IIT दिल्ली के एक 31‑वर्षीय MSc छात्र की कैंपस में अचानक मृत्यु के बाद छात्र वर्ग ने प्रशासनिक लापरवाही का आरोप लगा कर बहिष्कार किया। वे स्वतंत्र जांच, कक्षा बंद और दो वरिष्ठ अधिकारियों के पदत्याग की माँग कर रहे हैं।

  • 31 वर्षीय MSc छात्र की कैंपस में मृत्यु, छात्रों ने प्रशासनिक लापरवाही का आरोप लगाया।
  • क्लासेस का बहिष्कार, स्वतंत्र जांच और दो अधिकारियों के पदत्याग की माँग।
  • पिछले 30 महीनों में IIT दिल्ली में 8 आत्महत्याएँ, प्रणालीगत मानसिक स्वास्थ्य समस्या के संकेत।

नई दिल्ली – भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली के छात्रों ने सोमवार को कक्षा बंद कर एक बड़े प्रदर्शन में भाग लिया, जहाँ उन्होंने 31‑वर्षीय MSc छात्र की अचानक मृत्यु के संबंध में स्वतंत्र जांच की माँग की। छात्र एक नोट में निदेशक रंगन बनर्जी को लिखते हुए कहा कि प्रशासनिक लापरवाही ने इस दुखद परिणाम को जन्म दिया।

विद्यार्थियों का दावा है कि संस्थान ने मृतक को मानसिक रूप से अस्थिर बताया, जबकि वास्तव में उन्हें उचित हॉस्टल आवास और शैक्षणिक परियोजनाओं से वंचित किया गया। एक गुमनाम छात्र ने बताया कि छात्र को VIMHANS में इलाज के लिए भेजा गया, परंतु पुनरावास के बाद उसे फिर से हॉस्टल रूम नहीं दिया गया, जिससे आर्थिक तनाव बढ़ गया।

छात्रों ने नोट में संस्थान से कई प्रश्न उठाए: हॉस्टल आवास की गैर‑व्यवस्था, शैक्षणिक परियोजनाओं की अस्वीकृति, और अत्यधिक प्रतिस्पर्धी माहौल में अस्पताल प्रशासन की अनदेखी। उन्होंने दो प्रशासनिक अधिकारियों के पदत्याग और इस प्रकार की लापरवाही पर कड़ी प्रतिक्रिया की भी माँग की।

Historical Background

पिछले दो दशकों में IIT दिल्ली में छात्र मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दे लगातार सामने आए हैं। 2020 में एक समान मामले में छात्रों ने मानसिक स्वास्थ्य काउंसलिंग को संस्थागत बनवाने की मांग की थी, लेकिन पर्याप्त बदलाव नहीं हुए। इस बार की घटनाएँ पिछले 30 महीनों में आठ आत्महत्या मामलों को उजागर करती हैं, जो एक गहरी प्रणालीगत समस्या को दर्शाती हैं।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that unchecked administrative lapses in premier educational institutions can cascade into nationwide concerns about student welfare, potentially influencing policy reforms across Indian higher education.

"शैक्षणिक संस्थानों को छात्र सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देनी चाहिए, अन्यथा उनके भविष्य की क्षति अपरिवर्तनीय होगी," कहा मनोवैज्ञानिक डॉ. अंजलि सिंह ने।
Did You Know?: IIT दिल्ली में 2018 में भी एक समान छात्र मृत्यु के बाद छात्रों ने हॉस्टल आवास नीति में बदलाव की मांग की थी, लेकिन वह पूरी तरह लागू नहीं हो पाई।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: क्या इस मामले में पुलिस ने कोई आधिकारिक रिपोर्ट जारी की है?

उत्तर: संस्थान ने बताया है कि पुलिस जांच में है, परंतु अभी तक कोई आधिकारिक निष्कर्ष नहीं आया है।

प्रश्न 2: छात्रों ने कौन से कदम उठाने की योजना बनाई है यदि उनकी मांगें पूरी नहीं होती?

उत्तर: वे लगातार शांति पूर्ण प्रदर्शन जारी रखने और सामाजिक मीडिया के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर इस मुद्दे को उठाने का इरादा रखते हैं।