दिल्ली उच्च न्यायालय ने ओलंपियन विनेश फोगाट की उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें उन्होंने भारतीय कुश्ती संघ (WFI) के पदक जीतने के नियमों से छूट मांगी थी। कोर्ट ने कहा कि ऐसा करना अन्य एथलीटों के साथ 'अन्याय' होगा।
- दिल्ली हाईकोर्ट ने विश्व चैंपियनशिप ट्रायल के लिए WFI के पदक मानदंडों को दरकिनार करने की विनेश फोगाट की मांग ठुकराई।
- कोर्ट ने कहा कि केवल एक खिलाड़ी को छूट देना देश भर के अन्य एथलीटों के साथ अनुचित होगा।
- विनेश फोगाट वर्तमान में WFI द्वारा शुरू की गई अनुशासनात्मक कार्यवाही और कारण बताओ नोटिस का सामना कर रही हैं।
- अदालत अब 29 सितंबर को WFI की चयन नीति की वैधता पर सुनवाई करेगी।
ओलंपियन पहलवान विनेश फोगाट के लिए एक बड़ा कानूनी झटका सामने आया है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने उन्हें भारतीय कुश्ती संघ (WFI) के चयन मानदंडों से छूट देने से इनकार कर दिया है। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने स्पष्ट किया कि यदि फोगाट को बिना पदक जीते चयन ट्रायल में भाग लेने की अनुमति दी जाती है, तो यह अन्य एथलीटों के साथ भेदभाव होगा।
विवाद की जड़ WFI की वह नीति है, जिसके अनुसार केवल उन्हीं पहलवानों को 14 सितंबर को होने वाले सीनियर वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप चयन ट्रायल में बैठने की अनुमति है, जिन्होंने 2025 और 2026 में पदक जीते हैं। विनेश फोगाट, जो दिसंबर 2024 से मातृत्व अवकाश (maternity break) सहित ब्रेक पर थीं, ने तर्क दिया कि यह नीति उन्हें 'निशाना' बनाने के लिए बनाई गई है और इससे उनका अंतरराष्ट्रीय करियर खत्म हो सकता है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, यह फैसला खेल प्रशासन की कठोरता और व्यक्तिगत अधिकारों के बीच के संघर्ष को दर्शाता है। अदालत ने संकेत दिया है कि जब तक पूरी नीति को अवैध घोषित नहीं किया जाता, तब तक किसी भी खिलाड़ी को, चाहे वह कितनी भी प्रसिद्ध क्यों न हो, नियमों से ऊपर नहीं रखा जा सकता। यह अन्य एथलीटों के लिए एक संदेश है कि चयन प्रक्रिया में समानता सर्वोपरि है।
न्यायालय ने टिप्पणी की कि ऐसी राहत देना 'पेंडोरा बॉक्स' (Pandora's box) खोलने जैसा होगा, जिससे देश भर के अन्य खिलाड़ी भी इसी तरह की छूट की मांग करने लगेंगे। जस्टिस शर्मा ने तर्क दिया कि नीति की वैधता की जांच किए बिना इस स्तर पर कोई विशेष निर्देश जारी नहीं किया जा सकता।
न्यायपालिका खेल निकायों के तकनीकी चयन मानदंडों में तब तक हस्तक्षेप करने से बचती है जब तक कि दुर्भावना या संवैधानिक उल्लंघन का स्पष्ट प्रमाण न हो।
मामले को और जटिल बनाते हुए, WFI ने बताया कि फोगाट के खिलाफ मई और जून में जारी दो कारण बताओ नोटिसों के आधार पर अनुशासनात्मक कार्यवाही चल रही है। संघ का आरोप है कि विनेश ने सुनवाई के तीन अवसरों का लाभ नहीं उठाया और इसके बजाय अनुशासन समिति की संरचना पर सवाल उठाए।
जहां विनेश ने तर्क दिया कि वह एक एथलीट के रूप में 'खत्म' हो रही हैं, वहीं WFI ने जवाब दिया कि वह राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में पदक जीतकर फिर से चयन ट्रायल तक 'वापस climb' कर सकती हैं।
| पहलू | विनेश फोगाट का पक्ष | WFI का पक्ष |
|---|---|---|
| चयन मानदंड | भेदभावपूर्ण और उन्हें टारगेट करने वाला। | सभी एथलीटों के लिए समान रूप से लागू। |
| करियर पर प्रभाव | दावा है कि करियर समाप्त हो जाएगा। | राज्य/राष्ट्रीय पदक जीतकर वापसी संभव। |
| अनुशासनात्मक कार्रवाई | समिति की संरचना पर आपत्ति। | सुनवाई के अवसरों की अनदेखी का आरोप। |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: कोर्ट ने छूट देने से क्यों मना किया?
कोर्ट का मानना था कि विनेश को विशेष छूट देना अन्य एथलीटों के साथ अन्याय होगा और इससे कानूनी याचिकाओं की बाढ़ आ जाएगी।
प्रश्न 2: WFI की नीति की वैधता पर फैसला कब आएगा?
दिल्ली उच्च न्यायालय 29 सितंबर को चयन नीति की वैधता और लागू होने के बड़े मुद्दे पर सुनवाई करेगा।