आयोजन किया गया था, जिसमें छोटी बच्चियों को देवी दुर्गा का स्वरूप मानकर पूजा जाता है। पीड़िता उत्साहपूर्वक तैयार होकर अपनी दादी के घर गई थी, लेकिन वहीं उसके अपने सगे चाचा ने उसके साथ हैवानियत की। कोर्ट ने टिप्पणी की कि जब परिवार के सदस्य ही बच्चों के लिए खतरा बन जाएं, तो समाज में बच्चियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह फैसला भारतीय न्यायपालिका के उस सख्त रुख को दर्शाता है जहाँ पारिवारिक विश्वास के उल्लंघन को और अधिक गंभीर अपराध माना जा रहा है। POCSO अधिनियम के बावजूद बच्चों के खिलाफ अपराधों में वृद्धि एक चिंताजनक संकेत है, और इस तरह के कड़े दंड भविष्य के अपराधियों के लिए एक निवारक (deterrent) के रूप में कार्य कर सकते हैं।

"जब रक्षक ही भक्षक बन जाए, तो समाज की नैतिक नींव हिल जाती है; यह सजा केवल एक व्यक्ति को दंडित करना नहीं, बल्कि समाज को एक कड़ा संदेश देना है।"

अभियोजन पक्ष ने बताया कि अप्रैल 2025 में दर्ज FIR के अनुसार, बच्ची के लापता होने के बाद उसकी तलाश की गई और अंततः उसका शव एक खड़ी कार के अंदर मिला। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गंभीर आंतरिक चोटों और यौन शोषण की पुष्टि हुई। आरोपी ने सबूत मिटाने के लिए शव को कार में छिपाने की कोशिश की थी।

अदालत ने 2011 के निर्भया मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि POCSO अधिनियम और उसके संशोधनों का उद्देश्य ऐसे अपराधों को कम करना था, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि ये मामले घट नहीं रहे हैं। कोर्ट ने यह भी माना कि केवल हिरासत में रखना अपराधियों की आपराधिक प्रवृत्ति को कम करने के लिए पर्याप्त नहीं है।

क्या आप जानते हैं?: POCSO अधिनियम (Protection of Children from Sexual Offences Act) 2012 में पारित किया गया था ताकि बच्चों को यौन शोषण और पोर्नोग्राफी से बचाने के लिए एक विशेष कानूनी ढांचा प्रदान किया जा सके।

Frequently Asked Questions

1. कोर्ट ने इस मामले को 'दुर्लभ से दुर्लभतम' क्यों माना?
क्योंकि अपराध एक पवित्र धार्मिक त्यौहार (कन्या भोज) के दिन किया गया था और अपराधी पीड़िता का अपना सगा संबंधी (चाचा) था।

2. पीड़ित परिवार को क्या सहायता दी गई?
अदालत ने पीड़ित परिवार को मानसिक आघात और क्षति के लिए पीड़ित मुआवजा योजना के तहत 7 लाख रुपये देने का निर्देश दिया है।