दिल्ली के नए अर्बन एक्सटेंशन रोड-II (UER-II) पर उद्घाटन के एक साल के भीतर कई घातक दुर्घटनाएं हुई हैं। विशेषज्ञों ने डिजाइन की खामियों, गलत दिशा में ड्राइविंग और असुरक्षित प्रवेश बिंदुओं को मुख्य कारण बताया है।

  • UER-II कॉरिडोर पर एक साल के भीतर कई घातक सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं।
  • गलत दिशा में ड्राइविंग (Wrong-side driving) और तेज रफ्तार प्रमुख जोखिम बने हुए हैं।
  • ट्रैफिक पुलिस अब कैमरा-आधारित डिजिटल प्रवर्तन (Digital Enforcement) पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
  • सड़क सुरक्षा ऑडिट में डिजाइन की खामियों और पैदल यात्रियों की सुरक्षा पर चिंता जताई गई है।

दिल्ली के 75 किलोमीटर लंबे अर्बन एक्सटेंशन रोड-II (UER-II) को केंद्रीय दिल्ली से भारी ट्रैफिक को हटाने के उद्देश्य से बनाया गया था। हालांकि, इसके उद्घाटन के महज एक साल के भीतर ही इस हाई-स्पीड कॉरिडोर पर घातक और गंभीर दुर्घटनाओं की एक श्रृंखला देखने को मिली है। विशेषज्ञों का कहना है कि विलय बिंदुओं (merging points) पर अचानक गति परिवर्तन, प्रतिबंधित वाहनों का निरंतर आवागमन और गलत दिशा में ड्राइविंग इस मार्ग पर सुरक्षा के लिए सबसे बड़े खतरे हैं।

दुर्घटनाओं का सिलसिला भयावह रहा है। जनवरी में झरोड़ा कलां के पास घने कोहरे के बीच एक चेन कोलिजन में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि फरवरी में एक मोटरसाइकिल सवार की जान चली गई। मई में बावना के पास एक महिला पैदल यात्री दुर्घटना का शिकार हुई, और जुलाई में अलीपुर के पास एक टेम्पो फ्लाईओवर के पिलर से टकरा गया, जिससे तीन लोगों की मौत हो गई।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि बुनियादी ढांचे का विकास केवल निर्माण तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि सुरक्षा मानकों का पालन करना भी अनिवार्य है। यदि UER-II जैसे महत्वपूर्ण कॉरिडोर पर सुरक्षा की अनदेखी की जाती है, तो यह भविष्य के शहरी राजमार्गों के लिए एक खतरनाक मिसाल पेश कर सकता है।

हाई-स्पीड कॉरिडोर पर मानवीय हस्तक्षेप की सीमाओं को देखते हुए, डिजिटल और कैमरा-आधारित प्रवर्तन ही एकमात्र प्रभावी समाधान है।

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने स्वीकार किया है कि इस मार्ग पर दुर्घटनाओं में वृद्धि हुई है। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (यातायात) विजयंता गोयल आर्य ने बताया कि ऐसे उच्च गति वाले क्षेत्रों में पारंपरिक पुलिस चौकियां लगाना कठिन है, इसलिए विभाग अब 'डिजिटल प्रवर्तन' की ओर बढ़ रहा है। पुलिस अब NHAI के कैमरा नेटवर्क के साथ अपने प्लेटफॉर्म को एकीकृत कर रही है, जिससे यातायात उल्लंघन करने वालों को सीधे ट्रैक किया जा सकेगा।

सड़क सुरक्षा ऑडिट में पाया गया है कि इस मार्ग पर प्रवेश और निकास बिंदु काफी भ्रमित करने वाले हैं, जो ड्राइवरों को गलत दिशा में गाड़ी चलाने के लिए उकसाते हैं। इसके अलावा, अपर्याप्त रोशनी और पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित रास्तों की कमी ने जोखिम को और बढ़ा दिया है।

Historical Background

UER-II को दिल्ली के मास्टर प्लान के तहत एक महत्वपूर्ण लिंक के रूप में विकसित किया गया था ताकि बाहरी दिल्ली और हरियाणा को जोड़ने वाले ट्रैफिक को शहर के भीतर प्रवेश करने से रोका जा सके। हालांकि, शहरी बस्तियों के बीच से गुजरने के कारण स्थानीय और अंतर-शहर यातायात का टकराव एक बड़ी चुनौती बन गया है।

Did You Know?: दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर कैमरा एकीकरण के बाद केवल एक महीने में 10,106 ओवरस्पीडिंग उल्लंघन पकड़े गए हैं।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: UER-II पर दुर्घटनाओं का मुख्य कारण क्या है?
उत्तर: मुख्य कारणों में गलत दिशा में ड्राइविंग, तेज रफ्तार, डिजाइन की खामियां और विलय बिंदुओं पर अचानक गति परिवर्तन शामिल हैं।

प्रश्न 2: पुलिस इन हादसों को रोकने के लिए क्या कर रही है?
उत्तर: पुलिस अब NHAI के साथ मिलकर कैमरा-आधारित डिजिटल प्रवर्तन और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) तकनीक का उपयोग कर रही है।