जेएनटीयूके के कुलपति प्रोफेसर सी.एस.आर.के. प्रसाद ने इंजीनियरिंग स्नातकों को नवाचार और उद्यमिता के माध्यम से नए अवसर पैदा करने के लिए प्रेरित किया है। उन्होंने तकनीकी कौशल को लगातार अपडेट करने पर जोर दिया।
- इंजीनियरों को केवल नौकरी खोजने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला (उद्यमी) बनना चाहिए।
- बदलती तकनीकी प्रवृत्तियों के साथ कौशल को लगातार अपडेट करना अनिवार्य है।
- कॉर्पोरेट सफलता के लिए तकनीकी ज्ञान और संचार कौशल दोनों आवश्यक हैं।
गुंटूर के पास विंजनाम्पाडु में आयोजित केईआर और केएसआर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंसेज (KITS) के तीसरे दीक्षांत समारोह के दौरान, जेएनटीयूके (JNTUK) के कुलपति प्रोफेसर सी.एस.आर.के. प्रसाद ने इंजीनियरिंग स्नातकों को एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आज के युग में इंजीनियरों को केवल नौकरी चाहने वाले (Job Seekers) बनकर नहीं रहना चाहिए, बल्कि नवाचार (Innovation) को अपनाकर उद्यमी (Entrepreneurs) बनने की दिशा में कदम बढ़ाना चाहिए।
प्रोफेसर प्रसाद ने इस बात पर जोर दिया कि तकनीकी दुनिया तेजी से बदल रही है। उन्होंने स्नातकों को सलाह दी कि वे उभरती हुई तकनीकों के साथ तालमेल बिठाने के लिए अपने कौशल को निरंतर निखारते रहें। उनके अनुसार, जो इंजीनियर स्वयं अवसर पैदा करने की क्षमता विकसित करेंगे, वे ही भविष्य की चुनौतियों का सामना कर पाएंगे।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत में इंजीनियरिंग स्नातकों की भारी संख्या के बीच, कौशल अंतराल (Skill Gap) एक बड़ी चुनौती है। केवल पारंपरिक डिग्री प्राप्त करना पर्याप्त नहीं है; उद्योग की मांग के अनुसार खुद को ढालना और स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देना देश की आर्थिक वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण है।
इंजीनियरों को नवाचार के माध्यम से नए अवसर पैदा करने की क्षमता विकसित करनी चाहिए।
कार्यक्रम में अतिथि सम्मान के रूप में उपस्थित इन्फोसिस आंध्र प्रदेश डिलीवरी एंड डेवलपमेंट सेंटर के प्रमुख नर्रा सुरेश ने कॉर्पोरेट जगत की वास्तविकताओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि तकनीकी विशेषज्ञता के साथ-साथ प्रभावी संचार कौशल (Communication Skills) और निरंतर सीखने की प्रवृत्ति ही कॉर्पोरेट क्षेत्र में सफलता की कुंजी है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत में इंजीनियरिंग शिक्षा का उद्देश्य दशकों से तकनीकी विशेषज्ञ तैयार करना रहा है, लेकिन हाल के वर्षों में 'स्टार्टअप इंडिया' जैसी पहलों ने शिक्षा जगत के दृष्टिकोण को बदल दिया है। अब ध्यान केवल 'रोजगार पाने' पर नहीं, बल्कि 'रोजगार सृजन' पर केंद्रित हो रहा है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: कुलपति ने इंजीनियरों को क्या सलाह दी?
उत्तर: उन्होंने इंजीनियरों को नौकरी खोजने के बजाय नवाचार के माध्यम से उद्यमी बनने की सलाह दी।
प्रश्न 2: कॉर्पोरेट सफलता के लिए किन कौशलों की आवश्यकता है?
उत्तर: तकनीकी ज्ञान, संचार कौशल और निरंतर सीखने की क्षमता आवश्यक है।