केरल विश्वविद्यालय ने प्रख्यात संस्कृत विद्वान टी. गणपति शास्त्री की शताब्दी स्मृति में एक विशेष अकादमिक चेयर की स्थापना की घोषणा की। यह चेयर प्राचीन पर्णपत्र पांडुलिपियों के अध्ययन और डिजिटलकरण में युवा पीढ़ी को प्रशिक्षण देने के लिए बनाई जाएगी।

मुख्य बिंदु

  • केरल विश्वविद्यालय ने टी. गणपतिशास्त्री की शताब्दी पर गणपतिशास्त्री चेयर स्थापित की।
  • चेयर पर्णपत्र पांडुलिपियों के शोध और डिजिटलकरण पर केंद्रित होगी।
  • घोषणा राष्ट्रीय सेमिनार के दौरान उपकुलपति मोहना‍न कुन्नुम्मल ने की।

घोषणा और पृष्ठभूमि

केरल विश्वविद्यालय ने 3 अगस्त, 2026 को कालयवत्तोम कैंपस में आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार के दौरान गणपतिशास्त्री चेयर की स्थापना की घोषणा की। उपकुलपति (इन-चार्ज) मोहना‍न कुन्नुम्मल ने यह घोषणा पांडुलिपि पुस्तकालय और ओरिएंटल रिसर्च इंस्टीट्यूट के संयुक्त कार्यक्रम के उद्घाटन के साथ की।

गणपतिशास्त्री का योगदान

प्रसिध्द संस्कृत विद्वान और पांडुलिपि विज्ञान के विशेषज्ञ टी. गणपतिशास्त्री ने भास के नाटकों और कौटिल्य के अर्थशास्त्र जैसे दुर्लभ भारतीय ग्रंथों को पुनः प्राप्त कर विश्व के सामने प्रस्तुत किया। उनके कार्यों ने भारतीय शास्त्रीय साहित्य की समझ को नई दिशा दी।

चेयर के उद्देश्य

गणपतिशास्त्री चेयर का मुख्य लक्ष्य युवा शोधकर्ताओं को पर्णपत्र पांडुलिपियों के संरक्षण, लिपि-पठन और आधुनिक डिजिटलकरण तकनीकों में विशेष प्रशिक्षण प्रदान करना है। यह पहल प्राचीन ग्रंथों की पहुँच को बढ़ाने और डिजिटल अभिलेखों के निर्माण को तेज करने के लिए बनाई गई है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

टी. गणपतिशास्त्री (1926‑2026) ने अपने जीवनकाल में 1500 से अधिक पांडुलिपियों का अध्ययन किया और कई अनजाने ग्रंथों को प्रकाशित किया। उनका कार्य न केवल शैक्षणिक जगत में बल्कि भारतीय सांस्कृतिक धरोहर की सुरक्षा में भी अभूतपूर्व माना जाता है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that preserving palm‑leaf manuscripts and digitising them not only safeguards India’s ancient knowledge but also creates new research opportunities for global scholars, positioning Kerala University as a leader in manuscript studies.

"Digital preservation of palm‑leaf manuscripts is essential for keeping India’s scholarly legacy alive for future generations," says Dr. Ananya Rao, manuscript conservation expert.
Did You Know?: भारत में बची हुई सबसे पुरानी पर्णपत्र पांडुलिपि 2वीं शताब्दी ईस्वी की है, जो आज भी कERAL विश्वविद्यालय में संरक्षित है।

Frequently Asked Questions

Q1: गणपतिशास्त्री चेयर किस प्रकार की प्रशिक्षण प्रदान करेगी?
A1: यह चेयर पर्णपत्र पांडुलिपियों के संकलन, लिपि‑पठन, संरक्षण और डिजिटलकरण में व्यावहारिक एवं सैद्धांतिक प्रशिक्षण देगी।

Q2: छात्रों को इस चेयर से कैसे लाभ होगा?
A2: चयनित छात्र अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त प्रमाणपत्र, फंडेड शोध परियोजनाएँ और प्राचीन ग्रंथों तक पहुँच प्राप्त करेंगे।