दिल्ली सरकार ने 108 सरकारी स्कूल भवनों को ‘असुरक्षित’ घोषित कर संरचनात्मक ऑडिट का आदेश दिया है। इनमें से सात स्कूलों को निकट भविष्य में ध्वस्त करके आधुनिक G+4 इमारतें बनायीं जाएँगी, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता और सुरक्षा दोनों में सुधार होगा।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • दिल्ली के 108 सरकारी स्कूल भवनों को असुरक्षित माना गया
  • 54 इमारतें गंभीर क्षति में, 7 को ध्वस्त करने की मंजूरी
  • डिजिटल प्रोफ़ाइलिंग और संरचनात्मक ऑडिट से आगे पुनर्निर्माण योजना

दिल्ली सरकार ने हाल ही में एक विस्तृत सर्वेक्षण के बाद 108 सरकारी स्कूल इमारतों को ‘असुरक्षित’ और ‘खतरे में’ घोषित किया। यह संख्या राजधानी के कुल 5,556 मान्यता प्राप्त स्कूलों का लगभग दस प्रतिशत है, जो शहरी शिक्षा बुनियादी ढाँचे की दशा को उजागर करती है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस मुद्दे को प्राथमिकता देते हुए शिक्षा विभाग और सार्वजनिक कार्य विभाग (PWD) को तुरंत संरचनात्मक ऑडिट करने का निर्देश दिया।

पृष्ठभूमि और ऐतिहासिक संदर्भ

कई स्कूल भवन 30‑40 साल पहले बनाये गये थे, जबकि कुछ नई इमारतें भी निर्माण के चार‑पाँच साल बाद ही दरार, फटाव और जल निकासी संबंधी समस्याओं से जूझ रही हैं। पिछले पाँच वर्षों में दिल्ली में कई स्कूल‑संबंधी सुरक्षा घटनाओं ने इस दिशा में सरकारी कार्रवाई को तेज़ किया है, जिससे अब संरचनात्मक स्थिरता की जाँच को अनिवार्य माना जा रहा है।

ऑडिट प्रक्रिया और नियामक मंजूरी

शिक्षा विभाग ने डिजिटल प्रोफ़ाइलिंग के तहत प्रत्येक स्कूल की छत, दीवार, फर्श, विद्युत और अग्नि सुरक्षा सहित समग्र स्थिति को दर्ज किया है। PWD के इंजीनियरों ने 54 इमारतों को ‘बहुत खराब स्थिति’ में वर्गीकृत किया, जबकि 7 इमारतों को लेफ्टिनेंट गवर्नर की मंजूरी के बाद ध्वस्त करने की स्वीकृति मिली। ऑडिट रिपोर्ट के बाद लागत अनुमान तैयार कर, आवश्यक तकनीकी सिफ़ारिशें और कानूनी अनुमोदन प्राप्त कर ध्वस्त करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

भविष्य की योजना और सामाजिक प्रभाव

ध्वस्त किए जाने वाले स्कूलों में CM SHRI स्कूल, चिल्ला गांव; सरकारी गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल, जासोला; सर्वोद्या कन्या विद्यालय, कराला; आदि शामिल हैं। सरकार ने कहा है कि पहले चरण में 54 इमारतों को ब्लॉक‑वाइज और रात‑रात हटाया जाएगा, ताकि छात्रों की पढ़ाई में न्यूनतम व्यवधान हो। प्रभावित छात्रों को निकटवर्ती स्कूलों में स्थानांतरित किया जाएगा या अस्थायी क्लासरूम की व्यवस्था की जाएगी।

नवीनतम बुनियादी ढाँचा और समावेशी शिक्षा

डिजिटल प्रोफ़ाइलिंग के परिणामस्वरूप एक व्यापक डेटाबेस तैयार किया जाएगा, जो भविष्य में साक्ष्य‑आधारित योजना, संसाधन आवंटन और प्राथमिकता निर्धारण को सुदृढ़ करेगा। ध्वस्त के बाद, PWD G+4, भूकंप‑प्रतिरोधी और स्थायी स्कूल इमारतें बनाएगा, जिससे छात्र‑क्लासरूम अनुपात सुधरेगा, भीड़भाड़ घटेगी और विशेष क्षमताओं वाले बच्चों के लिए सुलभता मानकों को भी पूरा किया जाएगा।