नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने परीक्षा प्रणाली में क्रांतिकारी बदलावों की घोषणा की है, जिसमें विशेषज्ञों के कार्यकाल को कम करना और 'एयर-गैप्ड' कंप्यूटर सिस्टम का उपयोग शामिल है ताकि माफिया और पेपर लीक के खतरों को रोका जा सके।
- विषय विशेषज्ञों का कार्यकाल छोटा किया जाएगा ताकि उन्हें माफिया से बचाया जा सके।
- सूचनाओं को केवल 'जरूरत के आधार पर' (need-to-know basis) साझा किया जाएगा।
- परीक्षा केंद्रों पर 'एयर-गैप्ड' सिस्टम का उपयोग होगा, जो इंटरनेट से पूरी तरह कटा होगा।
- CISF द्वारा केंद्रों की सुरक्षा और चार-स्तरीय सुरक्षा घेरा लागू किया जाएगा।
नई दिल्ली: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) और शिक्षा मंत्रालय अब एक ऐसी अभेद्य प्रणाली बनाने की दिशा में बढ़ रहे हैं, जहाँ सूचनाओं का प्रसार बहुत ही नियंत्रित और सीमित होगा। हालिया विवादों और पेपर लीक की घटनाओं के बाद, एजेंसी ने अपनी कार्यप्रणाली में व्यापक बदलाव करने का निर्णय लिया है। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, एजेंसी का लक्ष्य एक ऐसा तंत्र विकसित करना है जहाँ जानकारी को केवल उन्हीं लोगों के साथ साझा किया जाए जिन्हें उसकी सख्त आवश्यकता है।
माफिया और भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार
NTA के एक शीर्ष अधिकारी ने खुलासा किया कि विशेषज्ञों के कार्यकाल को कम करने का एक मुख्य कारण 'परीक्षा माफिया' का प्रभाव है। अधिकारी ने बताया, “माफिया इन लोगों को खरीदने या उनके साथ समझौता करने की कोशिश करता है यदि वे लंबे समय तक पद पर रहते हैं। हमें एक बहुत बड़े माफिया का सामना करना पड़ रहा है।” इसी को ध्यान में रखते हुए, विषय विशेषज्ञों की नियुक्ति के समय और उनके कार्यकाल को सीमित करने की योजना बनाई जा रही है ताकि किसी भी प्रकार के मिलीभगत की संभावना को न्यूनतम किया जा सके।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि NTA के ये कदम भारत की सबसे महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बहाल करने के लिए अनिवार्य हैं। यदि सुरक्षा में चूक होती है, तो न केवल छात्रों का भविष्य दांव पर लगता है, बल्कि देश की शिक्षा प्रणाली पर से भरोसा भी उठ जाता है। 'एयर-गैप्ड' सिस्टम और सूचनाओं का गोपनीय वितरण इस दिशा में एक निर्णायक कदम है।
"सुरक्षा की यह नई परत केवल तकनीकी नहीं, बल्कि रणनीतिक है, जिसका उद्देश्य सिस्टम के भीतर मौजूद भ्रष्टाचार को जड़ से मिटाना है।"
चार-स्तरीय सुरक्षा प्रणाली और तकनीकी सुरक्षा
नई प्रणाली को दो मुख्य स्तरों पर क्रियान्वित किया जाएगा। पहले स्तर पर, प्रश्न पत्र तैयार करने की प्रक्रिया को पूरी तरह से विभाजित किया जाएगा। इसमें प्रश्न लिखने वाले (item writers), मॉडरेट करने वाले, अनुवाद करने वाले और सत्यापन (vetting) करने वाले—ये सभी अलग-अलग समूहों के होंगे। इससे किसी एक व्यक्ति के पास पूरी जानकारी होने का जोखिम समाप्त हो जाएगा।
दूसरे स्तर पर, भौतिक सुरक्षा के लिए चार-स्तरीय प्रणाली लागू की जाएगी। परीक्षा केंद्रों पर आने वाले सभी व्यक्तियों की गहन तलाशी ली जाएगी, उनके क्रेडेंशियल्स की जांच होगी और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का सत्यापन किया जाएगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सभी कार्य 'एयर-गैप्ड सिस्टम' पर किए जाएंगे, जिसका अर्थ है कि कंप्यूटर पूरी तरह से सार्वजनिक इंटरनेट और बाहरी नेटवर्क से अलग होंगे।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
NTA को पिछले कुछ वर्षों में भारी आलोचना का सामना करना पड़ा है। संसदीय स्थायी समिति की 371वीं रिपोर्ट (2025) के अनुसार, 2024 में आयोजित 14 में से 5 प्रमुख परीक्षाओं में गंभीर समस्याएं आईं। इसमें UGC-NET, CSIR-NET और NEET-PG जैसी परीक्षाओं का स्थगन और NEET-UG में पेपर लीक जैसी घटनाएं शामिल थीं। इन विफलताओं ने प्रणाली की खामियों को उजागर किया, जिसके बाद अब यह व्यापक सुधार लागू किया जा रहा है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: एयर-गैप्ड सिस्टम क्या है?
उत्तर: यह एक ऐसा कंप्यूटर सिस्टम है जो किसी भी बाहरी नेटवर्क या इंटरनेट से भौतिक रूप से जुड़ा नहीं होता, जिससे हैकिंग का खतरा लगभग समाप्त हो जाता है।
प्रश्न 2: NTA विशेषज्ञों का कार्यकाल क्यों कम कर रहा है?
उत्तर: ताकि विशेषज्ञ लंबे समय तक पद पर रहकर माफिया के प्रभाव में न आ सकें और परीक्षाओं की शुचिता बनी रहे।