दक्षिण पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन में एक पांच मंजिला हॉस्टल ढहने से सात लोगों की मौत हो गई। पुलिस ने इस मामले में तीन परिवार के सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जिनका दावा है कि वे केवल बेसमेंट में पानी के रिसाव (सीपेज) को ठीक करने का काम कर रहे थे।
- सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत गिरने से कम से कम 7 लोगों की मौत।
- गुप्ता परिवार के तीन सदस्यों—हरिराम, उर्मिला और महेश गुप्ता को गिरफ्तार किया गया।
- आरोपियों का दावा है कि बेसमेंट में सीपेज ठीक करने के लिए निर्माण सामग्री भरी जा रही थी।
- पुलिस जांच में पाया गया कि इमारत में अवैध रूप से तीन अतिरिक्त मंजिलें जोड़ी गई थीं।
दक्षिण पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार को हुए भीषण हादसे ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। एक पांच मंजिला इमारत, जो छात्रों के लिए पीजी (पेइंग गेस्ट) के रूप में इस्तेमाल की जा रही थी, अचानक ढह गई। इस दर्दनाक घटना में अब तक कम से कम सात लोगों के मारे जाने की पुष्टि हो चुकी है। पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी के रूप में गुप्ता परिवार के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस पूछताछ के दौरान गिरफ्तार आरोपियों—81 वर्षीय हरिराम गुप्ता, उनकी पत्नी उर्मिला गुप्ता और उनके बेटे महेश गुप्ता—ने बताया कि वे इमारत के बेसमेंट में हो रहे पानी के रिसाव (सीपेज) और जलभराव की समस्या को ठीक करने का काम कर रहे थे। आरोपियों के अनुसार, छात्रों ने पिछले साल मानसून के दौरान बेसमेंट में सीपेज की शिकायत की थी, जिसे देखते हुए उन्होंने मरम्मत का निर्णय लिया। उन्होंने पुलिस को बताया कि मजदूरों को बेसमेंट के एक हिस्से को निर्माण सामग्री से भरने का निर्देश दिया गया था, लेकिन जैसे ही दूसरे हिस्से में काम शुरू हुआ, पूरी संरचना ढह गई।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि शहरी बुनियादी ढांचे और अनियंत्रित निर्माण कार्यों की गंभीर लापरवाही का परिणाम है। बेसमेंट में भारी निर्माण सामग्री भरना और बिना स्ट्रक्चरल ऑडिट के मरम्मत कार्य करना इमारत की नींव को कमजोर करने का मुख्य कारण बना।
'अवैध निर्माण और सुरक्षा मानकों की अनदेखी दिल्ली के घनी आबादी वाले इलाकों में मौत का जाल बन रही है।'
जांच के दौरान पुलिस को कई चौंकाने वाले तथ्य मिले हैं। बिजली के बिलों के विश्लेषण से पता चला है कि बिजली का कनेक्शन केवल दो मंजिलों के लिए था, लेकिन इमारत को अवैध रूप से तीन और मंजिलें बढ़ाकर पांच मंजिला बना दिया गया था। इसके अलावा, पीजी के रेंट एग्रीमेंट में एक विवादित क्लॉज भी पाया गया है, जिसमें लिखा था कि 'किसी भी दुर्घटना या जोखिम के लिए पीजी प्रबंधन जिम्मेदार नहीं होगा'। यह छात्रों की सुरक्षा के साथ एक बड़ा खिलवाड़ है।
पुलिस अब 'हॉस्टल डेज़' (Hostel Daze) नामक संस्था के संचालकों और उस ठेकेदार की भूमिका की भी जांच कर रही है जो साइट पर जिम बनाने के लिए निर्माण कार्य का प्रबंधन कर रहा था। बचाव अभियान अभी भी जारी है और मलबे के नीचे दबे अन्य लोगों की तलाश की जा रही है।
Frequently Asked Questions
1. क्या आरोपियों ने सीपेज की समस्या की बात स्वीकार की है?
हाँ, आरोपियों ने पुलिस को बताया कि वे छात्रों की शिकायत के बाद बेसमेंट में सीपेज ठीक करने के लिए मरम्मत कार्य कर रहे थे।
2. इमारत के स्वामित्व को लेकर क्या स्थिति है?
पुलिस के अनुसार, संपत्ति उर्मिला गुप्ता के नाम पर पंजीकृत है, जबकि बिजली कनेक्शन हरिराम और महेश के नाम पर हैं।