ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन (GCC) ने शहर में 7,302 बच्चों की पहचान की है जो स्कूल नहीं जा रहे हैं, जिनमें 59% लड़के हैं। कमिश्नर जी.एस. समीरन ने बच्चों को वापस शिक्षा प्रणाली में लाने के लिए एक व्यापक योजना की घोषणा की है।

  • चेन्नई में कुल 7,302 बच्चे स्कूल से बाहर पाए गए हैं।
  • बाहर रहने वाले बच्चों में लड़कों की संख्या (4,308) लड़कियों (2,994) से काफी अधिक है।
  • GCC ने 31 अगस्त तक इन बच्चों का पुन: नामांकन सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा है।

ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन (GCC) ने एक चिंताजनक प्रवृत्ति का खुलासा किया है, जिसमें निगम के स्कूलों में शिक्षा से वंचित बच्चों में लड़कों की संख्या लड़कियों की तुलना में काफी अधिक है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, स्कूल से बाहर रहने वाले कुल बच्चों में 59% लड़के हैं।

GCC कमिश्नर डॉ. जी.एस. समीरन ने बताया कि शहर में कुल 4,308 लड़कों और 2,994 लड़कियों की पहचान की गई है जो वर्तमान में औपचारिक शिक्षा प्रणाली से बाहर हैं। इस समस्या की गंभीरता को देखते हुए, कॉर्पोरेशन ने प्रत्येक समुदाय के लिए अलग-अलग हस्तक्षेप करने हेतु समुदाय-वार विवरण संकलित करने का निर्णय लिया है।

शिक्षा के मार्ग में बाधाएं

डॉ. समीरन ने इस बात पर प्रकाश डाला कि कई बच्चे अदृश्य बने रहते हैं क्योंकि वे प्रवास, बार-बार घर बदलने, एकल-अभिभावक परिवारों, माता-पिता की उपेक्षा या अत्यधिक आर्थिक संकट जैसी स्थितियों से जूझ रहे हैं। विशेष रूप से विकलांग बच्चों, चिकित्सा स्थितियों वाले बच्चों और बाल श्रम के जोखिम वाले बच्चों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

हमारा उद्देश्य केवल नामांकन नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी बच्चा शिक्षा प्रणाली से दोबारा बाहर न निकले।

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल एक नामांकन का मुद्दा नहीं है, बल्कि एक गहरा सामाजिक-आर्थिक संकट है। GCC अब केवल बच्चों को स्कूल भेजने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उनके परिवारों की सामाजिक-आर्थिक जरूरतों को पूरा करने और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने पर भी काम करेगा।

कार्यान्वयन योजना और प्रशिक्षण

इस संकट से निपटने के लिए, नेशनल अर्बन लाइवलीहुड्स मिशन (NULM) के 96 सामुदायिक आयोजकों को प्रशिक्षित किया गया है। ये आयोजक जमीनी स्तर पर परिवारों के साथ संपर्क करेंगे, परामर्श देंगे और पुन: नामांकन प्रक्रिया में सहायता करेंगे।

रिपोन बिल्डिंग स्थित अम्मा मालीगई ऑडिटोरियम में आयोजित एक समन्वय बैठक में, कमिश्नर ने स्पष्ट किया कि 31 अगस्त तक इन पहचाने गए बच्चों के पुन: नामांकन के लिए ठोस कार्रवाई की जाएगी। इसमें स्वास्थ्य, श्रम और समाज कल्याण विभागों के साथ समन्वय शामिल होगा।

ऐतिहासिक संदर्भ

शहरी क्षेत्रों में बच्चों का स्कूल छोड़ना अक्सर मौसमी प्रवास और गरीबी के चक्र से जुड़ा होता है। चेन्नई जैसे महानगर में, जहां आर्थिक असमानता अधिक है, यह समस्या शिक्षा के अधिकार (RTE) को लागू करने में एक बड़ी चुनौती पेश करती है।

Did You Know?: भारत में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 6 से 14 वर्ष के सभी बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा सुनिश्चित करता है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: चेन्नई में कितने बच्चे स्कूल से बाहर हैं?
उत्तर: वर्तमान में 7,302 बच्चों की पहचान की गई है।

प्रश्न 2: GCC इन बच्चों की मदद कैसे कर रहा है?
उत्तर: GCC सामुदायिक आयोजकों के माध्यम से घर-घर जाकर पहचान करने, परामर्श देने और पुन: नामांकन सुनिश्चित करने का काम कर रहा है।