गुंटूर के विज्ञान विश्वविद्यालय ने समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग और संरक्षण के लिए 'ब्लू इकोनॉमी' पर एक अत्याधुनिक उत्कृष्टता केंद्र की शुरुआत की है। यह केंद्र समुद्री अनुसंधान, तकनीकी नवाचार और कौशल विकास पर ध्यान केंद्रित करेगा।

  • विज्ञान विश्वविद्यालय, गुंटूर में 'ब्लू इकोनॉमी' उत्कृष्टता केंद्र का उद्घाटन।
  • थीम: 'सतत महासागर - समृद्ध भविष्य'।
  • INCOIS के साथ अनुसंधान और कौशल विकास के लिए समझौता।
  • समुद्री जैव प्रौद्योगिकी, मत्स्य पालन और ऑफशोर ऊर्जा पर विशेष ध्यान।

आंध्र प्रदेश के गुंटूर स्थित विज्ञान विश्वविद्यालय ने शनिवार को समुद्री संसाधनों के सतत प्रबंधन और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए 'ब्लू इकोनॉमी' (नीली अर्थव्यवस्था) पर एक उत्कृष्टता केंद्र (Centre of Excellence) का उद्घाटन किया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य समुद्री पर्यावरण की रक्षा करते हुए महासागरों से मिलने वाले आर्थिक लाभों का अधिकतम उपयोग करना है।

कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज (NIAS), बेंगलुरु के निदेशक डॉ. शैलेश नायक ने कहा कि भविष्य की आर्थिक वृद्धि के लिए समुद्री संसाधनों का सतत उपयोग अनिवार्य है। उन्होंने जोर दिया कि नीली अर्थव्यवस्था को जलवायु परिवर्तन, पारिस्थितिक संतुलन और आजीविका के साथ एकीकृत किया जाना चाहिए, जिसमें मानवीय सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण सर्वोपरि हो।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत की विशाल तटरेखा को देखते हुए, समुद्री अर्थव्यवस्था में नवाचार की अपार संभावनाएं हैं। यह केंद्र न केवल शैक्षणिक अनुसंधान बल्कि औद्योगिक समाधानों के लिए भी एक सेतु का काम करेगा।

समुद्री संसाधनों का संरक्षण और उनका आर्थिक दोहन एक ही सिक्के के दो पहलू होने चाहिए।

केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. श्रीनिवास कुमार तुम्मला ने इस अवसर पर मत्स्य पालन, शिपिंग, ऑफशोर ऊर्जा, समुद्री पर्यटन और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में मौजूद विशाल अवसरों पर प्रकाश डाला। उन्होंने सरकारों, उद्योगों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच समन्वय की आवश्यकता पर बल देते हुए छात्रों और स्टार्टअप्स को तकनीकी समाधान विकसित करने के लिए प्रेरित किया।

इस महत्वपूर्ण अवसर पर INCOIS और विज्ञान विश्वविद्यालय के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस साझेदारी का उद्देश्य महासागरीय अवलोकन, सूचना प्रणाली, अनुसंधान, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और इंटर्नशिप के माध्यम से कौशल विकास को बढ़ावा देना है।

ऐतिहासिक संदर्भ

भारत की 'ब्लू इकोनॉमी' नीति का लक्ष्य समुद्री संसाधनों के माध्यम से जीडीपी में वृद्धि करना है, जिसमें समुद्री जैव प्रौद्योगिकी और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

Did You Know?: भारत की समुद्री अर्थव्यवस्था में मत्स्य पालन, शिपिंग और समुद्री खनिज जैसे क्षेत्र अरबों डॉलर का योगदान देते हैं।

Frequently Asked Questions

1. ब्लू इकोनॉमी क्या है?
यह समुद्री पारिस्थितिक तंत्र के स्वास्थ्य को बनाए रखते हुए समुद्री संसाधनों का आर्थिक उपयोग करने की अवधारणा है।

2. इस केंद्र का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य समुद्री अनुसंधान, नवाचार, नीति निर्माण और कौशल विकास के माध्यम से सतत समुद्री विकास को बढ़ावा देना है।