AAERI ने 'AAERI Verify' नामक एक नया डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है, जो ऑस्ट्रेलिया में पढ़ने के लिए आवेदन करने वाले भारतीय छात्रों के दस्तावेजों का तुरंत सत्यापन करेगा। यह तकनीक धोखाधड़ी को रोकने और सत्यापन प्रक्रिया को तेज करने के लिए ब्लॉकचेन और डिजिलॉकर का उपयोग करती है।

मुख्य बातें

  • AAERI ने 'AAERI Verify' प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है।
  • यह डिजिलॉकर और ब्लॉकचेन तकनीक का उपयोग करता है।
  • सत्यापन का समय 9 दिनों से घटकर मात्र 2-4 मिनट रह जाएगा।
  • यह फर्जी दस्तावेजों और धोखाधड़ी को रोकने में मदद करेगा।

एसोसिएशन ऑफ ऑस्ट्रेलियन एजुकेशन रिप्रेजेंटेटिव्स इन इंडिया (AAERI) ने एक क्रांतिकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म, 'AAERI Verify' पेश किया है। इस प्लेटफॉर्म का मुख्य उद्देश्य ऑस्ट्रेलिया में उच्च शिक्षा के लिए आवेदन करने वाले भारतीय छात्रों की शैक्षणिक, पहचान और वित्तीय जानकारी की सत्यता की जांच करना है।

नई दिल्ली में आयोजित AAERI के वार्षिक सम्मेलन में, अध्यक्ष निशिधर बोरा और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के तहत राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस डिवीजन (NeGD) के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा इसका अनावरण किया गया। यह कदम अंतरराष्ट्रीय छात्र आवेदनों में बढ़ते फर्जी दस्तावेजों और गलत वित्तीय जानकारी की समस्याओं को हल करने के लिए उठाया गया है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह तकनीक अंतरराष्ट्रीय शिक्षा के क्षेत्र में पारदर्शिता लाने के लिए एक गेम-चेंजर साबित होगी। पारंपरिक रूप से, दस्तावेजों के सत्यापन में 5 से 9 दिन का समय लगता था, लेकिन अब AAERI Verify की मदद से यह प्रक्रिया मात्र 120 से 240 सेकंड में पूरी हो जाएगी।

यह डिजिटल एकीकरण भारतीय छात्रों की विश्वसनीयता को वैश्विक स्तर पर बढ़ाएगा और धोखाधड़ी के जोखिम को लगभग समाप्त कर देगा।

यह प्लेटफॉर्म भारत के डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे, विशेष रूप से DigiLocker का लाभ उठाता है। सत्यापन रिपोर्ट को Avalanche blockchain पर सुरक्षित किया जाता है, जिससे एक ऐसा अपरिवर्तनीय ऑडिट ट्रेल बनता है जिसे विदेशी संस्थान स्वतंत्र रूप से जांच सकते हैं।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

पिछले कुछ वर्षों में, अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों को भारतीय छात्रों के आवेदनों में फर्जी मार्कशीट और गलत वित्तीय दस्तावेजों के कारण बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। इस समस्या के समाधान के लिए भारत सरकार और शिक्षा निकायों ने डिजिटल प्रमाणीकरण की ओर कदम बढ़ाए हैं।

क्या आप जानते हैं?: यह प्लेटफॉर्म ब्लॉकचेन तकनीक का उपयोग करता है, जिसका अर्थ है कि एक बार डेटा दर्ज होने के बाद इसे बदला या मिटाया नहीं जा सकता।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: AAERI Verify का उपयोग कौन कर सकता है?
उत्तर: यह अधिकृत AAERI सदस्य एजेंटों, भागीदार विश्वविद्यालयों और संस्थागत सत्यापनकर्ताओं के लिए उपलब्ध है।

प्रश्न 2: यह प्लेटफॉर्म किन दस्तावेजों को सत्यापित करता है?
उत्तर: यह पहचान, पते, शैक्षणिक रिकॉर्ड और वित्तीय प्रायोजन दस्तावेजों को सत्यापित करता है।