बेंगलुरु के क्राइस्ट यूनिवर्सिटी में न्यूरोडाइवर्सिटी और समावेशिता पर एक महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें विशेषज्ञों ने विकलांगता के क्षेत्र में नवाचार और तकनीक पर चर्चा की।

  • बेंगलुरु के क्राइस्ट यूनिवर्सिटी में न्यूरोडाइवर्सिटी और समावेशिता पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन 2026 का आयोजन।
  • विशेषज्ञों ने एआई (AI) और डिजिटल स्वास्थ्य के नैतिक उपयोग पर जोर दिया।
  • अनुसंधानकर्ताओं, शिक्षकों और परिवारों के बीच सहयोग की आवश्यकता पर बल।

बेंगलुरु में आयोजित 'अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन ऑन न्यूरोडाइवर्सिटी एंड इंक्लूजन 2026' ने न्यूरोडेवलपमेंटल विकलांगताओं के प्रति वैश्विक दृष्टिकोण को बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सेंटर फॉर न्यूरोडाइवर्सिटी रिसर्च एंड इनोवेशन (CNRI) और स्कूल ऑफ साइकोलॉजिकल साइंसेज ने न्यूयॉर्क के बिंगमटन यूनिवर्सिटी, इशान्या इंडिया फाउंडेशन, स्टेपिंग स्टोन्स सेंटर और क्राइस्ट स्पेशल स्कूल के साथ मिलकर इस भव्य कार्यक्रम का आयोजन क्राइस्ट (डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी) में किया।

सम्मेलन का मुख्य विषय 'जीवन भर समावेशिता को आगे बढ़ाना: न्यूरोडेवलपमेंटल विकलांगताओं के लिए वैश्विक अभ्यास और नवाचार' था। इस मंच पर दुनिया भर के प्रमुख विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया और समावेशी समाज के निर्माण के लिए नए मॉडलों पर चर्चा की।

तकनीक और नैतिकता का संगम

सम्मेलन के मुख्य वक्ता, इंस्टिट्यूट ऑफ ह्यूमन बिहेवियर एंड अलाइड साइंसेज (IHBAS) के निदेशक राजिंदर कुमार धमजा ने एक प्रभावशाली संबोधन दिया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि न्यूरोडाइवर्सिटी के क्षेत्र में प्रगति के लिए केवल वैज्ञानिकों का ही नहीं, बल्कि चिकित्सकों, शिक्षकों, परिवारों और स्वयं उन लोगों की आवश्यकता है जो इन चुनौतियों के साथ जी रहे हैं।

धमजा ने भविष्य की राह दिखाते हुए सहायक तकनीक (Assistive Technology), डिजिटल स्वास्थ्य और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। हालांकि, उन्होंने एक चेतावनी भी दी कि तकनीक के बढ़ते उपयोग के साथ गोपनीयता (Privacy), पूर्वाग्रह (Bias), सुलभता और भेदभाव जैसे नैतिक मुद्दों का समाधान करना अनिवार्य है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि जैसे-जैसे दुनिया डिजिटल हो रही है, न्यूरोडाइवर्सिटी के प्रति संवेदनशीलता और तकनीक का सही संतुलन ही समावेशी भविष्य सुनिश्चित कर सकता है। यह सम्मेलन केवल एक चर्चा नहीं, बल्कि नीति निर्माताओं के लिए एक रोडमैप है।

न्यूरोडाइवर्सिटी को एक बाधा नहीं, बल्कि मानव विविधता के एक अभिन्न अंग के रूप में देखा जाना चाहिए।

यह सम्मेलन इस बात को रेखांकित करता है कि कैसे वैश्विक सहयोग के माध्यम से हम विकलांगता से जुड़ी सामाजिक और तकनीकी बाधाओं को दूर कर सकते हैं।

Did You Know?: न्यूरोडाइवर्सिटी शब्द का उपयोग ऑटिज्म, ADHD और डिस्लेक्सिया जैसी स्थितियों को 'बीमारी' के बजाय 'मस्तिष्क के भिन्न प्रकार' के रूप में देखने के लिए किया जाता है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य क्या था?
उत्तर: इसका उद्देश्य न्यूरोडेवलपमेंटल विकलांगताओं के लिए वैश्विक नवाचारों और समावेशी प्रथाओं पर चर्चा करना था।

प्रश्न 2: सम्मेलन में किन तकनीकी पहलुओं पर ध्यान दिया गया?
उत्तर: मुख्य रूप से एआई (AI), डिजिटल स्वास्थ्य और सहायक तकनीकों के नैतिक उपयोग पर ध्यान केंद्रित किया गया।