सिंगापुर मैनेजमेंट यूनिवर्सिटी (SMU) और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (LSE) ने उच्च शिक्षा में एक मौलिक बदलाव का आह्वान किया है, जिसमें पारंपरिक रैंकिंग के बजाय वास्तविक सामाजिक प्रभाव को प्राथमिकता देने की बात कही गई है।
- SMU और LSE ने प्रकाशन-केंद्रित मेट्रिक्स से हटकर मानव-केंद्रित सामाजिक प्रभाव अपनाने की वकालत की।
- शहरी स्थिरता, नेतृत्व में AI और स्वस्थ उम्र बढ़ने (Healthy Ageing) पर नए संयुक्त अनुसंधान शुरू किए जाएंगे।
- विश्वविद्यालयों को खंडित दुनिया में वैश्विक चुनौतियों को हल करने के लिए 'लिविंग लेबोरेटरीज' के रूप में देखा जा रहा है।
प्रथम SMU-LSE ग्लोबल फोरम में एक महत्वपूर्ण चर्चा के दौरान, सिंगापुर मैनेजमेंट यूनिवर्सिटी (SMU) और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स एंड पॉलिटिकल साइंस (LSE) के नेतृत्व ने एक सशक्त आह्वान किया। उन्होंने तर्क दिया कि आज की खंडित वैश्विक परिस्थितियों में, विश्वविद्यालयों को केवल उद्धरणों (citations) और रैंकिंग के पीछे भागने के बजाय उद्देश्य और लोगों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
SMU की अध्यक्ष प्रोफेसर लिली कोंग ने वर्तमान शैक्षणिक प्रोत्साहनों में एक प्रणालीगत खामी की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा कि विद्वानों को पारंपरिक रूप से प्रकाशनों और रैंकिंग को प्राथमिकता देने के लिए प्रशिक्षित किया गया है, लेकिन आधुनिक वैश्विक संकटों के लिए एक अलग दृष्टिकोण की आवश्यकता है। कोंग ने जोर दिया कि वास्तविक मूल्य इस बात में है कि ज्ञान का उपयोग व्यवसाय, सरकार और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए कैसे किया जाता है।
इसी विचार का समर्थन करते हुए, LSE के अध्यक्ष और वाइस चांसलर लैरी क्रेमर ने ईमानदार बहस के लिए स्वतंत्र स्थानों के रूप में विश्वविद्यालयों की अद्वितीय भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने तर्क दिया कि शैक्षणिक स्वतंत्रता इन संस्थानों को सामाजिक विभाजनों को दूर करने और भविष्य के उन नेताओं को तैयार करने के योग्य बनाती है जो सिद्धांतों को वास्तविक जीवन में लागू कर सकें।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि शिक्षा का पारंपरिक 'आइवरी टॉवर' मॉडल अब अपनी प्रासंगिकता खो रहा है। जैसे-जैसे सरकारें और करदाता अनुसंधान निवेश पर तत्काल परिणाम चाहते हैं, 'प्रभाव-आधारित' मूल्यांकन अब वैकल्पिक नहीं बल्कि अनिवार्य हो गया है। SMU और LSE शैक्षणिक सफलता को सामाजिक कल्याण के साथ जोड़कर विश्वविद्यालयों और जनता के बीच एक नए सामाजिक अनुबंध को परिभाषित करने का प्रयास कर रहे हैं।
यह मापना कि 'कितना' प्रकाशित हुआ, इसके बजाय यह देखना कि समाज में 'कितना' सुधार हुआ, वैश्विक उच्च शिक्षा में एक नए युग की शुरुआत है।
फोरम ने शैक्षणिक सहयोग के भू-राजनीतिक आयामों पर भी प्रकाश डाला। सिंगापुर की वरिष्ठ राज्य मंत्री सन शुएलिंग ने विश्वविद्यालयों को लचीले शहरों के निर्माण के लिए 'लिविंग लेबोरेटरीज' बताया। ब्रिटिश हाई कमिश्नर निक मेहता ने भी इस बात की पुष्टि की कि SMU-LSE साझेदारी सिंगापुर और यूनाइटेड किंगडम के बीच राजनयिक और शैक्षिक संबंधों को मजबूत करने वाला एक 'गोल्डन थ्रेड' (सुनहरा धागा) है।
इन सिद्धांतों को व्यवहार में लाने के लिए, दोनों संस्थानों ने LSE-SMU रिसर्च सीड फंड के तहत तीन प्रमुख संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं की घोषणा की। ये परियोजनाएं आधुनिक दबावों को संबोधित करती हैं:
| अनुसंधान क्षेत्र | मुख्य फोकस | भौगोलिक दायरा |
|---|---|---|
| शहरी स्थिरता | भूमि, ऊर्जा और जल पर डेटा केंद्रों का प्रभाव | जोहोर, सिंगापुर, लंदन |
| AI और कार्य का भविष्य | नेतृत्व निर्णय लेने में जेनरेटिव AI का उपयोग | वैश्विक/कॉर्पोरेट |
| दीर्घायु (Longevity) | स्वस्थ उम्र बढ़ना और कार्यबल चुनौतियां | सिंगापुर, यूके |
इस कार्यक्रम में फिनलैंड, नॉर्वे, कनाडा, फ्रांस और जर्मनी सहित कई देशों के राजदूतों और 150 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जो यह दर्शाता है कि एक उद्देश्यपूर्ण शैक्षणिक संस्कृति की इच्छा केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि एक वैश्विक प्राथमिकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न: वर्तमान शैक्षणिक संस्कृति की मुख्य आलोचना क्या है?
उत्तर: मुख्य आलोचना यह है कि यह प्रकाशनों की संख्या और वैश्विक रैंकिंग जैसे मात्रात्मक मेट्रिक्स पर बहुत अधिक निर्भर है, जो अक्सर अनुसंधान के वास्तविक सामाजिक प्रभाव की अनदेखी करते हैं।
प्रश्न: SMU और LSE इन बदलावों को कैसे लागू करेंगे?
उत्तर: रणनीतिक साझेदारी, संयुक्त अनुसंधान सीड फंड और विद्वानों के लिए मान्यता की मानव-केंद्रित प्रणालियाँ विकसित करके।