इंडिया हैबिटेट सेंटर (IHC) आगामी 18 से 27 सितंबर तक एक भव्य थिएटर फेस्टिवल की मेजबानी करेगा। यह महोत्सव मानवीय संवेदनाओं, मानसिक स्वास्थ्य और सांस्कृतिक विरासत को मंच पर जीवंत करेगा।

  • 18 से 27 सितंबर तक इंडिया हैबिटेट थिएटर फेस्टिवल 2026 का आयोजन।
  • हिंदी, अंग्रेजी, तमिल और पंजाबी भाषाओं में कुल 12 नाटकों का मंचन।
  • न्यूरोडायवर्जेंट बच्चों और डिमेंशिया जैसे गंभीर सामाजिक मुद्दों पर आधारित नाटक।

भारत की राजधानी दिल्ली के प्रतिष्ठित इंडिया हैबिटेट सेंटर (IHC) में एक बार फिर कला और भावनाओं का संगम होने जा रहा है। 18 से 27 सितंबर तक चलने वाले 'इंडिया हैबिटेट थिएटर फेस्टिवल 2026' में कुल नौ मुख्यधारा के प्रोडक्शन और तीन समकालीन नाटकों का प्रदर्शन किया जाएगा। यह महोत्सव केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि मानवीय अस्तित्व के गहरे पहलुओं—जीवन, मृत्यु और उनके बीच के संघर्ष—को तलाशने का एक प्रयास है।

IHC के निदेशक प्रोफेसर डॉ. के.जी. सुरेश ने इस वर्ष के उत्सव को "अब तक का सबसे मानवीय" बताया है। उनके अनुसार, इस बार के नाटकों में कला और गति के माध्यम से जीवन के उन हिस्सों को उकेरा गया है जिन्हें अक्सर समाज अनदेखा कर देता है। महोत्सव की शुरुआत मनीष वर्मा द्वारा लिखित और निर्देशित नाटक 'डांसिंग विद डैड' से होगी, जो एक न्यूरोडायवर्जेंट लड़के और उसके एकल पिता के संघर्षपूर्ण लेकिन प्रेमपूर्ण संबंधों को दर्शाता है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि समकालीन भारतीय थिएटर अब केवल राजनीतिक या सामाजिक व्यंग्य तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह मानसिक स्वास्थ्य और संज्ञानात्मक विविधताओं (Cognitive Diversity) जैसे संवेदनशील विषयों की ओर मुड़ रहा है। यह बदलाव दर्शाता है कि कला अब समाज के सबसे हाशिए पर खड़े लोगों को मुख्यधारा की चर्चा में लाने का माध्यम बन रही है।

महोत्सव के अन्य आकर्षणों में आकाश खुराना का नाटक 'द ट्रेजेडी ऑफ हैम मैकलेयर' शामिल है, जो डिमेंशिया से जूझ रहे एक शेक्सपियरियन अभिनेता की त्रासदी और उसके देखभाल करने वालों (Caregivers) की चुनौतियों को उजागर करता है। इसके अलावा, सूरज नम्बियार द्वारा निर्देशित 'सिलप्पतिकारम' प्राचीन तमिल महाकाव्य को कुटियाट्टम की शब्दावली में प्रस्तुत करेगा, जबकि पीयल भट्टाचार्य का 'भासाभारतम' भासा के कालजयी नाटकों को पुनर्जीवित करेगा।

"थिएटर वह दर्पण है जो हमें न केवल समाज का, बल्कि अपनी आत्मा के उन अंधेरे कोनों का भी दर्शन कराता है जिन्हें हम अक्सर छिपाते हैं।"

कार्यक्रम की विविधता पर बात करते हुए IHC के प्रोग्राम हेड सैयद शादाब हुसैन ने कहा कि इस वर्ष का चयन विविधता, भाषा और आधुनिक थिएटर की कल्पनाओं को ध्यान में रखकर किया गया है। महोत्सव में 'ब्रेस्ट ऑफ लक', 'अम्ब दा बूटा' और 'द क्वीन' जैसे नाटक भी शामिल हैं, जो विभिन्न सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्यों को मंच प्रदान करेंगे।

नाटक का नाम मुख्य विषय भाषा/शैली
डांसिंग विद डैड न्यूरोडायवर्सिटी और पितृत्व इंटरडिसिप्लिनरी
द ट्रेजेडी ऑफ हैम मैकलेयर डिमेंशिया और देखभाल शेक्सपियरियन ड्रामा
सिलप्पतिकारम प्राचीन तमिल महाकाव्य कुटियाट्टम
क्या आप जानते हैं?: कुटियाट्टम दुनिया की सबसे पुरानी जीवित संस्कृत थिएटर परंपराओं में से एक है, जिसे यूनेस्को द्वारा 'मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत' घोषित किया गया है।

Frequently Asked Questions

1. इंडिया हैबिटेट थिएटर फेस्टिवल 2026 कब से कब तक चलेगा?
यह महोत्सव 18 सितंबर से 27 सितंबर 2026 तक आयोजित किया जाएगा।

2. इस महोत्सव में कौन-कौन सी भाषाएं शामिल हैं?
इस वर्ष के नाटकों का मंचन हिंदी, अंग्रेजी, तमिल और पंजाबी भाषाओं में किया जाएगा।