जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) ने उमर खालिद की नई पुस्तक 'फ्रैक्चर्ड कम्युनिटीज' पर चर्चा के लिए निर्धारित ऑडिटोरियम की बुकिंग रद्द कर दी है। प्रशासन ने 'तथ्यों को छिपाने' का आरोप लगाया है, जबकि छात्र संघ ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताया है।

मुख्य बातें

  • JNU ने उमर खालिद की किताब पर होने वाली चर्चा के लिए ऑडिटोरियम की बुकिंग रद्द की।
  • विश्वविद्यालय का आरोप है कि आयोजकों ने कार्यक्रम के बारे में 'पूरे तथ्य' नहीं बताए।
  • JNUSU ने प्रशासन के इस फैसले को गलत बताया और कहा कि कार्यक्रम कहीं भी आयोजित किया जाएगा।
  • उमर खालिद पिछले छह वर्षों से बिना मुकदमे के जेल में हैं।

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) ने एक विवाद खड़ा कर दिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने उमर खालिद की हाल ही में प्रकाशित पुस्तक 'Fractured Communities: Adivasi Histories and the Politics of Power' पर चर्चा के लिए बुक किए गए स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज (SSS) ऑडिटोरियम की बुकिंग को अंतिम समय पर रद्द कर दिया है।

विश्वविद्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक बयान जारी करते हुए कहा कि यह निर्णय 'कार्यक्रम के बारे में पूर्ण तथ्यों के गैर-प्रकटीकरण' के कारण लिया गया है। JNU ने स्पष्ट किया कि अनुमति स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज के डीन द्वारा दी गई थी, जिन्होंने बाद में इस आयोजन को रद्द करने का निर्णय लिया। इस पोस्ट में प्रधानमंत्री कार्यालय और शिक्षा मंत्रालय सहित कई उच्च अधिकारियों को टैग किया गया था।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह घटना अकादमिक स्वतंत्रता और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच बढ़ते तनाव को दर्शाती है। उमर खालिद, जो पिछले छह वर्षों से UAPA के तहत बिना मुकदमे के जेल में हैं, की पीएचडी थीसिस पर आधारित इस पुस्तक पर चर्चा को रोकना, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर एक बड़े सवालिया निशान के रूप में देखा जा रहा है।

प्रशासनिक हस्तक्षेप अक्सर अकादमिक संवाद के लिए एक बड़ी बाधा बन जाता है।

आयोजकों, विशेष रूप से JNUSU (Jawaharlal Nehru University Students’ Union) ने विश्वविद्यालय के दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। JNUSU अध्यक्ष अदिति मिश्रा ने कहा कि उन्होंने सभी प्रक्रियाओं का पालन किया था और ऑडिटोरियम के लिए शुल्क भी भुगतान किया था। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऑडिटोरियम नहीं मिलता है, तो कार्यक्रम परिसर में ही अन्य स्थान पर आयोजित किया जाएगा।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

उमर खालिद की यह पुस्तक उनकी उसी पीएचडी थीसिस पर आधारित है जिसे JNU ने ही मान्यता दी थी। यह विडंबना ही है कि जिस संस्थान ने उनके शोध को स्वीकार किया, वही अब उस शोध पर चर्चा करने के स्थान को प्रतिबंधित कर रहा है।

क्या आप जानते हैं?: उमर खालिद को पिछले छह वर्षों से बिना किसी औपचारिक मुकदमे के यूएपीए (UAPA) के तहत हिरासत में रखा गया है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: JNU ने बुकिंग क्यों रद्द की?
प्रशासन का कहना है कि आयोजकों ने कार्यक्रम के बारे में पूरी जानकारी साझा नहीं की थी।

प्रश्न 2: क्या कार्यक्रम रद्द कर दिया गया है?
नहीं, छात्र संघ ने कहा है कि वे ऑडिटोरियम के बिना भी कार्यक्रम आयोजित करेंगे।