चेन्नई में आयोजित एक पैनल चर्चा के दौरान विशेषज्ञों ने कहा कि केवल स्कूलों का निर्माण पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके बुनियादी ढांचे का सही उपयोग और छात्रों के भावनात्मक विकास पर ध्यान देना अनिवार्य है।

  • स्कूली बुनियादी ढांचे की उपलब्धता के साथ-साथ उसके प्रभावी उपयोग पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।
  • 30 वर्ष से पुराने स्कूल भवनों के पुनर्निर्माण और मूल्यांकन की तत्काल आवश्यकता है।
  • शिक्षा में केवल ज्ञान (Cognitive) ही नहीं, बल्कि भावनाओं और दृष्टिकोण (Affective Domain) पर भी काम करना जरूरी है।
  • उच्च माध्यमिक शिक्षा के बाद छात्रों के सुचारू संक्रमण (Transition) को सुनिश्चित करना राज्य की जिम्मेदारी है।

चेन्नई में आयोजित एक महत्वपूर्ण पैनल चर्चा, जिसका विषय 'भारत में शिक्षा: UDISE और AISHE से प्राप्त अंतर्दृष्टि' था, में शिक्षा विशेषज्ञों ने देश की शैक्षिक स्थिति पर गंभीर चिंताएँ व्यक्त कीं। मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेंट स्टडीज (MIDS) की शोधकर्ता मृणालिनी बद्री नारायण ने जोर देकर कहा कि वर्तमान में हम एक ऐसे मोड़ पर हैं जहाँ हमें केवल बुनियादी ढांचे की उपलब्धता पर ही नहीं, बल्कि उसके उचित उपयोग पर भी ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।

मृणालिनी ने सुझाव दिया कि UDISE (यूनीफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन) डेटा का उपयोग करके यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि मौजूदा संसाधनों का अधिकतम लाभ उठाया जा सके। उन्होंने विशेष रूप से तमिलनाडु का उदाहरण देते हुए कहा कि शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम से पहले भी राज्य में सरकारी स्कूलों का घनत्व अच्छा था, लेकिन अब समय आ गया है कि उन स्कूलों की समीक्षा की जाए जिनके भवन 30 वर्ष से अधिक पुराने हैं और उनके पुनर्निर्माण की योजना बनाई जाए।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत में शिक्षा का संकट अब केवल 'स्कूलों की कमी' का नहीं है, बल्कि 'संसाधनों के प्रबंधन' का है। यदि बुनियादी ढांचे का उपयोग डेटा-संचालित तरीके से नहीं किया जाता है, तो भारी निवेश के बावजूद शैक्षिक परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं होंगे।

शिक्षा का लक्ष्य केवल सूचना देना नहीं, बल्कि छात्र के व्यक्तित्व और दृष्टिकोण का निर्माण करना होना चाहिए।

चर्चा के दौरान, डिस्ट्रिक्ट इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन एंड ट्रेनिंग की प्रिंसिपल एस. शमीन ने शिक्षा के तीन प्रमुख क्षेत्रों में से एक, 'अफेक्टिव डोमेन' (Affective Domain) पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जहाँ हम संज्ञानात्मक डोमेन (Cognitive Domain) यानी ज्ञान प्रदान करने में सफल रहे हैं, वहीं छात्रों की भावनाओं, संवेदनाओं और शिक्षकों के दृष्टिकोण को सुधारने की दिशा में हमें अभी बहुत काम करना बाकी है।

यूनिसेफ (UNICEF) की संचार विशेषज्ञ दिव्या श्याम सुधीर बंदी ने एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू को छुआ। उन्होंने कहा कि राज्य को केवल शिक्षा तक पहुंच सुनिश्चित करने तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि छात्र उच्च माध्यमिक शिक्षा से अगले चरण (जैसे उच्च शिक्षा या करियर) में बिना किसी बाधा के संक्रमण कर सकें।

इस सत्र का संचालन MIDS के प्रोफेसर एम. विजयबास्कर ने किया। विशेषज्ञों का यह साझा मत था कि भविष्य की शिक्षा प्रणाली को अधिक समावेशी और छात्र-केंद्रित बनाने के लिए बुनियादी ढांचे और भावनात्मक बुद्धिमत्ता के बीच संतुलन बनाना होगा।

Frequently Asked Questions

1. UDISE डेटा का शिक्षा में क्या महत्व है?
UDISE डेटा स्कूलों के बुनियादी ढांचे, नामांकन और अन्य महत्वपूर्ण सांख्यिकीय जानकारी प्रदान करता है, जिससे नीति निर्माताओं को संसाधनों के बेहतर आवंटन में मदद मिलती है।

2. 'अफेक्टिव डोमेन' से क्या तात्पर्य है?
यह शिक्षा का वह हिस्सा है जो छात्रों के व्यवहार, भावनाओं, मूल्यों और दृष्टिकोण से संबंधित है, न कि केवल किताबी ज्ञान से।

Did You Know?: भारत में शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम 2009 बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा सुनिश्चित करने वाला एक मील का पत्थर है।