द हिंदू ग्रुप के निदेशक एन. रवि ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रबंधन में केवल शेयरधारक मूल्य पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि कर्मचारियों और समाज के प्रति भी जिम्मेदारी होनी चाहिए। उन्होंने कॉर्पोरेट जगत में बढ़ती आर्थिक असमानता के प्रति सचेत रहने की सलाह दी।
- प्रबंधन में केवल मुनाफे के बजाय नैतिकता और सामाजिक जिम्मेदारी को प्राथमिकता दें।
- कॉर्पोरेट जगत में सीईओ और सामान्य कर्मचारियों के बीच बढ़ती वेतन असमानता पर चिंता व्यक्त की गई।
- छात्रों को आजीवन सीखने, कानून की समझ और वित्तीय साक्षरता पर जोर देने की सलाह दी गई।
चेन्नई में आयोजित MEASI इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट के 17वें दीक्षांत समारोह के दौरान, द हिंदू ग्रुप पब्लिशिंग प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक एन. रवि ने भविष्य के प्रबंधकों को नैतिकता और सामाजिक उत्तरदायित्व का पाठ पढ़ाया। उन्होंने जोर देकर कहा कि हालांकि शेयरधारकों के मूल्य को प्राथमिकता देना महत्वपूर्ण है, लेकिन दीर्घकालिक समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए प्रबंधकों को अपने कर्मचारियों, ग्राहकों, आपूर्तिकर्ताओं और व्यापक समुदाय के हितों का भी ध्यान रखना चाहिए।
एन. रवि ने 'हायर-एंड-फायर' (रखने और निकालने) की नीति के बजाय कर्मचारियों के प्रति करुणा दिखाने की वकालत की। उन्होंने कहा कि ईमानदार विज्ञापन और ग्राहक संतुष्टि केवल व्यावसायिक रणनीति नहीं, बल्कि नैतिक सिद्धांत होने चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि जहां ईमानदारी निवेश को फलने-फूलने में मदद करती है, वहीं नैतिक कामकाज को एक अनिवार्य सिद्धांत (categorical principle) के रूप में अपनाया जाना चाहिए।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि आधुनिक कॉर्पोरेट जगत में केवल वित्तीय लाभ पर ध्यान केंद्रित करने से संस्थागत स्थिरता खतरे में पड़ सकती है। एन. रवि द्वारा उठाई गई असमानता की समस्या आज के वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में एक अत्यंत प्रासंगिक मुद्दा है, जो कंपनियों के भीतर असंतोष पैदा कर सकता है।
प्रबंधन में नैतिकता केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि दीर्घकालिक सफलता की नींव है।
असमानता के मुद्दे पर बात करते हुए, उन्होंने फ्रांसीसी अर्थशास्त्री थॉमस पिकेटी का संदर्भ दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि 'विजेता-सब-ले-जाता-है' (winner-take-it-all) वाली संस्कृति, जहां सीईओ और शीर्ष प्रबंधकों को भारी बोनस मिलता है जबकि सामान्य कर्मचारी न्यूनतम वेतन पर काम करते हैं, कंपनियों के भीतर भारी आक्रोश पैदा कर सकती है। उन्होंने बताया कि वित्तीय निवेश से प्राप्त रिटर्न अन्य उत्पादक क्षेत्रों की तुलना में अधिक होने के कारण पूंजीपतियों और अन्य लोगों के बीच की खाई चौड़ी होती जा रही है।
दीक्षांत समारोह के दौरान, टी.ए.एम. हमीद कान (निदेशक, MEASI MIM) ने बताया कि संस्थान के छात्रों ने लगातार तीसरे वर्ष मद्रास विश्वविद्यालय से स्वर्ण पदक जीते हैं। संस्थान को इस वर्ष तीन साल के लिए NBA मान्यता भी प्राप्त हुई है। समारोह में कुल 180 छात्रों को उनकी डिग्री प्रदान की गई।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
मैनेजमेंट एथिक्स (प्रबंधन नैतिकता) का विषय दशकों से अकादमिक जगत में चर्चा का केंद्र रहा है। 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के बाद से, कॉर्पोरेट गवर्नेंस और नैतिक नेतृत्व की आवश्यकता और भी अधिक बढ़ गई है, क्योंकि अनैतिक प्रथाओं ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को अस्थिर किया था।
Frequently Asked Questions
1. एन. रवि ने छात्रों को कौन से चार मुख्य सुझाव दिए?
उन्होंने आजीवन सीखना, कानून और नीति की समझ, प्रबंधन में नैतिकता का अनुप्रयोग और अपनी मातृ संस्था (alma mater) के प्रति जुड़ाव बनाए रखने का सुझाव दिया।
2. MEASI संस्थान की हालिया उपलब्धि क्या है?
संस्थान ने इस वर्ष तीन वर्षों के लिए NBA मान्यता प्राप्त की है और उनके छात्र लगातार तीसरे वर्ष मद्रास विश्वविद्यालय में स्वर्ण पदक जीत रहे हैं।