कर्नाटक में अंडों की बढ़ती कीमतों के कारण मध्याह्न भोजन योजना (मिड-डे मील) के बजट को बढ़ाने की मांग तेज हो गई है। स्कूल शिक्षा मंत्री मधु बंगारप्पा ने विधान परिषद में कहा कि इस मुद्दे पर वित्त विभाग के साथ चर्चा के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

  • कर्नाटक में अंडों की बढ़ती कीमतों के कारण मध्याह्न भोजन योजना के बजट में बढ़ोतरी की मांग की जा रही है।
  • स्कूल शिक्षा मंत्री मधु बंगारप्पा ने पुष्टि की है कि वित्त विभाग के साथ चर्चा के बाद बजट बढ़ाने पर निर्णय लिया जाएगा।
  • प्रक्रिया में बदलाव के कारण देरी से चल रहे स्कूली जूते और मोजे का वितरण 28 अगस्त, 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है।

कर्नाटक में स्कूली बच्चों को दिए जाने वाले मध्याह्न भोजन (मिड-डे मील) योजना के तहत अंडों के आवंटन बजट को बढ़ाने की मांग जोर पकड़ रही है। राज्य के स्कूल शिक्षा और साक्षरता मंत्री मधु बंगारप्पा ने सोमवार को विधान परिषद में माना कि बाजार में अंडों की कीमतों में बढ़ोतरी से योजना के क्रियान्वयन में मुश्किलें आ रही हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस संबंध में वित्त विभाग के साथ चर्चा के बाद उचित निर्णय लिया जाएगा।

कांग्रेस सदस्य रामोजी गौड़ा के एक सवाल का जवाब देते हुए मंत्री ने कीमतों में उतार-चढ़ाव का जिक्र किया। उन्होंने कहा, "मैं इस बात से सहमत हूं कि अंडों की कीमतों में वृद्धि से समस्याएं हो रही हैं। हालांकि कुछ समय पहले एक अंडे की कीमत ₹7.10 थी, लेकिन अगस्त में यह लगभग ₹5.33 से ₹5.93 प्रति अंडा रही है।" वहीं, रामोजी गौड़ा ने दावा किया कि वर्तमान में बाजार में अंडे की कीमत ₹8 से ₹8.50 के बीच है, जबकि सरकार केवल ₹6 प्रति अंडा प्रदान कर रही है। उन्होंने सरकार से मांग की कि इस राशि को बाजार दर के अनुरूप बढ़ाया जाए।

अंडे के वितरण पर प्रभाव और वैकल्पिक व्यवस्था

मंत्री ने स्वीकार किया कि उन जिलों में अंडे का वितरण प्रभावित हुआ है जहां छात्रों की संख्या अधिक है और उनके बीच अंडे की खपत भी ज्यादा है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कुछ बच्चे अपनी धार्मिक मान्यताओं या व्यक्तिगत प्राथमिकताओं के कारण अंडे नहीं खाते हैं और उनके स्थान पर केले या चिक्की का विकल्प चुनते हैं। मंत्री ने कहा, "यह विविधता शिक्षकों को बाजार में कीमतें बढ़ने पर भी आपूर्ति और बजट का प्रबंधन करने में मदद कर रही है।"

सामग्री / मानदंडसरकारी आवंटन / वर्तमान दरबाजार दर / पिछली दर
अंडे की कीमत (प्रति इकाई)₹6.00₹8.00 - ₹8.50
वार्षिक जूता वितरण बजट₹76 करोड़₹116 करोड़

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि विकासशील क्षेत्रों में पोषण सुरक्षा कार्यक्रम मुद्रास्फीति के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होते हैं। जब अंडों जैसे आवश्यक प्रोटीन की बाजार दरें सरकारी आवंटन से अधिक हो जाती हैं, तो बच्चों को मिलने वाले पोषण की गुणवत्ता सीधे प्रभावित होती है। इन सामाजिक कल्याण पहलों की अखंडता को बनाए रखने के लिए गतिशील फंडिंग तंत्र सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है ताकि मुद्रास्फीति का बोझ सीधे बच्चों के पोषण पर न पड़े।

"स्कूली बच्चों के लिए पोषण सुरक्षा तंत्र को लचीले और मुद्रास्फीति-अनुक्रमित बजट के माध्यम से बाजार के उतार-चढ़ाव से सुरक्षित रखा जाना चाहिए ताकि गुणवत्ता से समझौता न हो।"

जूते और मोजे के वितरण में देरी पर स्पष्टीकरण

कांग्रेस सदस्य बिल्किस बानो के एक अन्य सवाल का जवाब देते हुए शिक्षा मंत्री ने बताया कि स्कूली बच्चों को जूते और मोजे का वितरण 28 अगस्त तक पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने देरी का कारण बताते हुए कहा, "प्रक्रिया में बदलाव के कारण आपूर्ति में देरी हुई है। हमने देरी से आपूर्ति करने पर दंड का प्रावधान भी शामिल किया है। कुल 14 लाख जोड़ी जूते-मोजे बांटे जाने हैं।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि जूते और मोजे के वितरण पर सरकार का वार्षिक खर्च ₹116 करोड़ से घटकर ₹76 करोड़ हो गया है, जिससे सरकारी खजाने को राहत मिली है।

क्या आप जानते हैं?: कर्नाटक की मध्याह्न भोजन योजना भारत की सबसे बड़ी योजनाओं में से एक है, जो दैनिक रूप से लाखों छात्रों को भोजन प्रदान करती है। कुपोषण से निपटने के लिए इसमें अंडे को प्रोटीन के मुख्य स्रोत के रूप में शामिल किया गया है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: कर्नाटक में मध्याह्न भोजन कोष बढ़ाने की मांग क्यों की जा रही है?
उत्तर 1: यह मांग इसलिए उठी है क्योंकि बाजार में अंडे की कीमत ₹8 से ₹8.50 तक पहुंच गई है, जबकि सरकार वर्तमान में प्रति अंडा केवल ₹6 आवंटित कर रही है, जिससे स्कूलों को बजट की कमी का सामना करना पड़ रहा है।

प्रश्न 2: स्कूली जूते और मोजे का लंबित वितरण कब तक पूरा होगा?
उत्तर 2: स्कूल शिक्षा मंत्री मधु बंगारप्पा ने घोषणा की है कि 14 लाख जोड़ी जूते और मोजे का वितरण 28 अगस्त, 2026 तक पूरी तरह से संपन्न कर लिया जाएगा।