अंतरराष्ट्रीय कस्टडी विवाद में फंसी एक माँ और उसके दो साल के बेटे को आधी रात को पुलिस स्टेशन बुलाने के मामले में गुजरात हाईकोर्ट ने हस्तक्षेप किया है और CCTV फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश दिया है।
- गुजरात हाईकोर्ट ने पुलिस स्टेशन और निवास के CCTV फुटेज को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया।
- माँ का आरोप है कि बिना किसी अदालती आदेश के उन्हें आधी रात को थाने बुलाया गया।
- यह मामला ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले NRI माता-पिता के बीच बच्चे की कस्टडी से जुड़ा है।
गुजरात हाईकोर्ट ने एक संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय बाल कस्टडी विवाद में पुलिस की कथित मनमानी पर कड़ा रुख अपनाया है। यह हस्तक्षेप तब हुआ जब एक माँ, जो अपने दो साल के बेटे के साथ ऑस्ट्रेलिया से भारत आई थी, ने हलफनामा दायर कर दावा किया कि उसे बुधवार की आधी रात को नवसारी के एक पुलिस स्टेशन में बुलाया गया था।
यह मामला एक बंदी प्रत्यक्षीकरण (habeas corpus) याचिका से जुड़ा है, जिसे ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले पिता ने दायर किया था। पिता ऑस्ट्रेलियाई अदालतों द्वारा दिए गए मुलाकात और अस्थायी कस्टडी के आदेशों को लागू करवाना चाहते हैं। उन्होंने अदालत को बताया कि भारत आने के बाद से वह अपने बेटे से न तो मिल पाए हैं और न ही बात कर पाए हैं। पहले अदालत ने व्हाट्सएप वीडियो कॉल के माध्यम से पिता-पुत्र की बातचीत कराई थी।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, यह मामला अंतरराष्ट्रीय निजी कानून और स्थानीय पुलिस प्रक्रिया के बीच के टकराव को दर्शाता है। एक महिला और छोटे बच्चे को आधी रात को थाने बुलाना न्यायिक प्रोटोकॉल का गंभीर उल्लंघन प्रतीत होता है। यह मामला इस बात का उदाहरण है कि कैसे लंबित मुकदमों के दौरान पुलिस प्रशासन को अपनी सीमाओं में रहना चाहिए ताकि नागरिक अधिकारों का हनन न हो।
जस्टिस गीता गोपी और जस्टिस एल एस पिर्जादा की खंडपीठ के समक्ष प्रस्तुत हलफनामे के अनुसार, 8 सितंबर की रात करीब 10:30 बजे पुलिस कर्मी माँ के घर पहुँचे। रात 11:45 बजे तक चर्चा के बाद, पुलिस ने कथित तौर पर उन्हें 'दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने' के लिए थाने चलने का दबाव बनाया। माँ रात 1 बजे तक थाने में रही और तब छोड़ी गई जब उसने आश्वासन दिया कि वह अगले दिन हाईकोर्ट में उपस्थित होगी।
"एक महिला और नाबालिग बच्चे को आधी रात के समय पुलिस स्टेशन बुलाना मानक संचालन प्रक्रियाओं और मौलिक अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है।"
हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि 8 सितंबर की रात 10:00 बजे से 9 सितंबर की रात 1:30 बजे तक के नवसारी पुलिस स्टेशन के सभी CCTV फुटेज सुरक्षित रखे जाएं और उन्हें भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65B के प्रमाण पत्र के साथ पेन ड्राइव या सीडी में प्रस्तुत किया जाए। अदालत ने माँ के घर पर लगे CCTV फुटेज को भी सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है।
ऐतिहासिक रूप से, अंतरराष्ट्रीय बाल अपहरण और कस्टडी के मामले अत्यंत जटिल होते हैं। जब एक अभिभावक बच्चे को दूसरे देश ले जाता है, तो अदालतों को विदेशी क्षेत्राधिकार के आदेशों और 'बच्चे के सर्वोत्तम हित' के बीच संतुलन बनाना पड़ता है। इस मामले में, गुजरात हाईकोर्ट पिता के मिलन के अधिकार और माँ की पुलिस उत्पीड़न से सुरक्षा के अधिकार के बीच संतुलन बना रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: अदालत ने CCTV फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश क्यों दिया?
अदालत यह सुनिश्चित करना चाहती है कि क्या पुलिस ने वास्तव में माँ और बच्चे को आधी रात को मजबूरन थाने बुलाया था और इस प्रक्रिया में किसी नियम का उल्लंघन तो नहीं हुआ।
प्रश्न 2: इस संदर्भ में बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) याचिका क्या है?
यह एक कानूनी उपाय है जिसके जरिए पिता ने अदालत से मांग की है कि बच्चे को अदालत के सामने पेश किया जाए, क्योंकि उनका दावा है कि बच्चे को अवैध रूप से उनसे दूर रखा जा रहा है।