upGrad की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, विदेश में पढ़ाई के लिए राज्य बोर्ड के छात्रों की संख्या सीबीएससी से अधिक हो गई है। अब छात्र केवल प्रतिष्ठा के बजाय करियर की संभावनाओं और बजट को प्राथमिकता दे रहे हैं।

  • विदेशी शिक्षा चाहने वालों में 56% छात्र राज्य बोर्ड से हैं, जबकि सीबीएसई से 40% हैं।
  • पारंपरिक देशों के बजाय जर्मनी अब सबसे पसंदीदा गंतव्य बन गया है (48%)।
  • 70% छात्रों का बजट 30 लाख रुपये से कम है, जो किफायती शिक्षा की मांग को दर्शाता है।
  • टियर II और टियर III शहरों के छात्रों की भागीदारी में भारी वृद्धि हुई है।

नई दिल्ली: शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। upGrad द्वारा जारी 'ट्रांसनेशनल एजुकेशन (TNE) रिपोर्ट 2026' के अनुसार, अब भारत के राज्य बोर्ड के छात्र विदेशी विश्वविद्यालयों की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं। रिपोर्ट बताती है कि कुल आवेदकों में से 56 प्रतिशत राज्य बोर्ड से हैं, जबकि सीबीएसई (CBSE) के छात्रों की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत रही।

यह डेटा जनवरी 2025 से जून 2026 के बीच परामर्श लेने वाले 53,800 छात्रों के विश्लेषण पर आधारित है। इसमें सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि लगभग 60 प्रतिशत छात्र टियर II और टियर III शहरों से आते हैं, जो यह दर्शाता है कि वैश्विक शिक्षा अब केवल मेट्रो शहरों के संपन्न परिवारों तक सीमित नहीं रही है।

बदलते गंतव्य: अमेरिका-यूके से हटकर यूरोप की ओर

रिपोर्ट के अनुसार, छात्रों की पसंद में एक बड़ा बदलाव आया है। अब जर्मनी सबसे पसंदीदा देश बनकर उभरा है, जिसे 48 प्रतिशत छात्रों ने चुना है। इसके विपरीत, अमेरिका की प्राथमिकता घटकर 20 प्रतिशत रह गई है। जर्मनी के प्रति यह आकर्षण 2023 के बाद से लगभग दोगुना हो गया है।

कारक पारंपरिक गंतव्य (US, UK, Canada) उभरते गंतव्य (Germany, Finland, France)
लागत अत्यधिक महंगी किफायती/कम लागत
वीजा नीतियां सख्त और जटिल रोजगार-लिंक्ड और सुलभ
प्राथमिकता संस्थागत प्रतिष्ठा ROI और करियर परिणाम

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारतीय छात्र अब 'ब्रांड नेम' के बजाय 'रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट' (ROI) पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में बढ़ती ट्यूशन फीस और सख्त इमिग्रेशन नियमों ने छात्रों को यूरोपीय देशों की ओर धकेला है, जहाँ शिक्षा सस्ती है और उद्योग के साथ सीधा जुड़ाव है।

"भारतीय छात्र अब भविष्य की रोजगार क्षमता और सामर्थ्य को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे यूरोप की अपील बढ़ी है।" - प्रणीत सिंह, उपाध्यक्ष, यूनिवर्सिटी पार्टनरशिप, upGrad।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा साइंस और मशीन लर्निंग जैसे पाठ्यक्रमों की मांग सबसे अधिक बढ़ी है। यह वैश्विक बाजार में AI साक्षरता की बढ़ती मांग का परिणाम है।

क्या आप जानते हैं?: जर्मनी की शिक्षा प्रणाली अपनी 'डुअल एजुकेशन' के लिए जानी जाती है, जहाँ छात्र पढ़ाई के साथ-साथ वास्तविक कंपनियों में काम करके अनुभव प्राप्त करते हैं।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: विदेशी शिक्षा के लिए सबसे बड़ा प्रेरक क्या है?
उत्तर: 49% छात्रों के लिए बेहतर नौकरी के अवसर सबसे बड़ा कारण हैं, जबकि 24% शिक्षा की गुणवत्ता को प्राथमिकता देते हैं।

प्रश्न 2: छात्रों का औसत बजट क्या है?
उत्तर: लगभग 70% छात्रों ने 30 लाख रुपये से कम के कुल बजट के साथ विदेश पढ़ने की योजना बनाई है।