जादवपुर विश्वविद्यालय में 20 अगस्त को हुई तोड़फोड़ की जांच कर रहे पैनल के अध्यक्ष प्रोफेसर सुभा शंकर सरकार ने इस्तीफा दे दिया है। आरएसएस से जुड़े शिक्षक संगठन के विरोध के बाद यह कदम उठाया गया है।
- प्रोफेसर सुभा शंकर सरकार ने जांच समिति के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया।
- आरएसएस से जुड़े संगठन 'अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ' ने उनकी नियुक्ति का विरोध किया था।
- 20 अगस्त को एबीवीपी और वामपंथी छात्र समूहों के बीच हिंसा हुई थी।
- विश्वविद्यालय जल्द ही नए अध्यक्ष की नियुक्ति करेगा।
कोलकाता के प्रतिष्ठित जादवपुर विश्वविद्यालय में चल रहा विवाद एक नए मोड़ पर आ गया है। 20 अगस्त को परिसर में हुई तोड़फोड़ और हिंसा की जांच के लिए गठित पांच सदस्यीय समिति के अध्यक्ष, प्रोफेसर सुभा शंकर सरकार ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने पुष्टि की है कि जल्द ही एक नए अध्यक्ष की नियुक्ति की जाएगी।
प्रोफेसर सरकार ने अपने इस्तीफे के पीछे व्यावहारिक कठिनाइयों का हवाला दिया है। उन्होंने कुलपति चिंरजीब भट्टाचार्जी को ईमेल भेजकर सूचित किया कि वर्तमान में दिल्ली में होने के कारण वे परिसर में मौजूद लोगों के साथ नियमित रूप से व्यक्तिगत रूप से बातचीत करने में असमर्थ हैं। हालांकि विश्वविद्यालय ने उन्हें ऑनलाइन माध्यम से जांच करने का सुझाव दिया था, लेकिन उन्होंने इसे प्रभावी नहीं माना।
क्यों महत्वपूर्ण है यह घटना?
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, इस इस्तीफे ने विश्वविद्यालय के भीतर राजनीतिक ध्रुवीकरण को और गहरा कर दिया है। यह मामला केवल एक प्रशासनिक इस्तीफा नहीं है, बल्कि यह शैक्षणिक संस्थानों में निष्पक्षता और जांच की विश्वसनीयता पर उठ रहे बड़े सवालों को दर्शाता है।
जांच की निष्पक्षता पर उठते सवाल अक्सर शैक्षणिक संस्थानों की स्वायत्तता को चुनौती देते हैं।
गौरतलब है कि सरकार का इस्तीफा आरएसएस से जुड़े शिक्षक संगठन, अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ द्वारा उनके खिलाफ लिखे गए विरोध पत्र के कुछ ही घंटों बाद आया है। इस संगठन ने तर्क दिया कि प्रोफेसर सरकार की नियुक्ति से जांच की 'विश्वसनीयता, स्वतंत्रता और निष्पक्षता' पर संदेह पैदा हो सकता है। संगठन ने मांग की है कि जांच का नेतृत्व कलकत्ता उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश द्वारा किया जाना चाहिए।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
जादवपुर विश्वविद्यालय लंबे समय से छात्र राजनीति और वैचारिक संघर्षों का केंद्र रहा है। 20 अगस्त की घटना में एबीवीपी (ABVP) और वामपंथी छात्र समूहों (SFI और DSO-DSF) के बीच हिंसक झड़प हुई थी। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर परिसर में बाहरी तत्वों को लाने और तोड़फोड़ करने का आरोप लगाया था।
विवाद तब और बढ़ गया जब संगठन के सदस्यों ने प्रोफेसर सरकार के पिछले कार्यकाल पर सवाल उठाए। उन्होंने 2022 में पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग के अध्यक्ष के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान हुई कथित अनियमितताओं का उल्लेख किया, जिसे लेकर कलकत्ता उच्च न्यायालय ने भी टिप्पणी की थी।
Frequently Asked Questions
1. प्रोफेसर सरकार ने इस्तीफा क्यों दिया?
उन्होंने कहा कि वे दिल्ली में हैं और व्यक्तिगत रूप से जांच के लिए परिसर में मौजूद लोगों से नहीं मिल पाएंगे, जिससे जांच प्रभावी नहीं होगी।
2. विरोध करने वाला संगठन कौन सा है?
आरएसएस से जुड़ा 'अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ' इस नियुक्ति का विरोध कर रहा था।