अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय छात्रों की कुल संख्या बढ़ रही है, लेकिन नए नामांकन में गिरावट देखी गई है। इसके बावजूद, भारत अभी भी अमेरिका में सबसे बड़ा छात्र स्रोत बना हुआ है।
- अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय छात्रों की कुल संख्या में 5% की वृद्धि हुई है।
- भारत 363,019 छात्रों के साथ अमेरिका में सबसे बड़ा छात्र स्रोत बना हुआ है।
- नए अंतरराष्ट्रीय नामांकन में 7% की गिरावट दर्ज की गई है।
- H-1B वीजा शुल्क में प्रस्तावित भारी वृद्धि भारतीय छात्रों के लिए चिंता का विषय है।
हालिया Open Doors के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय छात्रों की कुल संख्या में वृद्धि देखी गई है, जो 2024-25 शैक्षणिक वर्ष के दौरान 1,177,766 तक पहुंच गई है। हालांकि, यह वृद्धि नए छात्रों के आगमन से नहीं, बल्कि मौजूदा छात्रों की निरंतरता से प्रेरित है। डेटा से पता चलता है कि पहली बार अमेरिका में नामांकन करने वाले अंतरराष्ट्रीय छात्रों की संख्या में 7% की गिरावट आई है, जो अब 277,118 रह गई है।
भारत: एक विरोधाभासी लेकिन मजबूत स्थिति
डेटा एक दिलचस्प विरोधाभास पेश करता है। एक तरफ, अंतरराष्ट्रीय आवेदकों के रूप में भारत से अमेरिका जाने वाले छात्रों की संख्या में कमी आई है, वहीं दूसरी ओर, अमेरिका में 'घरेलू आवेदक' (Domestic Applicants) के रूप में भारतीय मूल के छात्रों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है। Common App के आंकड़ों के अनुसार, भारतीय मूल के घरेलू आवेदकों की संख्या 2016-17 में 20,000 से कम थी, जो 2025-26 में बढ़कर 40,949 हो गई है। यह पिछले दशक में दोगुने से भी अधिक की वृद्धि है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि छात्र प्रवाह का यह पैटर्न अमेरिकी उच्च शिक्षा प्रणाली के बदलते स्वरूप को दर्शाता है। जहां एक ओर अंतरराष्ट्रीय प्रवेश द्वार संकुचित हो रहे हैं, वहीं अमेरिका के भीतर भारतीय डायस्पोरा की शैक्षणिक भागीदारी तेजी से बढ़ रही है। यह दीर्घकालिक जनसांख्यिकीय बदलाव को इंगित करता है।
नए नामांकन में गिरावट और H-1B नियमों में बदलाव का संयोजन अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए अमेरिका को एक अनिश्चित गंतव्य बना सकता है।
भारत ने चीन को भी पीछे छोड़ दिया है। जहाँ चीन के 26,296 आवेदक थे, वहीं भारतीय मूल के आवेदकों की संख्या में चीन की तुलना में अधिक विकास दर देखी गई है। इसके अलावा, Optional Practical Training (OPT) में 21% की वृद्धि यह दर्शाती है कि छात्र अब पढ़ाई के बाद अमेरिकी रोजगार प्रणाली से जुड़ने पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
H-1B वीजा और बढ़ते वित्तीय बोझ
भारतीय छात्रों के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय अमेरिका के आव्रजन नियमों में बदलाव है। US Department of Homeland Security ने H-1B याचिकाओं के लिए $103,265 का भारी शुल्क प्रस्तावित किया है। यदि यह लागू होता है, तो यह उन नियोक्ताओं के लिए बहुत महंगा हो जाएगा जो अंतरराष्ट्रीय स्नातकों को प्रायोजित करना चाहते हैं, जिससे अंततः छात्रों के लिए रोजगार के अवसर प्रभावित हो सकते हैं।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या अमेरिका में भारतीय छात्रों की संख्या कम हो रही है?
उत्तर: अंतरराष्ट्रीय आवेदकों के रूप में गिरावट आई है, लेकिन घरेलू स्तर पर भारतीय मूल के छात्रों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है।
प्रश्न 2: H-1B शुल्क प्रस्ताव का क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर: प्रस्तावित $103,265 का शुल्क नियोक्ताओं के लिए लागत बढ़ा देगा, जिससे अंतरराष्ट्रीय छात्रों को स्पॉन्सरशिप मिलना कठिन हो सकता है।