चेन्नई के स्टेला मैरिस कॉलेज के छात्रों ने नशीली दवाओं के दुरुपयोग के खिलाफ जागरूकता फैलाने के लिए एक विशाल जागरूकता मार्च और मानव श्रृंखला का आयोजन किया।
मुख्य बिंदु
- स्टेला मैरिस कॉलेज के 350 से अधिक छात्रों ने कैथेड्रल रोड पर जागरूकता मार्च निकाला।
- प्रिंसिपल सिस्टर स्टेला मैरी FMM और NSS अधिकारियों के नेतृत्व में कार्यक्रम आयोजित किया गया।
- 2,000 से अधिक छात्रों और शिक्षकों ने नशा मुक्ति की शपथ ली।
चेन्नई के प्रतिष्ठित स्टेला मैरिस कॉलेज ने मंगलवार को नशीली दवाओं के बढ़ते खतरे के खिलाफ एक सशक्त संदेश देने के लिए 'एंटी-ड्रग अवेयरनेस वॉक' और मानव श्रृंखला का आयोजन किया। यह पहल कॉलेज शिक्षा निदेशालय के निर्देशों के तहत आयोजित की गई थी।
इस जागरूकता मार्च में लगभग 350 छात्रों ने भाग लिया, जिनके साथ कॉलेज की प्रिंसिपल सिस्टर स्टेला मैरी FMM, वाइस-प्रिंसिपल, डीन और NSS कार्यक्रम अधिकारी भी मौजूद थे। छात्रों ने कॉलेज से लेकर सेमोज्झी पूंगा तक पैदल यात्रा की, जिसमें उन्होंने हाथों में तख्तियां (placards) ली हुई थीं और जागरूकता पंपलेट वितरित किए।
क्यों महत्वपूर्ण है यह कदम?
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, शैक्षणिक संस्थानों द्वारा इस तरह के जमीनी स्तर के अभियान युवाओं को नशे के जाल से बचाने और एक स्वस्थ समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि सामाजिक सक्रियता ही वास्तविक बदलाव लाती है।
युवाओं को नशे के विरुद्ध जागरूक करना केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ी को बचाने का एक मिशन है।
कार्यक्रम का समापन कॉलेज के ओपन एयर थिएटर और ऑडिटोरियम में हुआ, जहाँ लगभग 2,000 छात्र और संकाय सदस्य एकत्रित हुए। इस दौरान सभी ने नशा मुक्त जीवन जीने की सामूहिक शपथ ली। साथ ही, छात्रों द्वारा बनाई गई पोस्टर प्रतियोगिता की कलाकृतियों का भी प्रदर्शन किया गया।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत में शैक्षणिक संस्थानों के माध्यम से नशा मुक्ति अभियान पिछले कुछ वर्षों में काफी तेज हुए हैं, क्योंकि राष्ट्रीय शिक्षा नीति और विभिन्न सरकारी निकायों ने छात्रों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. यह जागरूकता मार्च कहाँ आयोजित किया गया था?
यह मार्च चेन्नई की कैथेड्रल रोड से शुरू होकर सेमोज्झी पूंगा तक आयोजित किया गया था।
2. इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य क्या था?
इसका मुख्य उद्देश्य छात्रों और समाज को नशीली दवाओं के दुरुपयोग के हानिकारक प्रभावों के प्रति सचेत करना था।