ओस्मानिया विश्वविद्यालय का EMRC केंद्र आईआईटी बॉम्बे के साथ मिलकर 110 घंटे के उन्नत डिजिटल संस्कृत पाठ विकसित करेगा। शिक्षा मंत्रालय के IKS प्रभाग द्वारा समर्थित यह परियोजना प्राचीन ज्ञान को आधुनिक तकनीक से जोड़ेगी।
- ओस्मानिया विश्वविद्यालय का EMRC केंद्र आईआईटी बॉम्बे के साथ मिलकर 110 घंटे के संस्कृत पाठ विकसित करेगा।
- परियोजना की कुल लागत लगभग ₹70 लाख है, जिसे 440 डिजिटल पाठों में बदला जाएगा।
- AI और उन्नत तकनीकों का उपयोग करके सेवानिवृत्त प्रोफेसरों के ज्ञान को डिजिटल रूप दिया जाएगा।
हैदराबाद स्थित ओस्मानिया विश्वविद्यालय के एजुकेशनल मल्टीमीडिया रिसर्च सेंटर (EMRC) ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। संस्थान को आईआईटी बॉम्बे से एक विशेष परियोजना मिली है, जिसके तहत भारतीय ज्ञान प्रणाली (IKS) प्रभाग, शिक्षा मंत्रालय के मार्गदर्शन में संस्कृत भाषा के ऑनलाइन और डिजिटल पाठ विकसित किए जाएंगे।
यह परियोजना न केवल भाषा के संरक्षण पर केंद्रित है, बल्कि इसे आधुनिक युग के छात्रों के लिए सुलभ बनाने का एक प्रयास है। लगभग ₹70 लाख के बजट वाली इस लघु परियोजना के तहत कुल 110 घंटों की सामग्री तैयार की जाएगी। इस सामग्री को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और अन्य अत्याधुनिक डिजिटल टूल्स की मदद से 440 संक्षिप्त और प्रभावी डिजिटल पाठों में विभाजित किया जाएगा।
परियोजना का कार्यान्वयन और रणनीति
इस परियोजना की सबसे अनूठी विशेषता इसका डेटा संग्रह तरीका है। EMRC की टीम पूरे देश का दौरा करेगी ताकि संस्कृत के सेवानिवृत्त प्रोफेसरों और विषय विशेषज्ञों के ज्ञान को उनके घरों से ही रिकॉर्ड किया जा सके। यह कदम यह सुनिश्चित करता है कि पारंपरिक ज्ञान की शुद्धता बनी रहे और अनुभवी विद्वानों का अनुभव नई पीढ़ी तक पहुंचे।
"प्राचीन संस्कृत ग्रंथों का डिजिटल रूपांतरण केवल अनुवाद नहीं, बल्कि ज्ञान के लोकतंत्रीकरण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।"
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह पहल भारत सरकार के 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020' के लक्ष्यों के अनुरूप है, जो भारतीय भाषाओं और ज्ञान प्रणालियों के एकीकरण पर जोर देती है। जब आईआईटी बॉम्बे जैसी तकनीकी संस्था और ओस्मानिया विश्वविद्यालय जैसा शैक्षणिक केंद्र मिलते हैं, तो यह शिक्षा के क्षेत्र में 'ट्रेडिशनल' और 'टेक्निकल' के बीच के अंतर को पाटता है।
आईआईटी बॉम्बे के एसोसिएट प्रोफेसर पवन कुमार हरि ने स्पष्ट किया कि EMRC का चयन उसके बुनियादी ढांचे, तकनीकी विशेषज्ञता और उत्पादन क्षमताओं के गहन मूल्यांकन के बाद किया गया है। यह दर्शाता है कि विश्वविद्यालय अब केवल डिग्री देने वाले संस्थान नहीं, बल्कि कंटेंट क्रिएशन हब बन रहे हैं।
| विशेषता | पारंपरिक पद्धति | प्रस्तावित डिजिटल पद्धति (EMRC) |
|---|---|---|
| पहुंच | सीमित (कक्षाओं तक) | वैश्विक (ऑनलाइन कोर्स) |
| फॉर्मेट | लंबे व्याख्यान | 440 संक्षिप्त AI-संचालित पाठ |
| स्रोत | किताबें/शिक्षक | विशेषज्ञों के रिकॉर्डेड अनुभव |
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका मुख्य उद्देश्य संस्कृत भाषा के ज्ञान को AI और डिजिटल तकनीक के माध्यम से संरक्षित करना और उसे ऑनलाइन पाठ्यक्रमों के रूप में छात्रों के लिए उपलब्ध कराना है।
प्रश्न 2: इस प्रोजेक्ट में AI का उपयोग कैसे किया जाएगा?
उत्तर: AI का उपयोग 110 घंटे के लंबे वीडियो लेक्चर को 440 छोटे, इंटरैक्टिव और समझने में आसान डिजिटल पाठों में बदलने के लिए किया जाएगा।